100+ Short Stories In Hindi – बच्चों के लिए हिंदी नैतिक कहानियां

आज इस आर्टिकल Short Stories In Hindi के माध्यम से जानें 100 से अधिक मनोरंजन से भरी रोचक और प्रेरक हिंदी कहानियाँ.

Editorial Team

Short-Story-in-Hindi

बचपन में आपने भी अपने दादा-दादी और नाना-नानी से कहानियाँ तो जरुर सुनी होंगी, कुछ ऐसी ही मनोरंजक और प्रेरणादायक Short Story In Hindi आज मैं इस आर्टिकल में आपके लिए लेकर आई हूँ, जिन्हें पढ़ने के बाद आपके बच्चों का सिर्फ मनोरंजन ही नहीं होगा बल्कि हर एक कहानी से उन्हें एक अच्छी सीख (Moral Story) भी मिलेगी।

कहानियाँ कई प्रकार की होती है, जिन्हें सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि हर उम्र का व्यक्ति Short Hindi Story सुनना या पढ़ना पसंद करता है। ऐसी ही कुछ 100 से ज्यादा हिंदी कहानी (Hindi Short Story) मैनें आज इस पोस्ट में आपके साथ शेयर की हैं।

इन Short Stories in Hindi को आप भी पढ़िए और अपने बच्चों को भी सुनाइए। मुझे पूरी उम्मीद है, कि ये मज़ेदार कहानियाँ (Short Story In Hindi With Moral) आपके बच्चों को जरूर पसंद आएंगी और वे इसे एक बार नहीं बल्कि बार-बार सुनने या पढ़ने के लिए उत्साहित होंगे। तो आईये अब आप भी मेरे साथ इन मजेदार Very Short Story in Hindi अथवा Short Story for Kids in Hindi का आनंद लेते हैं।

Table of Contents

Short Story In Hindi [2023]

अक्सर हमारे घर में छोटे बच्चे हमसे कहानियाँ सुनाने की जिद करते हैं और फिर हम सोच में पड़ जाते हैं, कि अब ऐसी कौन सी Hindi Moral Story सुनाई जाए जो छोटी भी हों और और बच्चों को पसंद भी आए।

इसलिए आज मैंनें इस लेख में आपके साथ कुछ ऐसी ही बेहतरीन और शिक्षाप्रद कहानियाँ (Short Hindi Story) शेयर की हैं, जो आपके बच्चों को सुनने में पसंद भी आयेंगी साथ ही इन कहानियों से मिली सीख उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने में भी मदद करेंगी। तो अब आप बिना देर किए नीचे दी गई Hindi Short Stories एक-एक करके जरुर पढ़ें और अपने बच्चों को भी सुनाएं।

1. घमंडी बारहसिंगा : (Moral Stories In Hindi)

एक समय की बात है। एक घने जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। वह बड़ा घमंडी था। एक बार वह तालाब में पानी पी रहा था और पानी पीते हुए उसने अपनी परछाई देखी। वो अपने सुन्दर सींगो को देखकर बहुत खुश हुआ, पर अपनी पतली टाँगो को देखकर बहुत दुखी हुआ और वो भगवान को कोसने लगा।

घमंडी बारसिंघा

एक बार कुछ शिकारी कुत्ते जंगल में आ गए और वो बारहसिंगा के पीछे पड़ गए। ये देखकर वो घबराकर दूर भाग गया। उसकी पतली टाँगे ही उसकी भागने में सहायता कर रही थी। भागते-भागते अचानक उसके सींग टहनियों के बीच फँस गए।

उसने अपने सींगों को बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, पर वह अपने सींगों को बाहर ना निकाल पाया। जिसके बाद उन शिकारी कुत्तों ने उसे घायल कर दिया और वो मरने की हालत में हो गया था। मरते समय वह सोचता रहा, “इन सुंदर सींगों ने मुझे मरवाया है और मेरी पतली टाँगे मुझे बचा सकती थी।”

