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व्याकरण किसे कहते हैं? – व्याकरण की परिभाषा, भेद उदाहरण सहित।

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दोस्तों हम स्कूल या कॉलेज में कोई भी भाषा पढ़ते है तो उसके साथ हमें व्याकरण की किताब भी पढ़ने को दी जाती है। इस किताब में संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, समास, कारक आदि तत्व पाठ के रूप में होते है। इन तत्वों का प्रयोग भाषा में शुद्धता लाने के लिए किया जाता है, इसलिए यह भी कहा जाता है की भाषा का अभिन्न अंग होता है व्याकरण। परन्तु अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि Vyakaran Kise Kahate Hain तो आज का ये लेख ख़ास आपके लिए है।

व्याकरण में भाषा का शुद्ध रूप से प्रयोग कैसे किया जाता है, उसके नियम बताये जाते है। व्याकरण में हमें भाषा में प्रयोग होने वाले विभिन्न तत्वों से अवगत करवाया जाता है, जैसे- भाषा में कितने तत्व होते हैं, कौनसे तत्व क्या होते हैं, उनके भेद क्या होता है, उनका प्रयोग कैसे और क्यों करते है, आदि के बारे में विस्तार से समझाया जाता है। जिससे हमें उस भाषा का प्रयोग करने में आसानी हो और हम स्पष्टता और शिष्टता से अपने विचार दूसरों के सामने व्यक्त कर पाए।

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किसी भी भाषा को सही से जानने, समझने, बोलने तथा लिखने के लिए उसके व्याकरण की जानकारी होना आवश्यक होता है। आपके बोलने या लिखने का तरीका आपके शिष्टाचार तथा सभ्यता को दर्शाता है। हमारे आम बोलचाल की भाषा में व्याकरण इतना मायने नहीं रखता मगर कार्यालयों, व्यवसाय व व्यापार के क्षेत्र में भाषा का शुद्ध रूप से प्रयोग किया जाना बहुत मायने रखता है।

इसलिए व्याकरण के महत्व को समझते हुए आज का ये लेख हम आपके लिए लेकर आये है। इसमें मैंने उन सभी विषयो के बारे में बताया है जिनसे आपके ज्ञान में वृद्धि होगी, जैसे- Vyakaran Ki Paribhasha, व्याकरण किसे कहते हैं इसके कितने भेद हैं, आदि।

Vyakaran Kise Kahate Hain

व्याकरण किसे कहते हैं

व्याकरण भाषा के नियमों का बोध करवाती है। किसी भाषा को शुद्ध रूप से कैसे बोलना है, कैसे लिखना है ये हमें व्याकरण सिखाता है। जैसे, वाक्य में शब्दों का प्रयोग क्रमानुसार करने से ही उनमें अर्थ के आधार पर संबंध बना रहता है। भाषा में व्याकरण का प्रयोग ज़्यादातर लिखित रूप में मुख्य भूमिका निभाता है। भाषा का सही प्रयोग व्याकरण के माध्यम से ही किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर-

  • है पढ़ शगुन रही।
  • रही है पढ़ शगुन।
  • शगुन पढ़ रही है।

ऊपर दिए गये वाक्यों में से सिर्फ एक वाक्य शुद्ध है, जो कि है तीसरा वाक्य- शगुन पढ़ रही है। क्योंकि इसमें व्याकरण के नियमानुसार अर्थपूर्ण वाक्य बनाया गया है तथा अन्य दो वाक्य अशुद्ध हैं, इनका अर्थ सही रूप से प्रकट नहीं हो रहा है। इसी प्रकार भाषा में व्याकरण के प्रयोग से शुद्धता आती है।

हर मानक भाषा का व्याकरण होता है, अर्थात हर ऐसी भाषा जिसका प्रयोग सरकारी कार्यालयों, व्यवसाय, व्यापार, शिक्षा आदि क्षेत्रों में किया जाता है उसका व्याकरण होता है। भाषा के नियम व्याकरण में लिखे जाते है। यह नियम भाषा के विशेषज्ञों द्वारा बनाये जाते है।

