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Bhrashtachar Par Nibandh | Essay on Corruption in Hindi – भ्रष्टाचार क्या है? भ्रष्टाचार पर निबंध इन हिंदी।

भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर निबंध। जानिये क्या है इसका अर्थ, क्या है इसके कारण, क्या है इसके प्रकार और क्या है इसका समाधान।
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लेख़ इसके बाद शुरु होगा।

Bhrashtachar in Hindi: भ्रष्टाचार हमारे समाज में फैला हुआ कैंसर है जो अंदर ही अंदर देश को खाए जा रहा है। भ्रष्टाचार हज़ारों कोशिशों के बावजूद भी ख़त्म नहीं हुआ क्योंकि देश के पढ़े-लिखे लोग भ्रष्टाचार में शामिल है, जो अपने पद का लाभ उठा कर रिश्वतखोरी करते है और जिससे भ्रष्टाचार का मूल्य पूरे समाज को चुकाना पड़ता है।

अगर आप भ्रष्टाचार पर संपूर्ण जानकारी चाहते है, तो हमारे इस लेख भ्रष्टाचार पर निबंध को पूरा पढ़ें। हमने भ्रष्टाचार पर छोटे तथा बड़े निबंध आसान शब्दों में लिखे है और प्रयास किया है, की आपको Meaning of Corruption, Causes and effect of Corruption, और साथ ही Types of Corruption in Hindi भी बता सकें।

तो चलिए सबसे पहले जान लेते है भ्रष्टाचार क्या है (Bhrashtachar Kya hai), भ्रष्टाचार से आप क्या समझते हैं और Bhrashtachar Par Nibandh…

भ्रष्टाचार क्या है? (Bhrashtachar Kya Hai)

भ्रष्टाचार शब्द से हम सभी परिचित है लेकिन बहुत कम लोग ही भ्रष्टाचार के वास्तविक अर्थ को समझ पाते है। भ्रष्टाचार शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है – भ्रष्ट + आचरण। भ्रष्ट का अर्थ है – दूषित, बुरा, या गंदा और आचार का अर्थ-आचरण या व्यवहार से है।

मनुष्य के द्वारा उसके मानवीय मूल्यों को ताक पर रख कर असामाजिक आचरण अपनाना भ्रष्टाचार कहलाता है।

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भ्रष्टाचार का कारण (Causes of Corruption)

  • शिक्षा का अभाव होने के कारण ग़रीब जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होती और ग़रीबों के लिए चलाए जाने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। सरकारी योजनाओं का पूरा पैसा अधिकारी हज़म कर जाते है।
  • लोग भ्रष्टाचार करने को अपनी गरीबी मिटाने का आसान माध्यम बना लेते है,और सिर्फ अपना भला सोच कर पूरे देश को गरीबी की आग में झोंक देते है।
  • हमारा समाज क्षेत्र के नाम पर, भाषा और जाति के नाम पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटा है। नेता हम पर डिवाइड एंड रूल की राजनीति खेलते है और भ्रष्टाचार की आग लगा कर अपनी रोटियाँ सेंकते है।
  • भ्रष्टाचार करने वाला व्यक्ति सबसे पहले अपने नैतिक मूल्यों की चिता जलाता है।
  • गरीबी, भुखमरी और महँगाई, बेरोज़गारी, जनसंख्या वृद्धि तथा व्यक्तिगत स्वार्थ की वजह से भ्रष्टाचार तेजी से पूरे विश्व में फैल गया है।
  • लचीली कानून व्यवस्था के कारण करोड़ो का घोटाला करने वाले व्यक्ति रिश्वत दे कर बच जाते है।
  • लोगों की विचारधारा बदल गयी है। कुछ लोग बिना परिश्रम किये धन कमाना चाहते है। वे भ्रष्टाचार के माध्यम से विलासिता पूर्ण जीवन जीना चाहते है।
  • देश का बड़े से लेकर छोटा उद्योगपति भी अपना टैक्स बचाने के लिए बड़े अफसरों को रिश्वत देता है। जिससे देश का विकास नहीं हो पा रहा। इससे अमीर तथा ग़रीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। अमीर और अमीर तथा ग़रीब और ग़रीब होता जा रहा है।
  • पैसे को सब कुछ समझने के कारण लोग पैसे कमाने के गलत रास्तों को भी ठीक ही समझते है।
  • उच्च अधिकारियों से लेकर मामूली चपरासी तक भ्रष्टाचार की, रिश्वतखोरी की एक श्रंखला सी बन गयी है हर कोई अपना कमीशन पहले ही तय कर लेता है।
  • राष्ट्र-भक्ति और मानवीय संवेदनाओं का अभाव है।