शिक्षा – कोई भी चीज़ अपने गुणों के कारण सुंदर होती है।

2. शेर और चूहा : (Short Kahani in Hindi)

एक समय की बात है, सर्दी का दिन था और एक शेर धूप में सो रहा था। तभी वहाँ एक चूहा आया और सोए हुए शेर के शरीर पर कूदने लगा। जिससे तंग आकर शेर जाग उठा और उसने अपने भारी पंजो से चूहे को पकड़ लिया। शेर ने गुस्से में कहा, “मुर्ख चूहे मुझे तंग क्यों किया, अब तुझे इसकी सज़ा जरूर मिलेगी।

शेर और चूहा

इसके बाद चूहा बहुत डर गया और शेर से माफ़ी मांगते हुए कहने लगा कि, मुझे जाने दो अगर आपको मेरी मदद की कभी भी जरूरत होगी तो मै आपकी मदद जरूर करूँगा। ये सुनने के बाद शेर हँसने लगा और सोचने लगा कि ये छोटा सा चूहा मेरी क्या मदद करेगा। चूहे को विनती करते देख शेर ने उसे माफ़ किया और जाने दिया।

कुछ ही दिनों बाद वो शेर जंगल में शिकारी द्वारा बिछाए गए एक जाल में फंस जाता है। शेर उस जाल से निकलने की बहुत कोशिश करता है पर वो निकल नहीं पाता। जिसके बाद वो दहाड़ना शुरू कर देता है। ये आवाज़ उस चूहे तक पहुंच जाती है और वो शेर को बचाने के लिए वहाँ पहुँच जाता है।

चूहा अपने दांतो से जाल को काटने की कोशिश करता है और अंत में वो शेर को बाहर निकालने में सफल हो जाता है। शेर चूहे के इस काम से बड़ा खुश होता है। वो चूहे से कहता है कि दोस्त मैं तुम्हारा ये अहसान कभी नहीं भूलूंगा और साथ ही कहता है आज से तुम मेरे सच्चे मित्र हो।

शिक्षा – कभी भी किसी को अपने से छोटा या कमज़ोर नहीं समझना चाहिए।

3. लालची कुत्ता : (Short Story For Kids In Hindi)

एक बार की बात है एक कुत्ते को बहुत तेज भूख लगी थी। वह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था और अचानक उसे एक रोटी दिखी। कुत्ता रोटी को देखकर बहुत उत्साहित हो गया। वो रोटी की तरफ गया और उसे अपने मुंह में दबाकर नदी के किनारे ले गया।

लालची कुत्ता

नदी पार करते हुए कुत्ते को पानी में अपनी परछाई दिखी और उसे लगा कि, ये किसी और कुत्ते की परछाई है जो उसकी रोटी छीनना चाहता है। उसने सोचा कि वह भोंककर दूसरे कुत्ते को डरा देगा और जैसे ही उसने भोंकना शुरू किया उसकी रोटी उसके मुंह से निकलकर नदी में बह गई जिसके बाद वो भूखा ही रह गया।

शिक्षा – हमें हमेशा समझदारी से काम लेना चाहिए।

क्या आपने इसे पढ़ा: Tulsidas Ke Dohe – तुलसीदास जी के लोकप्रिय दोहे, हिंदी में।

4. सारस और लोमड़ी : (Short Story With Moral In Hindi)

एक जंगल में एक लोमड़ी और सारस रहते थे। दोनों में गहरी मित्रता थी। एक दिन लोमड़ी ने सारस को देखा और वह कहने लगी, “सारस भाई, राम-राम, कैसे हो? सारस बोला लोमड़ी बहन मैं तो अच्छा हूँ तुम अपनी बताओ?

