म्यूच्यूअल फंड, शेयर मार्केट, बांड निवेश आदि सभी पूँजी निवेश करने के लिए बहुत ही अच्छे मंच है ये सभी बाजार जोखिमों के अंतर्गत है इसलिए हमेशा अपनी पूँजी को निवेश करने के पहले हमे इनके बारे में पूर्ण जानकारी जुटा लेना चाहिए। हमारे द्वारा निवेश किया गया पैसा हमारी सालों की खून पसीने की मेहनत द्वारा जमा की गयी पूँजी होती है इसलिए हमे हमेशा पूरी जानकारी होने पर ही इस प्रकार के जोखिम भरे बाजारों में निवेश करना चाहिए।

अगर आप इस बाजार में निवेश करना चाहते है तो आज हम आपकी सहायता के लिए लाए है बांड की जानकारी। दोस्तों बांड इन्वेस्टमेंट का रूप भले ही शेयर मार्केट तथा म्यूच्यूअल फंड जैसा होता है परन्तु इसके नियम जोखिम के प्रकार आदि सभी जानकारी बहुत ही सरल और अलग है। यदि आप Bonds Investment करना चाहते है तो आपको इसकी समझ होना अत्यंत आवश्यक है। अगर आप बांड के बारे में संपूर्ण जानकारी चाहते है तो हमारी इस पोस्ट को पूरा पढ़े।

Bond Kya Hota Hai Or Ise Kaise Kharidte

Bond Kya Hota Hai

बांड एक निश्चित आय की तरह होता है जिसमे निवेशक किसी कंपनी या सरकार को निश्चित समय के लिए ऋण देता है इसमें ब्याज की दर फ़िक्स होती है या एक तय फॉर्मूले के आधार पर बदल भी सकती है। जिस प्रकार आप शेयर खरीद कर किसी भी कंपनी में हिस्सेदारी लेते है ठीक उसी प्रकार बांड खरीदकर आप बांड बेचने वाले को उधार देते है जिसके बदले में वह आपको निश्चित ब्याज देता है। बांड के द्वारा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और कंपनियां अपने प्रोजेक्ट के लिए पैसा एकत्रित करती है। बांड का हिंदी में अर्थ (Bond Meaning In Hindi) प्रतिभूति या ऋणपत्र होता है अर्थात ऋण आदि से संबंधित सरकारी कागज।

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Types Of Bond

वर्तमान में बांड मार्केट का वित्तीय क्षेत्र में अत्यंत महत्पूर्ण स्थान है। बांड को अच्छी तरह से समझने के लिए Bond Ke Prakar जानना बहुत ही आवश्यक है। वैसे तो Types Of Bonds In India बहुत प्रकार के है, जिनकी अलग-अलग अवधि तथा ब्याज दर है। कुछ प्रमुख बांड के प्रकार नीचे प्रदर्शित है:

Government Bond

बांड के प्रकार में सबसे पहले आता है “सरकारी बांड” यदि आप Sarkari Bond Kya Hai है के बारे में नहीं जानते तो हम आपको बता दे कि, सरकारी बांड को ट्रेज़री बांड भी कहा जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला बांड है जो आमतौर पर कूपन अवधि नामक ब्याज द्वारा मूल्य चुकाने पर आधारित होता है। यह सबसे कम ब्याज दर वाला तथा सबसे सुरक्षित बांड है। यह सरकार के पूर्ण विश्वास और क्रेडिट द्वारा समर्थित है इसलिए इसे कुछ प्रमुख OECD देशों में जोखिम मुक्त बांड भी कहा जाता है।

Corporate Bonds

Corporate Bonds बड़े वित्तीय निगम और वित्तीय संस्थान द्वारा जारी किया जाता है। इसमें ऑनगोइंग ऑपरेशन, M&A तथा व्यवसाय के विस्तार के लिए फाइनेंस को बढ़ाया जाता है। कॉर्पोरेट बांड अधिक रिटर्न देते है, परन्तु इसमें जोखिम भी बहुत अधिक होता है। इसकी अवधि लगभग 12 साल तक हो सकती है और किसी भी पैसे का निवेश करने से पहले कंपनी की जांच कर लेना चाहिए कि कहीं वो कंपनी फर्जी तो नहीं है।

