अमावस्या व्रत कथा

हर अमावस्या – पितर और शिव व्रत

अमावस्या व्रत कथा – तिथि, कथा, विधि, नियम और लाभ सहित संपूर्ण जानकारी।

अमावस्या व्रत कथा का परिचय और महत्व

तिथि: हर अमावस्या

देवता: पितर और शिव

पितर शांति और शिव उपासना।

व्रत कथा

अमावस्या पितरों को समर्पित है। इस दिन पितर तर्पण और दान करने से पितृ दोष निवारण होता है। शनि अमावस्या, सोमवती अमावस्या विशेष।

व्रत के नियम

व्रत की विधि

  1. संकल्प: स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
  2. स्थान: पूजा स्थल को शुद्ध करें।
  3. आवाहन: देवता का आवाहन।
  4. पूजन: षोडशोपचार पूजन।
  5. कथा श्रवण: व्रत कथा सुनना या सुनाना अनिवार्य।
  6. आरती: समापन में आरती।
  7. प्रसाद: भोग अर्पित कर प्रसाद बांटें।
  8. पारण: व्रत के नियमानुसार अगले दिन पारण।

मंत्र और पूजन

ॐ पितृभ्यः नमःपितर मंत्र।

व्रत के लाभ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमावस्या व्रत कथा कब रखा जाता है?
यह व्रत पितर और शिव को समर्पित है। तिथि और विस्तृत जानकारी लेख में दी गई है।
क्या अमावस्या व्रत कथा में पानी पी सकते हैं?
यह व्रत के प्रकार पर निर्भर करता है। कुछ व्रत निर्जला (बिना पानी के) होते हैं, कुछ फलाहार के साथ।
अमावस्या व्रत कथा का पारण कब करें?
व्रत समाप्ति के बाद पूजा कर, कथा सुनकर, प्रसाद ग्रहण करके पारण करें। सूर्योदय या चंद्रोदय के बाद।
क्या महिलाएं इस व्रत में किसी विशेष नियम का पालन करती हैं?
हां, सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। विस्तृत नियम
व्रत रखने से क्या मिलता है?
मनोकामना पूर्ति, पारिवारिक सुख, रोग नाश और आध्यात्मिक विकास।
क्या यह व्रत पुरुष भी रख सकते हैं?
हां, पारिवारिक या धार्मिक कारण से पुरुष भी व्रत रख सकते हैं। बीमार और वृद्ध फलाहार के साथ रखें।

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