लोमड़ी और सारस

लोमड़ी को शरारत सूझी और वह कहने लगी सारस भाई मैं तुम्हे अपने घर दावत पर बुलाना चाहती हूँ, कल तुम मेरे घर भोजन करने आना। दूसरे दिन सारस लोमड़ी के घर भोजन करने पहुँचा। दोनों ने एक दूसरे को राम-राम बोला और फिर मीठी-मीठी बातें करने लगे। कुछ देर बाद लोमड़ी दो परातो में बहुत पतली खिचड़ी बनाकर ले आई और वह सारस से बोली सारस भाई आओ खाना खाएँ।

लोमड़ी तो जल्दी-जल्दी खिचड़ी खाने लगी, लेकिन सारस की लम्बी चोंच में खिचड़ी ना आई। उसे खिचड़ी ना खाते देख लोमड़ी मन ही मन बहुत खुश हुई और झूठी चिंता दिखाते हुए सारस से पूछने लगी कि क्या बात है तुम्हे पसंद नहीं आया? सारस लोमड़ी की चालाकी समझ गया और थोड़ी देर बात करने के बाद उसने लोमड़ी को बोला कि, कल तुम मेरे घर खाने पर जरूर आना लोमड़ी ने कहा हाँ मैं जरूर आऊंगी।

सारस ने मछलियाँ पकाकर दो तंग मुँह की सुराहियों में डाल दी। जब लोमड़ी आई, तो दोनों ने एक दूसरे को राम-राम करी और बातें करने लगे। कुछ देर बाद सारस सुराही उठा लाया। वह लोमड़ी को कहने लगा, बहन आओ मिलकर मछलियाँ खाएँ।

इतना बोलकर उसने अपनी चोंच सुराही में डाल दी। वह मज़े से मछलियाँ खाने लगा। लोमड़ी का इतना बड़ा मुँह सुराही के छोटे से मुँह में जा ही नहीं पा रहा था। वह सारस का मुँह देखती रह गई। अब सारस समझ गई कि लोमड़ी ने अपना बदला ले लिया है।

शिक्षा – जैसे को तैसा

5. प्यासा कौआ : (Story For Kids In Hindi)

एक बार की बात है, गर्मी का महीना था। एक कौए को बहुत तेज़ प्यास लगी थी। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ने लगा, पर उसे कही भी पानी ना मिला। तेज़ गर्मी के कारण उसकी प्यास ओर बढ़ती जा रही थी। कौए ने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन उसने हार नहीं मानी, वह पानी की तलाश करने फिर चला गया, अचानक उसे एक पानी से भरा घड़ा दिखाई दिया। वह उस घड़े को देखकर बहुत खुश हो गया और तुरंत उड़कर घड़े के पास गया।

प्यासा कौआ

घड़े में पानी इतना कम था कि, उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच सकी। यह देखकर वो परेशान हो गया। उसने हर तरीके से पानी पीने की कोशिश करी पर वो सफल ना हो पाया। वह निराश होकर जैसे ही वहाँ से जाने लगा तो उसकी नज़र अचानक कंकर पर पड़ी।

वह एक-एक कंकर अपनी चोंच से उठाकर पानी में डालने लगा। धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया और कौए ने जी भर कर पानी पिया और वहाँ से उड़ गया।

शिक्षा – जब हमारे अंदर किसी चीज़ को पाने की इच्छा होती है तो हम वो चीज़ अवश्य हासिल कर पाते है।

प्यासा कौआ से जुड़ी एक प्रसिद्ध कविता

एक कौआ प्यासा था
जग में पानी थोड़ा था,
कौए ने डाला कंकर,
पानी आया ऊपर,
कौए ने पीया पानी,
खत्म हुई कहानी।।

6. सोने का अंडा देने वाले हंस की कहानी : (Short Stories In Hindi For Kids)