Municipal Bonds

म्युनिसिपल बांड स्थानीय क्षेत्र की सरकार या उन्ही की किसी एजेंसी द्वारा जारी किया जाता है इसे म्युनि बांड के नाम से भी जानते है। SEBI के अनुसार, नगरपालिका बांड को जनता को जारी किए जाने से पहले 3 साल की परिपक्वता अवधि की आवश्यकता होती है। इन बांडों को एक सुरक्षित निवेश विकल्प भी माना जाता है क्योंकि म्युनिसिपल बांड राज्य सरकार द्वारा समर्थित होते है।

High-Yield Bond

यह एक ऐसा बांड है जिसे फाइनेंस में निवेश ग्रेड से नीचे रखा गया है और इसी कारण इसे High-yield Bond के नाम जाना जाता है। ये बॉन्ड उन कंपनियों द्वारा जारी किए जाते है, जिन्होंने बाजार में नया प्रवेश किया होता है तथा जिनका बाजार में खुद को स्थापित करना बाकी रहता है। ये बॉन्ड ज्यादा रिटर्न प्रदान करते है, लेकिन इनमें जोखिम भी बहुत होता है। जो निवेशक उच्च जोखिम लेना पसंद करते है यह बांड उनके लिए एक बहुत अच्छा विकल्प है।

Bond Market In India

भारत में बॉन्ड बाजार को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, मुख्य बाज़ार तथा समर्थक बाजार।

मुख्य बाज़ार

मुख्य बाजार में, जिन्हे धन उधार लेने की आवश्यकता होती है, वे अपने बांड खरीदने के लिए आम जनता या निवेश बैंकों को आमंत्रित करते है। इसमें बांड पहले से निर्धारित ब्याज दर पर एक निश्चित कार्यकाल के लिए जारी किए जाते हैं।

समर्थक बाजार

समर्थक बाजार में, जिन निवेशकों ने पहले मुख्य बाजार में बांड ख़रीदे थे, वे दूसरे निवेशकों को अपने बांड बेचते है। बहुत सारे ब्रोकर समर्थक बाजार में काम करते है जो इस प्रकार के लेन-देन की सुविधा प्रदान करते है।

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Why Invest In Bonds Over Stocks

बहुत बार कई लोगों को उलझन रहती है कि उन्हें बांड्स में निवेश करना चाहिए या स्टोक्स में। बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि बांड, स्टोक्स की तुलना में अधिक फ़ायदेमंद है क्योंकि ये एक अनुमानित आय स्ट्रीम प्रदान करते है तथा आमतौर पर बांड साल में दो बार ब्याज प्रदान करते है। इसमें बांड धारक वापस पूर्ण मूल धन प्राप्त कर लेते है अर्थात यह पूँजी संरक्षित करने का भी बहुत अच्छा तरीका है। आपकी सुविधा के लिए हमने Bonds Vs Stocks पर एक तालिका बनाकर उनका तुलनात्मक वर्णन किया है।

Bonds Vs Stocks

बांड्सस्टॉक्स
बांड्स में निवेशक द्वारा कर्ज दिया जाता है।स्टॉक्स में निवेशक कंपनी का पार्टनरशिप में मालिक होता है।
इसमें सामान्यतः कम जोखिम तथा कम मुनाफा होता है।इसमें जोखिम तथा मुनाफा दोनों ही अधिक होते है।
बांड्स में 1929 से ही प्रतिवर्ष न्यूनतम 6% का मुनाफा हो रहा है।स्टॉक्स में 1929 से प्रतिवर्ष न्यूनतम 10% का मुनाफा हो रहा है।
इसमें कॉर्पोरेट, म्युनिसिपल या सरकारी बांड बनाए जा सकते है।यह स्टॉक्स एक्सचेंज पर मौजूद कंपनियों द्वारा IPOs के रूप में प्रदान किये जाते है।
आमतौर पर यह कारोबार OTC द्वारा किया जाता है।यह कारोबार आमतौर पर सेंट्रल एक्सचेंज जैसे NYSE द्वारा किया जाता है।

How To Buy A Bond In India

ऊपर हमने आपको बांड से जुड़ी लगभग सभी सामान्य जानकारी प्रदान की है परन्तु अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा Bond Kaise Kharide इसलिए हम नीचे बांड खरीदने के लिए सभी आवश्यक जानकारी बता रहे है जिनकी सहायता से आपको बांड खरीदने में आसानी होगी।

विशेषताऐं (Features)