भ्रष्टाचार के प्रकार (Types of Corruption in Hindi)

देश में सार्वजनिक क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र भ्रष्टाचार ने चारों ओर अपने पैर जमाए है। श्रमिक संघों में, शिक्षा प्रणाली में, उद्योग जगत में तथा धर्म के नाम पर चारों ओर भ्रष्टाचार व्याप्त है। साधारण शब्दों में हम रिश्वत लेने को भ्रष्टाचार मानते है, लेकिन इसके अन्य कई रूप है। जैसे:

  • हफ्ता वसूली।
  • ब्लैकमेल करना।
  • चुनाव में धांधली।
  • भाई-भतीजावाद।
  • भ्रष्ट विधान बनाना।
  • कालाबाज़ारी करना।
  • न्यायधीशों द्वारा गलत या पक्षपात पूर्ण निर्णय सुनाना।
  • अपने विरोधियों को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग।
  • व्यापारियों की मिलीभगत।
  • वंशवाद।
  • परीक्षा में नक़ल।
  • परीक्षार्थी का गलत मूल्यांकन।
  • चार्टर एकाउंटेंट द्वारा बिज़नेस के गलत आर्थिक कार्यों को ढँकना।
  • टैक्स चोरी करना।
  • झूठी गवाही तथा झूठा मुकदमा करना।
  • पैसे और शराब के बदले वोट देना।
  • पैसे दे कर पुरस्कार और उपाधियाँ ख़रीदना।

भ्रष्टाचार के प्रभाव (Effect of Corruption)

  • दुनिया में भारत तेजी से विकसित हो रही एक अर्थव्यवस्था है, साथ ही साथ दुनिया भर में भ्रष्टाचार के कारण भारत का नाम बदनाम भी है। जिसका प्रभाव हमारे देश पर बहुत बुरा पड़ता है। भ्रष्टाचार से विकास के लगभग सभी पथ अवरोधित है।
  • भ्रष्टाचार से जमा किए गए काले धन का सीधा प्रभाव महँगाई पर पड़ता है। देश का मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा महँगाई की मार झेलता है।
  • सरकार द्वारा नेट बैंकिंग की सुविधाओं को बढ़ाने तथा प्रचार करने के बावजूद भी जन-साधारण अधिकतर कैश का ही प्रयोग करते हैं। इसमें कई बार विक्रेताओं को निर्धारित मानकों से अधिक मूल्य में वस्तुएँ बेचने की आज़ादी मिल जाती है। यह कृत्रिम महँगाई को बढ़ावा देता है।
  • भारत के ज्यादातर बड़े उद्योगपति सरकार की नज़रों से अपना धन छुपाते हैं ताकि उन्हें उस पर टैक्स ना देना पड़े। इससे सरकार की आय कम होती है और सरकार जनता पर वस्तु और सेवा कर बढ़ा देती है।
  • भ्रष्टाचार के कारण देश से पूँजी का रिसाव हो जाता है और भारी मात्रा में जाली नोटों का प्रचलन बढ़ने लगता है। यह स्थिति अदृश्य रूप से वस्तुओं की कीमत बढाती और मुद्रा के मूल्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम करती है।
  • प्रचार सुविधाओं के चलते बड़ी राजनैतिक पार्टियाँ करोड़ों खर्च कर पूरी मीडिया ख़रीद लेती है। खबरों की दलाली आज के समय में देश और दुनिया को दिवास्वप्न दिखाकर वास्तविक भयानक परिस्थितियों से दूर करने का माध्यम है।
  • कॉलेज में प्रवेश से लेकर परीक्षाओं में नकल, फ़र्ज़ी डिग्री प्राप्त करने तक भ्रष्टाचार का धंधा खूब फल-फूल रहा है। शिक्षक जिसे सर्वाधिक सम्मानित स्थान मिलता है, आज भ्रष्टाचारी हो गए हैं। ये अपनी कोचिंग में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए विद्यालयों में छात्रों पर ध्यान नहीं देते।