एक गाँव में एक हंस पालन करने वाला अपनी पत्नि के साथ रहता था। वह हर रोज बाजार में जाकर हंस खरीदता और घर आकर उनकी देखभाल करता था। हर दिन की तरह वो बाजार से एक हंस खरीद कर लाया। वो सबकी तरह उसे भी बहुत प्यार से पालने लगा और धीरे-धीरे वो हंस तंदुरुस्त बन गया। कुछ महीने बाद उस हंस ने अंडा दिया, जिसको देखने के बाद व्यापारी और उसकी पत्नी दोनों ही हैरान रह गए। वह अंडा सोने का था।

सोने का अंडा देने वाला हंस

वह हंस हमेशा सोने का अंडा देता और पति-पत्नी उसे बेचकर पैसे कमाते। सोने के अंडे को देखकर उनके मन में लालच बढ़ने लगा और व्यापारी ने सोचा कि, अगर ये हर रोज एक सोने का अंडा देता है तो उसके अंदर और कितने अंडे होंगे। ये सोचकर उन्हें एक तरकीब आई और उन्होंने हंस को मार डाला और जब उसका पेट चीर कर देखा तो उस में एक भी अंडा नहीं था जिसके बाद वो बहुत रोए।

शिक्षा – लालच बुरी बला है।

7. चींटी और कबूतर : (Hindi Short Stories)

गर्मी के समय की बात है। एक चींटी को बहुत प्यास लगी थी। वो पानी की तलाश करते हुए एक नदी के किनारे पहुंच गई। नदी से पानी पीने के लिए वो एक छोटी चट्टान पर चढ़ गई। जैसे ही वो पानी पीने लगी, वो चट्टान से फिसल कर नदी में जा गिरी। पानी का बहाव बहुत तेज था और वो नदी में बहने लगी। वहीं नदी के पास बहुत बड़ा पेड़ था, जिस पर एक कबूतर बैठा हुआ था।

चींटी और कबूतर

अचानक उस कबूतर की नज़र चींटी पर पड़ी उसने उसकी मदद के लिए पेड़ से एक पत्ता तोड़ कर नदी में फेंका और चींटी उस पर चढ़ गई। कुछ देर बाद पत्ता बहकर सूखी जमीन पर पहुँच गया और चींटी बाहर आ गई। चींटी ने कबूतर का धन्यवाद किया।

शाम को एक शिकारी कबूतर का शिकार करने आया। कबूतर इस बात से अनजान था और आराम से सो रहा था। चींटी ने जैसे ही शिकारी को देखा तो उसने उसके पांव में जाकर काट दिया। इससे उस शिकारी की चीख निकल गई और वो चिलाने लगा। उसकी चीख से कबूतर जाग गया और उड़ गया। कबूतर ने चींटी की जान बचाकर जो नेक काम किया था। आज उसी ने उसकी जान बचाई है।

शिक्षा – कर भला तो हो भला।

8. झूठा दोस्त (Short Moral Story In Hindi)

एक बार कि बात हैं, हिरण और कौआ बहुत अच्छे दोस्त थे। वे दोनों हर दुख-सुख में एक दूसरे का साथ दिया करते थे। एक दिन कौए ने हिरण को सियार के साथ देख लिया। कौए ने हिरण को समझाया कि सियार बहुत चालाक जानवर है, वो हर किसी को अपने जाल में फंसा लेता है इसलिए उसका साथ छोड़ दे। हिरण ने कौए की सलाह पर ध्यान नहीं दिया और सियार के साथ खेत में चला गया। हिरण वहाँ लगे जाल में फंस गया।

झूठा दोस्त

सियार उससे कहने लगा “मैं तो किसान को बुलाने जा रहा हूं, वह आएगा और तुम्हें मार डालेगा”। हिरन चिल्लाने लगा, तभी वहां कौआ आया और उसने हिरन से कहा तुम ऐसे लेट जाओ जैसे की तुम मर गए हो। हिरन ने आपने दोस्त की बात मानी और वैसे ही करा।

