देवशयनी एकादशी
आषाढ़ शुक्ल एकादशी – विष्णु एकादशी व्रत
देवशयनी एकादशी व्रत कथा – तिथि, कथा, विधि और लाभ सहित। आषाढ़ शुक्ल एकादशी की एकादशी।
देवशयनी एकादशी का परिचय
तिथि: आषाढ़ शुक्ल एकादशी
देवता: भगवान विष्णु
विष्णु जी 4 महीने के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं।
एकादशी हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र व्रत मानी गई है। एक वर्ष में 24 एकादशियाँ आती हैं (कुछ वर्षों में 26) – प्रत्येक का अपना माहात्म्य है। विष्णु पुराण, पद्म पुराण में इन व्रतों की कथाएं विस्तार से हैं।
व्रत कथा
इस दिन से चातुर्मास आरंभ। कोई शुभ कार्य, विवाह वर्जित। विस्तृत कथा पुराणों में वर्णित है। इस कथा का पाठ या श्रवण व्रत के दिन अनिवार्य है।
व्रत की विधि
- दशमी की रात्रि: सात्त्विक भोजन।
- एकादशी प्रातः: स्नान, संकल्प।
- विष्णु पूजन: तुलसी, पीले पुष्प, पंचामृत से।
- व्रत: फलाहार या निर्जला।
- जागरण: रात्रि में विष्णु भजन।
- कथा श्रवण: व्रत कथा सुनना।
- द्वादशी पारण: ब्राह्मण भोज के बाद पारण।
व्रत के लाभ
- सभी पापों का नाश।
- मोक्ष की प्राप्ति।
- पितृ दोष निवारण।
- विष्णु कृपा से मनोकामना पूर्ति।
- आरोग्य और दीर्घायु।
- पारिवारिक सुख।