भ्रष्टाचार पर भाषण (Bhrashtachar Par Bhashan)

नमस्कार दोस्तों,

आज हम एक बड़े ही संवेदनशील मुद्दे पर बात करने जा रहे है, और वह मुद्दा है भ्रष्टाचार।

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भारत में भ्रष्टाचार आज़ादी के बाद से ही शुरू हो गया था। इतना तो विदेशी अंग्रेजों ने भी भारत को नहीं लूटा, जितना हमारे भ्रष्ट नेताओं ने लूटा है।

हम भ्रष्टाचार फैलने का दोष सिर्फ बेईमान नेताओं के मत्थे नहीं मढ़ सकते, ये हमारी अज्ञानता है की हम छेत्रवाद, जातिवाद और समुदायवाद की चाशनी में अयोग्य भ्रष्ट नेताओं को चुन कर अपना प्रतिनिधि बनाते है।

देश में शिक्षा आज विकास का मार्ग नहीं बल्कि निजीकरण के हाशिए पर चढ़ी एक दलित प्रेरणा से अधिक कुछ भी नहीं है। ये हमारी भ्रष्ट शिक्षा प्रणाली ही है जिसके कारण भारत विश्व गुरु के बजाय मिडिल क्लास क्लर्क का देश बन गया, देश में स्कूल, कॉलेज कुकुरमुत्ते की भांति फैले हुए हैं, जो बिना मानक पूरे किए भ्रष्टाचार के दम पर खुल जाते हैं।

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि मीडिया राजनीतिक भ्रष्टाचार का चेहरा बन चुकी हैं। जनता का प्रतिनिधित्व करने वाली मीडिया कठपुतली की भांति इन भ्रष्ट राजनीतिक पार्टियों के इशारों पर नाचती हैं।

भ्रष्टाचार के कारण अमीर तथा ग़रीब का अंतर बढ़ने लगता है। वैश्विक प्रगति की इच्छा रखने के कारण शासन भी बड़े-बड़े उद्योगों को अपेक्षाकृत अधिक प्रोत्साहन देती है, जबकि छोटे स्तर पर कार्य करने वाले निम्न स्तरीय उद्योगपति दिवालिया हो जाते हैं।

दुनिया के सभी देशों में भ्रष्टाचार फैला हुआ है, किसी में ज़्यादा तो किसी में अपेक्षाकृत कम। विश्व में न्यूयार्क ऐसा देश है जहाँ भ्रष्टाचार सबसे कम है और वेनेजुएला में सबसे ज़्यादा, जिस देश में भ्रष्टाचार जितना अधिक होता है, उसकी अर्थव्यवस्था उतनी ही चौपट होती है।

समाज में यह धारणा व्याप्त है कि जो व्यक्ति अदालत के चक्कर में पड़ा वह बर्बाद हो गया। अक्सर ही न्यायाधीशों पर आरोप लगते हैं कि वह पैसे लेकर किसी एक पक्ष में फैसला सुनाते है। लोग रिश्वत लेकर झूठी गवाही देते हैं और वकील झूठा मुकदमा दायर कर विपक्ष को परेशान करते हैं। यह सब तो न्याय विभाग में भ्रष्टाचार का सामान्य रूप है।

दोस्तों अब समय आ गया है की हम भ्रष्टाचार मिटाने को अपने जीवन का लक्ष्य बनाए। भ्रष्टाचार मिटाना कोई एक आदमी के बस की बात नहीं यह सामूहिक जागरूकता और प्रयास से ही संभव है, भ्रष्टाचार मिटाने के लिए हमे विचारों को सिर्फ जानना ही काफी नहीं बल्कि उन विचारों को अपनी आदत भी बनाना होगा, ताकि ईमानदारी एक गुण नहीं बल्कि व्यवहार बन सके।

भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए नियुक्तियों में पारदर्शिता का होना ज़रूरी है जिससे योग्य उम्मीदवार सही पदों पर आसीन हों और समाज में बदलाव आ सके।