थोड़ी देर बाद वहाँ किसान आया और उसने देखा कि हिरन तो मर गया, ये देखकर वो बहुत खुश हुआ। किसान ने जल्दी से जाल खोला और जाल खुलते ही हिरन वहाँ से भाग निकला। ये देखकर किसान बहुत गुस्सा हुआ और सियार को खूब मारा और उसे वहाँ से भगा दिया।

शिक्षा – किसी पर कभी भी आसानी से भरोसा नहीं करना चाहिए।

9. लोमड़ी और अंगूर (Bacchon Ki Kahani)

एक बार जंगल में भूखी लोमड़ी खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी। काफी देर घूमने के बाद भी उसे खाना नहीं मिला। थोड़ी देर तक घूमने के बाद उसे एक पेड़ दिखाई दिया। उस पेड़ पर रसीले अंगूर के गुच्छे लटक रहे थे। यह देखकर लोमड़ी के मुँह में पानी आने लगा। लोमड़ी ने मन में सोचा कि “ये अंगूर तो बहुत सवादिष्ट लग रहे है और मैं ये जरूर खाऊंगी”। अंगूर बहुत ऊपर लगे हुए थे। लोमड़ी ने छलांग लगाकर अंगूर तोड़ने की कोशिश करी, पर वह असफल रही।

लोमड़ी और अंगूर

बहुत देर तक कोशिश करने के बाद वो सोचने लगी कि, अब कोशिश करना बेकार है। वह अपने आप से कहने लगी अब उसे ये अंगूर नहीं चाहिए, यह तो खट्टे है। लोमड़ी का व्यवहार ये बताता है कि जब हम किसी चीज को पाने में असफल हो जाते है तो उसमें कमियां निकालने लगते है। थोड़ी देर बाद लोमड़ी चुपचाप जंगल के दूसरी ओर निकल पड़ी।

शिक्षा – अपनी कमियों को नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए।

इसे भी पढ़े: रहीम के दोहे अर्थ सहित – 30+Sant Rahimdas Ke Dohe

10. माँ का प्यार : (Moral Story In Hindi Short)

एक शानदार महल में एक खूबसूरत परी रहती थी, जिसे अपनी खूबसूरती पर बड़ा घमंड था। एक दिन उस परी ने घोषणा करी कि, “जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा, उसे मैं इनाम दूँगी”। ये सुनकर सभी खुश हो गए और अपने-अपने बच्चों के साथ पुरस्कार को जीतने की चाह में एक स्थान पर जमा हो गए। परी सारे बच्चों को ध्यान से देखने लगी।

माँ का प्यार

वहाँ पर एक बंदरिया का बच्चा आया हुआ था। जब उसने बंदरिया के चपटी नाक वाले बच्चे को देखा, तो वो उसे देखकर बोलने लगी छिः! कितना कुरूप है यह बच्चा। इसके माता-पिता को तो मै कभी पुरस्कार नहीं दे सकती। परी की यह बात सुनकर उस बच्चे की माँ को बहुत बुरा लगा। वो अपने बच्चे को हृदय से लगाकर कहने लगी “मेरा लाल तू तो बहुत ही सुंदर है, मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ मेरे लिए तो तू ही सबसे बड़ा पुरस्कार है”। मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना नहीं चाहती। भगवान तुझे लंबी उम्र दे।

शिक्षा – माँ जैसा इस दुनिया में कोई दूसरा नहीं।

11. हरे घोड़े की कहानी – अबकर बीरबल (Kids Story in Hindi)

एक दिन अकबर अपने प्रिय बीरबल के साथ शाही बाग़ की सैर के लिए गए। चारों ओर हरियाली को देखकर अकबर को बहुत आनंद आया। कुछ देर बाद सैर करते करते राजा कहने लगा कि, मेरा तो इस हरी भरी हरियाली को देखकर मन कर रहा है कि हम हरे घोड़े पर बैठकर इस हरे बगीचे में घूमे। उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल मुझे हरे रंग का घोड़ा चाहिए”। उसने बीरबल को आदेश देते हुए कहा कि ‘मैं तुम्हें आदेश देता हूं कि, तुम सात दिनों के अंदर हमारे लिए एक हरे घोड़े का इंतजाम करो’।

