अगर वीडियोस की बात आती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में यूट्यूब का ख़्याल आता है जो दुनिया में सबसे बड़ा वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म है। यूट्यूब अपने प्लेटफॉर्म पर हानिकारक और गलत इरादे के अंतर्गत बने वीडियोस पर हमेशा रोक लगाता रहा है और इसके लिए यूट्यूब ने कुछ पॉलिसीस भी बनाई है। इन्ही पॉलिसीस में यूट्यूब ने एक और धारा जोड़ी है जो उपयोगकर्ताओं को हैकिंग और फिशिंग सिखाने या फिर इन्हे प्रोत्साहित करने वाले वीडियोस बनाने से रोकेगी एवं ऐसे वीडियोस यूट्यूब पर अपलोड करने वालो को नुकसान झेलना पड़ेगा।

फिलहाल यूट्यूब की कंटेंट वॉइलेशन पॉलिसी में ऐसे वीडियोस पर रोक है जिनमे बेहद खतरनाक चुनौतियाँ, जानलेवा दवाइयों का उपयोग या निर्माण, हिंसात्मक घटनाएँ या भोजन विकार से संबंधित दृश्य हो। इसके अलावा इस नई केटेगरी में अब से ऐसे वीडियोस को अपलोड करने पर भी रोक होगी जिसमे उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित कंप्यूटर सिस्टम को हैक करने या उपयोगकर्ता क्रेडेंशियल्स और व्यक्तिगत डेटा चोरी करने का तरीका बताया गया हो।

इस कड़ी में कुछ ऐसे चैनल्स पर भी कार्यवाही की गई जो एथिकल हैकर्स, कंप्यूटर वैज्ञानिक और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों की मदद करने के लिए हैकिंग से संबंधित वीडियोस बनाते है। लेकिन अगले ही दिन इन चैनल्स पर से प्रतिबंध हटा दिया गया और यूट्यूब ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि अगर हैकिंग से संबंधित वीडियो अपलोड करने का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक, दस्तावेजी, वैज्ञानिक या कलात्मक होगा तो ऐसे चैनल्स पर यूट्यूब द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।

कुछ ही समय पहले गूगल के स्वामित्व वाले यूट्यूब ने ये कहा था कि हम ऐसे वीडियोस को हटा रहे है जो डॉक्यूमेंटरी की आड़ में हिंसक घंटनाओ को दर्शातें है, इसके अलावा नाज़ी विचारधारा वाले और भेदभाव से भरे अपनी श्रेष्ठता का दावा करने वाले वीडियोस को भी यूट्यूब से हटा दिया जाएगा। यूट्यूब ने ऐसे वीडियोस पर अभी से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और ऐसे चैनल्स जिन पर ऐसे वीडियोस की भरमार है उन्हें प्रतिबंधित करना भी शुरू कर दिया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here