टेक्नोलॉजी का भरपूर प्रयोग करना होगा, ताकि दंड के भय से ही सही लोग अपने काम में ईमानदारी तो दिखाए।

भ्रष्टाचारी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करना होगा, लोग यदि अपने परिवारों में, अपने समाज में ऐसे लोगों को सम्मान देना बंद करेंगे तो निश्चित ही एक बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा।

तो दोस्तों आइये आज हम शपथ लेते है कि ना हम भ्रष्टाचार करेंगे और ना ही दुसरो को करने देंगे।

जय हिन्द, जय भारत।

अगर आप भ्रष्टाचार पर गुणवत्तापूर्ण निबंध ढूंढ रहे है तो हमारे लेख को अंत तक पढ़े। हमने भ्रष्टाचार पर आसान शब्दों में छोटे तथा बड़े निबंध लिखे है। जिनका प्रयोग आप अपने अनुसार 150 या 200 शब्दों में भी कर सकते है।

भ्रष्टाचार पर निबंध इन हिंदी (Bhrashtachar Essay in Hindi)

अपनी स्वार्थ सीधी के लिए अनैतिक तथा अनुचित आचरण अपनाना भ्रष्टाचार कहलाता है। भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत पुरानी है, जिसने अंदर ही अंदर देश को खोखला कर दिया।

एक समय था जब भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। हमारा देश धन-धान्य से संपन्न राष्ट्र था। उस समय के लोग अपने हित के ऊपर राष्ट्र हित रखते थे, लेकिन आज सभी स्वार्थ में लिप्त है।

जीवन मूल्यों से समझौता कर हमने चोरी, रिश्वतखोरी, धोखा, धाँधली, पक्षपात, कालाबाज़ारी तथा वंशवाद को अपने व्यवहार का हिस्सा बना लिया। यह सब किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार ही है।

भ्रष्टाचार एक वैश्विक महामारी की तरह दुनिया के सभी देशों में फैला हुआ है। आज छोटे से छोटा काम करने के लिए हमे अधिकारियों की जेब गरम करनी पड़ती है। लोग टैक्स चोरी करने के लिए बड़े से बड़ा चार्टर्ड एकाउंटेंट हॉयर करते है। कॉलेज अपने नाम के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर परीक्षाओं में नक़ल कराते है।

सभी देश में भ्रष्टाचार बढ़ने के कारण है की कोई भी व्यक्ति अपना कार्य ईमानदारी से नहीं करता क्योंकि ईमानदार रहना काँटों का ताज पहनने के सामान है।

व्यक्ति का जीवन आवश्यकताओं से पूर्ण है। आवश्यकता पूरी न होने पर व्यक्ति तनाव सहता है और उसके कदम भ्रष्टाचार रूपी दल-दल की और बढ़ जाते है। वह अपनी तत्कालीन ज़रूरतों को तो रिश्वत ले कर या घूस दे कर पूरी कर लेता है, लेकिन कब ये भ्रष्टाचार का दल-दल उसे अपने में धीरे-धीरे समा लेता है, इसका उसे एहसास भी नहीं होता।

जो व्यक्ति भ्रष्टाचार के दल-दल में एक बार फँस जाता है, उसका पूरा जीवन भ्रष्टाचार में लिप्त बीतता है।

भ्रष्टाचार के कारण ही हमारे देश के प्रतिभावान व्यक्ति आजीवन गुमनामी के अँधेरे में खोये रहते है।

भाई-भतीजावाद के कारण कुशल होनहार और Deserving लोगों को वह पद नहीं मिल पाता जिसके वे हक़दार है। अगर हमारे देश में भ्रष्टाचार न हो तो होशियार लोगों को अच्छी नौकरियाँ मिलेगी, जिससे वह सामाजिक बदलाव ला सके।

हमारी सरकार देश में भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए अनेक प्रयास कर चुकी है। लेकिन शासन के स्तर से कोई कार्य तब तक पूरा नहीं होता जब तक ज़मीनी स्तर पर कार्यवाही न की जाए।