मुझे आशा है कि व्याकरण किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझने में आपको आसानी हुई होगी। अब जब आप जान गये है कि Vyakaran Kya Hai या Grammar Kise Kahate Hain, तो चलिए अब जानते हैं Grammar Ki Paribhasha क्या होती है।

क्या आपने इसे पढ़ा: Shabd Kise Kahate Hain – शब्द की परिभाषा, उदाहरण और भेद।

व्याकरण की परिभाषा

जिस शास्त्र की सहायता से हम अपनी भाषा को शुद्धता तथा स्पष्टता के साथ प्रकट कर पाते है, उसे व्याकरण कहते है। व्याकरण में भाषा के प्रयोग से सम्बंधित नियमों का संकलन और विश्लेषण होता है। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो, जिस विद्या से हमें भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान होता है, उसे व्याकरण कहते है।

व्याकरण के भेद

व्याकरण भाषा पर निर्भर करता है। भाषा वाक्यों को जोड़कर बनती है, वाक्य शब्दों के अर्थपूर्ण मेल से बनते है और शब्द विभिन्न वर्णों के मेल से बनते है, इसलिए भाषा के आधार पर ही व्याकरण के निम्नलिखित 4 भेद या अंग होते है –

1. वर्ण विचार
2. शब्द विचार
3. पद विचार
3. वाक्य विचार

चलिए अब इन्हें विस्तार से समझते है।

1. वर्ण विचार

व्याकरण के जिस भाग में वर्णों की साहयता से शब्द बनाने के नियम निर्धारित होते हैं, उसे वर्ण विचार कहते हैं। इसमें वर्णों का आकर क्या होगा, उसका उच्चारण क्या होगा और उसके मेल से शब्दों का निर्माण कैसे किया जाएगा, इसके नियम होते है। वर्ण को अक्षर भी कहा जा सकता है। वर्ण भाषा की वह इकाई होते है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। यह भाषा की सबसे छोटी इकाई होते है और इसका मौखिक रूप ध्वनि कहलाता है।

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वर्णों के नियमानुसार प्रयोग से ही सार्थक या अर्थपूर्ण शब्दों का निर्माण होता है। वर्ण को अंग्रेजी में ‘Letter’ कहा जाता है और वर्णमाला को अंग्रेजी में Alphabets कहते है। किसी भी भाषा को सीखने तथा सिखाने की शुरुआत वर्णों से ही होती है। हिंदी भाषा में कुल 52 वर्ण है। वहीं अंग्रेजी भाषा में वर्णों की कुल संख्या 26 है।

वर्ण के उदाहरण- अ, क, त, ल, म, च, प, ब, आदि।

2. शब्द विचार

व्याकरण के इस भाग में विभिन्न शब्दों के प्रयोग से सम्बंधित नियम होते है। वर्णों के अर्थपूर्ण मेल को शब्द कहा जाता है। वर्णों के नियमानुसार मेल से बने हर शब्द का कम से कम एक अर्थ आवश्य होता है।

जैसे- जल, आग, पवन, नयन, आदि।

3. पद विचार

जब शब्दों का प्रयोग किसी वाक्य में किया जाता है तब उन्हें संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, कर्ता आदि पद में बाँटा जाता है, इसी के नियम व्याकरण के जिस भाग में होते है उसे पद विचार कहते है। सरल भाषा में कहा जाए तो, जैसे ही कोई शब्द किसी वाक्य में प्रयोग हो जाता है, तब वह शब्द ‘पद’ कहलाता है।

उदाहरण- सीता आम खाती है।

इसमें सीता- कर्तापद, आम- कर्मपद तथा खाती है- क्रियापद है।

4. वाक्य विचार

व्याकरण के जिस भाग में वाक्य बनाने के नियम तय होते है, उसे वाक्य विचार कहा जाता है। शब्दों के नियमानुसार मेल से अर्थपूर्ण वाक्य का निर्माण होता है।

