देवी कवच

माँ दुर्गा – स्तोत्र पाठ विधि

देवी कवच – पाठ, अर्थ, विधि और लाभ सहित। माँ दुर्गा का शक्तिशाली स्तोत्र।

देवी कवच का परिचय

देवी कवच दुर्गा सप्तशती का प्रथम अंग है। मार्कंडेय ऋषि और ब्रह्मा का संवाद। इसमें माँ दुर्गा के 9 रूप (नव दुर्गा) से शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा की प्रार्थना है।

आरंभिक श्लोक

मार्कण्डेय उवाच। ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥

पूरा देवी कवच पाठ आमतौर पर पंडित या मंदिर में उपलब्ध पुस्तक से किया जाता है।

रचना की पृष्ठभूमि

देवी कवच दुर्गा सप्तशती का प्रथम अंग है। मार्कंडेय ऋषि और ब्रह्मा का संवाद। इसमें माँ दुर्गा के 9 रूप (नव दुर्गा) से शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा की प्रार्थना है।

पाठ की विधि

  1. सप्तशती पाठ के साथ।
  2. नवरात्रि में।
  3. 10-15 मिनट।

पाठ के लाभ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवी कवच कब पढ़ें?
ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल सर्वोत्तम। विशेष अवसरों (त्यौहार, जयंती) पर विशेष।
देवी कवच कितनी देर में होता है?
आमतौर पर 15-30 मिनट। सुंदरकांड जैसे लंबे पाठ में 1-2 घंटे।
क्या देवी कवच रोज पढ़ सकते हैं?
हां, दैनिक पाठ उत्तम है। कुछ स्तोत्र विशेष दिनों पर अधिक फलदायी।
क्या महिलाएं यह स्तोत्र पढ़ सकती हैं?
हां, सभी स्तोत्र स्त्री-पुरुष समान रूप से पढ़ सकते हैं।
पाठ से पहले क्या करें?
स्नान, शुद्ध वस्त्र, दीप प्रज्वलन, गणेश वंदना, फिर स्तोत्र।
क्या ऑडियो सुन सकते हैं पाठ के बजाय?
स्वयं पाठ करना श्रेष्ठ है। सुनना भी लाभकारी, पर अभ्यास पाठ का करें।

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