लोग अपने जीवन में ईमानदारी के गुण को अपना कर निष्पक्ष फैसले और चुनाव करे तो हम भ्रष्टाचार रूपी दानव को आसानी से हरा सकते है।

अगर आप भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर निबंध ढूंढ रहे है, तो हमारे लेख को अंत तक ज़रूर पढ़ें।

करप्शन इन इंडिया निबंध (Corruption in India Essay)

भारत में भ्रष्टाचार इतना व्यापक रूप ले चुका है, कि कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं। भ्रष्ट लोगों को आज होशियार माना जाता है, जबकि ईमानदार व्यक्ति का जीना मुश्किल है।

भ्रष्टाचार के कारण हमारी सरकार आज घोटालों की सरकार बन गयी है। देश के हित के लिए चुने गए नेता आज भ्रष्टाचार का पर्याय बन गए है।

भ्रष्टाचार एक दीमक की भाँति हमारे देश को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। आज भारत में कोई भी काम बिना रिश्वत दिये नहीं होता।

भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। रिश्वत लेना, टैक्स चोरी करना, झूठा मुकदमा, परीक्षाओं में नक़ल तथा विद्यार्थी को पैसे लेकर गलत मूल्यांकन करना, न्यायधीशों द्वारा पक्षपात पूर्ण निर्णय सुनना, उच्च पदों के लिए भाई-भतीजावाद, पैसा ले कर गलत प्रचार करना, झूठ को सच बता कर परोसना, सस्ती वस्तुओं को निर्धारित मूल्य से ज़्यादा मूल्य में बेचना, मुनाफाखोरी करना यह सब भ्रष्टाचार ही है।

हमारे देश के निवासी भ्रष्टाचार के इतने आदि हो गए है, की उन्हें अपना अनाचार गलत नहीं लगता। वे खुद भी ऊपर की आय लेने को सुख तथा समृद्धि का माध्यम मानने लगे है।

भ्रष्टाचार के कारण हमारे देश का आर्थिक विकास बहुत ज़्यादा प्रभावित हुआ है। अमीर ज़्यादा अमीर और ग़रीब ज़्यादा ग़रीब बनते जा रहे है।

सरकार के द्वारा जितनी भी योजनाएँ ग़रीबों के हित के लिए शुरू की जाती है, भ्रष्ट आला अधिकारी उन योजनाओं में धांधली कर अपना बैंक बैलेंस बनाते है। जिन ग़रीबों के पास अधिकारियों को घूस देने के पैसे नहीं होते, वह सरकारी सुविधाओं से वंचित हो जाते है।

भ्रष्टाचार का यह रोग न केवल सरकारी संस्थानों में ,बल्कि गैर सरकारी संस्थानों में भी फैलता जा रहा है। प्राइवेट स्कूल में अभिभावकों से मोटी रकम डोनेशन के नाम पर वसूली जाती है।

अमीर माँ-बाप के बच्चे शहर के बड़े शिक्षा संस्थानों में पैसे के दम पर प्रवेश पा जाते है, जबकि ग़रीब-माँ बाप के बच्चे होनहार हो कर भी शिक्षा से भ्रष्टाचार के कारण वंचित रह जाते है।

भ्रष्टाचार के कारण भारत की छवि दुनिया में ख़राब हो चुकी है और विश्व में भारत 2 पायदान फिसल कर 80 नंबर पर आ गया है, भ्रष्टाचार के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के साथ बड़े-बड़े व्यापारी व्यापार नहीं करना चाहते।

अगर हमे अपने देश में बढ़ती विपन्नता की मूल जड़ को ख़त्म करना है तो हमे शुरुआत अपने घर से करनी होगी क्योंकि परिवार राष्ट्र की प्रथम इकाई है।

लोगों को अधिकाधिक भ्रष्टाचार के दुष्परिणामों से परिचित करने हेतु जागरूक करना होगा। राष्ट्रहित, ईमानदारी तथा निष्पक्षता को अपने आचरण में दोबारा स्थान देना होगा।

जब हमारा राष्ट्र भ्रष्टाचार मुक्त बनेगा , तभी देश तरक्की करेगा।

भ्रष्टाचार क्या है निबंध। (Bhrashtachar Par Nibandh in Hindi)