अवधि 7 वर्ष
ब्याज दर7.75 % प्रतिवर्ष (कर-युक्त)
जोखिम संलग्नकम जोखिम
न्यूनतम निवेश1000/- रुपए
अधिकतम निवेशकोई सीमा नहीं (1000 के गुना में)
कोलेट्रल सुविधाउपलब्ध नहीं

पात्रता (Eligibility)

संयुक्त या एकल किसी भी प्रकार के बांड को खरीदने के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। यदि आवेदक नाबालिक है तो आवेदक के माता-पिता भी भारतीय नागरिक होना चाहिए।

आवेदन कैसे करें

बांड निवेश का आवेदन करने के लिए, अपने नज़दीकी बैंक शाखा से संपर्क किया जा सकता है। आवेदन करने के कुछ दिनों के पश्चात् आपको अपना नाम लिखा बांड पत्र प्राप्त हो जायेगा।

Gold Bond Kaise Kharide

गोल्ड बांड रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा अन्य बैंकों के माध्यम से बेचा जाता है। गोल्ड बांड खरीदने के लिए आप किसी भी बैंक, चुनिंदा पोस्ट ऑफ़िस, SHCIL (स्टोक होल्डिंग कोर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया) या फिर BSE या NSE पर संपर्क कर सकते है। इसके लिए ब्याज दर 2.5% है जो कि आपको हर 6 माह में प्रदान किया जाता है।

आवश्यक दस्तावेज़: गोल्ड बांड खरीदने के लिए आपको पहचान पत्र तथा एड्रेस प्रूफ की आवश्यकता होगी।

गोल्ड बांड खरीदने के लिए आप 20,000 से ज्यादा का पेमेंट नकद नहीं कर सकते है इसलिए यदि आप 20,000 से ज्यादा का पेमेंट कर रहे है तो आप पेमेंट करने के लिए चेक, डिमांड ड्राफ्ट, डिजिटल पेमेंट या नेटबैंकिंग का उपयोग कर सकते है।

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Bond Valuation

प्रत्येक बांड के लिए बांड का उचित मूल्य निर्धारित किया जाता है और इस उचित मूल्य निर्धारण करने की विधि को Bond Valuation कहते है। बांड वैल्यूएशन के मूल सिद्धांत के अनुसार “बांड वैल्यूएशन का मूल्य इसके नकद बजट के वर्तमान मूल्यों के योग के बराबर होता है”। Bond Valuation एक सही मूल्य का निर्धारण करने के लिए सभी सुविधाओं का ध्यान रखता है

Bond Valuation ज्ञात करने के लिए हमे सबसे पहले बांड का वर्तमान मूल्य निकालना पड़ता है इसके बाद हम सभी वर्षो के वर्तमान मूल्य को जोड़कर कुल Bond Value निकाल सकते है, इसका सूत्र नीचे प्रदर्शित है:

बांड वैल्यू = वर्तमान मान n1 + वर्तमान मान n2 + ……. + वर्तमान मान n

What Is Blue Bond In Hindi

Blue Bond भी ग्रीन बांड जैसा एक ऋण प्राप्त करने का साधन है। जो सरकारों, विकासशील बैंकों या अन्य लोगों द्वारा जारी किया गया है। यह प्रभावी निवेशकों से पूँजी एकत्रित कर समुद्र और महासागर आधारित परियोजनाओं में उपयोग करने के लिए बनाया गया है। इन परियोजनाओं में सकारात्मक पर्यावरण, आर्थिक और जलवायु लाभ होता है। विश्व का पहला ब्लू बांड सेशल्स द्वारा जारी किया गया है।

Advantages And Disadvantages Of Issuing Bonds

वैसे तो बांड निवेश एक कम जोखिम वाला निवेश है परन्तु इसमें फायदे और नुकसान दोनों है आइये जानते है Benefits Of Investing In Bond Funds तथा Disadvantages Of Bonds क्या है:

Advantages Of Bond Investors

बांड में निवेश करने के बहुत से फायदे है। इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ नीचे दर्शाये गए है:

  • बांड एक ऋण सुरक्षा है जिसके अंतर्गत बांड धारक, जारीकर्ता को ऋण देता है और बांड की शर्तों के आधार पर बांड का ब्याज चुकाने के पश्चात् तय की गयी तारीख़ से पहले मूल-धन चुकाने के लिए भी बाध्य करता है।
  • साधारणतः बांड तरल होते है इसमें अक्सर किसी भी संस्था के लिए मूल्य को प्रभावित किये बिना बांड को बेचना बहुत आसान होता है।
  • निवेशकों की अलग-अलग पसंद के अनुसार ही बांड भी अनेक प्रकार के है।
  • बांड की अस्थिरता स्टॉक मार्केट की तुलना में कम होती है इसलिए आमतौर पर इसे शेयरों की तुलना में अधिक सुरक्षित समझा जाता है।
  • बहुत से देशों में बांड धारको को क़ानूनी सुरक्षा प्राप्त है जिसके अनुसार यदि कोई कंपनी दिवालिया घोषित हो जाती है तो भी बांड होल्डर्स को कुछ पैसे जरूर मिलेंगे।

Disadvantages Of Bonds

जिस तरह बांड में निवेश करने के कुछ फायदे है उसी तरह इसके कुछ कुछ नुकसान है भी जिनके बारे में आपको आगे बताया गया है:

  • आमतौर पर ब्याज दरों में वृद्धि होने पर बॉन्ड्स के बाजार मूल्य में कमी आ जाती है।
  • यदि कंपनी दिवालिया घोषित हो जाती है तो उस कंपनी के बांड होल्डर्स को अपना सारा पैसा गँवाना पड़ सकता है क्योंकि बांड धारको को कितने पैसे चुकाना बाकी है इसकी कोई गारंटी नहीं होती है।
  • बांड बहुत से जोखिमों के अधीन होता है जैसे- कॉल और प्रीपेड जोखिम, क्रेडिट जोखिम, घटना जोखिम, अस्थिरता जोखिम, विनिमय दर जोखिम आदि।
  • जब ब्याज दरे गिर रही होती है तब निवेशकों को अपने पैसों के लिए नई जगह खोजने पर बाध्य किया जाता है जिससे निवेशक अपनी आशा के अनुरूप सौदा प्राप्त नहीं कर पाता है।

Benefits Of International Bond Investing

अंतराष्ट्रीय बांड निवेश से निवेशकों को बहुत सारे फायदे होते है। जिनमें से मुख्य Benefits Of International Equity And Bond Investing यह है कि इसमें निवेशकों को स्वदेशी कम्पनी तथा बाजार के अलावा विदेशी बाजारों और कम्पनियो में भी अपने निवेश को फ़ैलाने में मदद मिलती है। इसके द्वारा उभरते बाजारों तथा विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था का फायदा लेकर बहुत ज्यादा मुनाफ़ा अर्जित किया जा सकता है।

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Debentures And Bonds In Hindi

कई लोग बांड तथा डिबेंचर दोनों को समान समझते है परन्तु इन दोनों में बहुत सारी असमानताएँ है, इन्हे समझने के लिए नीचे प्रदर्शित बिंदुओं का सहारा लिया जा सकता है।

  • अधिकतर सरकारी संस्थानों द्वारा पूँजी एकत्रित करने के लिए जारी किये गए वित्तीय साधन को बांड तथा किसी भी अन्य कंपनियों द्वारा सार्वजनिक या निजी पूँजी जुटाने के लिए जारी किये गए वित्तीय साधन को डिबेंचर कहा जाता है।
  • डिबेंचर की ब्याज दर बांड से अधिक होती है।
  • बांड में डिबेंचर की तुलना में बहुत कम जोखिम होता है।
  • डिबेंचर लेने वाले को डिबेंचर धारक तथा बांड लेने वाले को बांड धारक कहा जाता है।

Conclusion:

बांड को खरीदते समय तीन चीज़ो का मुख्य रूप से ध्यान रखना चाहिए और ये तीन चीजे है सम मूल्य (अंकित मूल्य), कूपन दर तथा परिपक्वता की तारीख। सम मूल्य आपको बांड परिपक्व होने पर मिलने वाली राशि की जानकारी देता है तथा कूपन मूल्य का अर्थ बांड पर मिलने वाले ब्याज दर और परिपक्वता की तारीख मूल धन राशि वापस मिलने की अवधि बताती है।

दोस्तों हम आशा करते है हमारे द्वारा बांड के बारे में बताई गयी संपूर्ण जानकारी से आपके सभी उलझने दूर हो गयी होगी फिर भी यदि आपके पास इससे सम्बन्धित कोई भी सवाल या सुझाव है तो आप हमसे कमेंट में कह सकते है हम आपको रिप्लाई ज़रूर करेंगे। अगर आपको बांड की जानकारी पसंद आयी है तो इसे Like करना न भूले तथा आपने दोस्तों से भी इस जानकारी को शेयर करें, धन्यवाद!

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