जैसे- राम चाय बना रहा है।

इस उदाहरण में सार्थक शब्दों के मेल से यानी ‘राम, चाय, बना, रहा, है’ शब्दों के मेल से एक अर्थ प्रकट हो रहा है, इसलिए यह वाक्य कहलायेगा।

हमें आशा करते है की अब आप जान गये होंगे कि व्याकरण किसे कहते हैं व्याकरण के कितने भेद होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि व्याकरण किसे कहते हैं Class 5 के बच्चों के लिए जानना बहुत ज़रूरी है। इसका कारण यह है कि 5 वी कक्षा के बाद बच्चों को स्कूल में एक और नई भाषा सिखाई जाती है। ज़्यादातर छात्रों को सिर्फ साहित्य पढ़ना पसंद होता है और वह व्याकरण पर ध्यान कम देते है जिसके कारण उनकी भाषा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।

इसे जरूर पढ़े: Muhavare in Hindi – 300+ हिंदी मुहावरे।

हिंदी व्याकरण किसे कहते हैं?

हिंदी भाषा को शुद्ध रूप से कैसे लिखा तथा बोला जाए इसका बोध हमें जिस शास्त्र से होता है, उसे हिंदी व्याकरण कहते है। हिंदी व्याकरण में हिंदी भाषा के प्रयोग से संबंधित सभी नियम मौजूद होते है। इन नियमों और तत्वों का अध्ययन करने से हिंदी भाषा पर पकड़ मजबूत हो जाती है। इसलिए हिंदी भाषा का शुद्ध रूप से प्रयोग करने के लिए हिंदी व्याकरण का अध्ययन करना आवश्यक है।

Conclusion

अपने भाव या विचार प्रकट करने के लिए आप जिस भी भाषा का प्रयोग करते है, उस भाषा का शुद्द रूप से प्रयोग करने के लिए आपको व्याकरण की आवश्यता होती है। व्याकरण भाषा के अध्ययन के लिए एक बहुत ही विशाल तथा महत्वपूर्ण विषय है। इसकी महत्वत्ता को समझते हुए आज मैंने इस पोस्ट के माध्यम से आपको व्याकरण किसे कहते हैं परिभाषा सहित जानकारी प्रदान की है। इसमें हमने आपको व्याकरण किसे कहते हैं तथा इसके कितने भेद हैं आदि के बारे में भी संक्षेप में बताया है।

हमें उम्मीद है हमारी इस पोस्ट के माध्यम से आपको व्याकरण के बारे में जानकारी प्राप्त करने में सरलता हुई होगी। यह पोस्ट यदि आपको उपयोगी लगा हो तो इसे अपने दोस्तों, सहपाठियों, छात्रों आदि के साथ शेयर ज़रूर करें क्योंकि व्याकरण के बारे में जानना सबके लिए आवश्यक है। अंत में, इस पोस्ट से सम्बंधित किसी प्रकार के सुधार या सुझाव आपके पास हो तो कृपया हमें नीचे कमेंट करके बताएं।

व्याकरण से जुड़े FAQs

  • हिंदी व्याकरण मे ध्वनि क्या है?

हिंदी व्याकरण में वर्ण का मौखिक रूप ध्वनि कहलाता है। ध्वनि का अर्थ होता है आवाज़।

  • व्याकरण की सबसे बड़ी इकाई क्या है?

‘वाक्य’ व्याकरण की सबसे बड़ी इकाई होती है।

  • हिंदी व्याकरण के जनक कौन है?

श्री दामोदर पंडित जी को हिंदी व्याकरण का जनक माना जाता है। श्री दामोदर पंडित जी द्वारा 12वीं शताब्दी में एक ग्रन्थ की रचना की गयी थी, जिसका नाम ‘उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण’ है।

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Riya Vohra

रिया वोहरा पढ़ने-लिखने की शौक़ीन है। इन्हें फैक्ट्स के आधार पर अपनी बात रखना पसंद है। इन्हें स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है और लोगों को अपनी कलम के माध्यम से जागरूक करना चाहती है।

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