भ्रष्टाचार का अर्थ ऐसा गलत या निकृष्ट आचरण है, जिसके कारण व्यक्ति अपने मानवीय नैतिक मूल्यों की अवहेलना करता है।

यह हमारी भूल है की ज़्यादातर भ्रष्टाचार कमज़ोर राजनैतिक परिस्थितियों वाले देशों में होता है, जबकि वास्तविकता यह है, एक सत्तात्मक देश की तुलना में लोकताँत्रिक देशों में गहराई से निहित भ्रष्टाचार का बोलबाला अधिक है।

भ्रष्टाचार के कारण लोकतान्त्रिक भावना के आधार स्तंभ; समता, स्वतंत्रता तथा बंधुत्व एक मज़ाक बन कर रह गया है।

फ़ोर्ब्स ने 18 महीने तक भ्रष्टाचार पर चले सर्वे में पाया की हमारा भारत एशिया महाद्वीप के शीर्ष 5 भ्रष्ट देशों में प्रथम स्थान पर है। भारत में रिश्वतखोरी की दर 68% है। फ़ोर्ब्स ने यह सर्वे मार्च 2017 में प्रकाशित किया था।

ऐसा व्यक्ति जो न्याय, नीति, सत्य, धर्म तथा सामाजिक व मानवीय मूल्यों के खिलाफ कार्य करता है, भ्रष्टाचारी कहलाता है। इसका प्रमुख कारण हमारे नैतिक मूल्यों का पतन है।

भारत में शिक्षा विभाग भी भ्रष्टाचार में लिप्त है। यह शासकीय तथा निजी दोनों ही स्तरों पर फैला हुआ है। छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया से ले कर परीक्षा मूल्यांकन, उपाधि वितरण, सरकार द्वारा चलाई जा रही मिड-डे-मील योजना, साक्षरता अभियान के अंतर्गत आने वाला फंड, यूनिफार्म वितरण, परीक्षाओं का आयोजन, विद्यालय भवन निर्माण, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, नौकरी पाने से ले कर प्रोमोशन और ट्रांसफर तक सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार की एक श्रंखला सी चल रही है। अधिकारी से ले कर कर्मचारी और यहाँ तक कि चपरासी भी बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं करते।

खेलों में भी खिलाड़ियों के चयन से लेकर अलग-अलग तरह के डोप टेस्ट की गलत रिपोर्ट बनवाने तथा पुरस्कार की राशि वितरित होने तक हर जगह भ्रष्टाचार है। महिला खिलाड़ियों को चयन का लालच दे कर उनका शोषण करना, सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर चुके खिलाड़ियों को उनकी पुरस्कार राशि से घूस देने पर मजबूर करना, आज सिस्टम का हिस्सा बन गया है।

कहने को सरकारी योजनाएँ जनता की भलाई के लिए बनाई जाती है लेकिन शासन से जनता तक पहुँचते-पहुँचते सरकारी फंड कब अधिकारियों की जेब में समा जाता है, पता ही नहीं चलता।

भ्रष्टाचार के कारण कई योग्य तथा होनहार लोग अवसर न प्राप्त कर पाने की वजह से आत्महत्या कर लेते है।

देश में घोटाले जनता की करोड़ो की संपत्ति हज़म कर चुके है। भ्रष्टाचार हमारे देश में किसी भी अन्य वैश्विक समस्या से ज़्यादा खतरनाक है अगर हम आने वाले कल में देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते है तो आज से प्रयास शुरू करने होंगे, तभी हमारा देश महान कहलाएगा।

हम किस प्रकार एक आम नागरिक होते हुए भी भ्रष्टाचार से लड़ाई लड़ सकते है यानि How to Fight Against Corruption? और भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बना सकते है, जानने के लिए भ्रष्टाचार मुक्त भारत पर निबंध को ज़रूर पढ़ें।

भ्रष्टाचार की समस्या पर निबंध (Corruption Solution in India Essay)

दुनिया के लगभग सभी देश भ्रष्टाचार की समस्या का सामना कर रहे है। भारत भी ऐसा ही एक देश है जो स्वजनित भ्रष्टाचार की समस्या से परेशान है।

