लिंगाष्टकम
भगवान शिव – स्तोत्र पाठ विधि
लिंगाष्टकम – पाठ, अर्थ, विधि और लाभ सहित। भगवान शिव का शक्तिशाली स्तोत्र।
इस लेख में
लिंगाष्टकम का परिचय
लिंगाष्टकम शिव जी के लिंग स्वरूप की आठ श्लोकों की स्तुति है। यह आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है।
आरंभिक श्लोक
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिंगं
निर्मलभासितशोभितलिंगम्।
जन्मजदुःखविनाशकलिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्॥
निर्मलभासितशोभितलिंगम्।
जन्मजदुःखविनाशकलिंगं
तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्॥
पूरा लिंगाष्टकम पाठ आमतौर पर पंडित या मंदिर में उपलब्ध पुस्तक से किया जाता है।
रचना की पृष्ठभूमि
लिंगाष्टकम शिव जी के लिंग स्वरूप की आठ श्लोकों की स्तुति है। यह आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है।
पाठ की विधि
- सोमवार और शिवरात्रि।
- शिवलिंग के सामने।
- 5-7 मिनट।
पाठ के लाभ
- शिव कृपा।
- पाप नाश।
- मोक्ष।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लिंगाष्टकम कब पढ़ें?
ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल सर्वोत्तम। विशेष अवसरों (त्यौहार, जयंती) पर विशेष।
लिंगाष्टकम कितनी देर में होता है?
आमतौर पर 15-30 मिनट। सुंदरकांड जैसे लंबे पाठ में 1-2 घंटे।
क्या लिंगाष्टकम रोज पढ़ सकते हैं?
हां, दैनिक पाठ उत्तम है। कुछ स्तोत्र विशेष दिनों पर अधिक फलदायी।
क्या महिलाएं यह स्तोत्र पढ़ सकती हैं?
हां, सभी स्तोत्र स्त्री-पुरुष समान रूप से पढ़ सकते हैं।
पाठ से पहले क्या करें?
स्नान, शुद्ध वस्त्र, दीप प्रज्वलन, गणेश वंदना, फिर स्तोत्र।
क्या ऑडियो सुन सकते हैं पाठ के बजाय?
स्वयं पाठ करना श्रेष्ठ है। सुनना भी लाभकारी, पर अभ्यास पाठ का करें।