एक समय था जब भारत को उच्च आदर्शों और नैतिक मूल्यों की संस्कृति का देश कहा जाता था। हमारी परम्पराएं, मान्यताएं और संस्कार विश्व में ख्याति प्राप्त कर चुके थे, लेकिन आज हम केवल अपने स्वर्णिम अतीत की गाथा सुनते रहते है।

आज भ्रष्टाचार के कारण पूरा देश संघर्ष कर रहा है। भ्रष्टाचार अपने आप में कई समस्याओं का कारण है। यह भारत के विकास को रोकती वह अदृश्य ज़ंजीर है, जिसे भारतवासी अपनी विलासप्रियता के कारण खुद जकड़े हुए है।

आज़ादी के 73 साल बाद भी हमारा देश विकसित देशों में एक नहीं है। हम खुद को विकसित घोषित नहीं कर पाए क्योंकि शासन का आधार भ्रष्ट है।

यदि हमे भारत को विकसित देशों की सूची में लाना है तो भ्रष्टाचार को ख़त्म करना होगा। इसके लिए शासन के स्तर से काम करना समस्या हल करने का सिर्फ एक पहलू है। ज़मीनी स्तर पर लोगों का व्यवहार परिवर्तित करना इसका मुख्य कार्य होना चाहिए।

जब व्यक्तिगत प्रयास और शासन स्तर से कार्यवाही दोनों ही पूर्ण लगन और निष्ठा से किए जाए तब हम अपने देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कर पाएँगे।

देश की राजनीति भ्रष्टाचार का मुख्य केंद्र बन गयी है। आज जब जनता का नेतृत्व करने वाले नेता ही भ्रष्टाचारी है तो समाज से भ्रष्टाचार कैसे ख़त्म होगा। सरकार को इस दिशा में कठोर कदम उठाने की ज़रूरत है।

ऐसे नेता जिनका रिकॉर्ड आपराधिक गतिविधियों में संलग्न है, उन्हें अभ्यार्थी पद पर नामांकन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सभी नेताओं के लिए एक निश्चित स्तर तक शिक्षित होना अनिवार्य कर देना चाहिए।

देश में भ्रष्टाचार के अपराधियों को कड़ा दंड देना चाहिए जिस से सभी के सामने एक उदाहरण बने की देश को लूटने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

देश में हुए बड़े-बड़े घोटालों की कार्यवाही को प्राथमिकता दे कर दोषी अधिकारियों तथा नेताओं को निलंबित करना चाहिए।

सभी महत्त्वपूर्ण कार्यों और योजनाओं का रिकॉर्ड रखना चाहिए और उस रिकॉर्ड की जांच समय-समय पर की जानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं में हुई धांधली सब के सामने आ सके।

रिश्वतखोर व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा देना और काले धन के ठिकानों का पता लगाना चाहिए। इस गतिविधि में दोषी सभी व्यक्तियों को कठोर दंड देना चाहिए।

शिक्षा का अधिकाधिक विस्तार करना चाहिए क्योंकि शिक्षा के द्वारा ही हमारी आने वाली युवा पीढ़ी नैतिक मूल्यों को किताबी विषयों से ऊपर रख कर अपने आचरण में अपनाऐंगे और संस्कारों में परिलक्षित करेंगे।

भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के कई उपाय है पर परिवर्तन तब आएगा जब हम भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए दृढ़ निश्चय शक्ति के साथ कार्य करेंगे ।

तब हमारा भारत भ्रष्टाचार मुक्त हो पाएगा।

भ्रष्टाचार पर शायरी (Corruption Par Shayari)

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दोस्तों, संसार में ऐसा कोई कार्य नहीं जो किया न जा सके भ्रष्टाचार हमारे देश की प्रमुख समस्या है, जो हमारे जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करती है अगर हम सब मिल कर इस समस्या को रोकने का प्रयास करे तो भ्रष्टाचार उन्मूलन निश्चित है।

दोस्तों, उम्मीद है आपको हमारा लेख पसनद आया होगा और इससे आपको रोचक जानकारी प्राप्त हुई होगी। हमारे लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। आप इसे अपने मित्रों से ज़रूर शेयर कीजिएगा।

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