हरा घोडा अकबर बीरबल

अकबर और बीरबल दोनों को पता था कि, हरे रंग का घोड़ा होता ही नहीं। पर अकबर को तो बीरबल की परीक्षा लेनी थी। राजा चाहते थे कि, बीरबल किसी तरह अपनी हार को स्वीकार करें। मगर, बीरबल भी बहुत चालाक थे। वो जानता था कि, राजा उनसे क्या चाहते हैं। इसलिए वो भी घोड़ा ढूंढने का बहाना बनाकर सात दिनों तक इधर-उधर घूमते रहे।

जैसे ही आठवां दिन आया वो अकबर के सामने हाज़िर हो गए और कहने लगे आपका काम हो गया है मैंने आपकी आज्ञा के अनुसार हरे रंग के घोड़े का इंतज़ाम कर दिया है। ये सुनने के बाद अकबर को आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा जल्दी बताओ कहा है हरे रंग का घोड़ा। बीरबल ने कहा घोड़ा तो आपको मिल जायेगा पर घोड़े के मालिक की 2 शर्ते है – पहली शर्त तो ये है कि घोड़े को लेने के लिए आपको खुद जाना होगा।

ये सुनकर अकबर बड़ा खुश हुआ और कहने लगा कि, ये तो बड़ी आसान शर्त है। फिर बीरबल ने दूसरी शर्त बताई की घोड़ा ले जाने के लिए हफ्ते के सातों दिन के आलावा कोई और दिन देखना होगा। बीरबल ने हँसते हुए कहा घोड़ा लाने के लिए शर्ते तो माननी ही पड़ेगी।

अकबर समझ गया कि बीरबल को मुर्ख बनाना कोई आसान काम नहीं है।

12. संगति का असर : (Short Moral Stories in Hindi For Class 2)

राम और श्याम दो भाई थे, दोनों एक ही कक्षा में पढ़ा करते थे। राम पढ़ने में बहुत हुशियार था। पर उसका भाई पढ़ने से दूर भागता था। राम के जो दोस्त थे वो पढ़ने में अवल थे और वही दूसरी तरफ श्याम के दोस्तो को पढ़ने में बिलकुल दिलचस्पी नहीं थी, वो पढ़ाई से दूर भागते थे। ये सब देखने के बाद राम अपने भाई श्याम को उसके दोस्तों से दूर रहने के लिए बोलता था, लेकिन श्याम अपने भाई की बात नहीं सुनता और उसे कहता की आप अपने काम से मतलब रखो।

एक दिन श्याम अपने भाई के साथ स्कूल जा रहा था। उसका भाई राम कक्षा में चला गया अचानक श्याम के दोस्त आए और उसे कहने लगे कि आज हमारे दोस्त हरि का जन्मदिन है, इसलिए आज स्कूल ना जाओ। पहले तो श्याम ने मना किया, किंतु दोस्तों के बार-बार बोलने पर वह उनके साथ चला गया। धीरे-धीरे श्याम को आदत हो गई और वो हर रोज ऐसा करने लगा।

कुछ दिन बाद परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, जिसमे श्याम और उसके दोस्त फेल हो गए। वही उसके भाई ने प्रथम स्थान हासिल किया। श्याम अपने घर मार्कशीट लेकर गया उसके माता-पिता ने जब उसके अंक देखे वो बहुत उदास हुए कि हमारा एक बेटा पढ़ने में इतना अच्छा है और दूसरा इतना नालायक।

श्याम को महसूस हुआ कि मैंने अपने माता-पिता का दिल दुखाया है जिसके बाद उसने उन्हें भोरसा दिलाया कि मैं अगली परीक्षा में आपको सफल होकर दिखाउँगा। श्याम ने अपने उन सब दोस्तों को छोड़ दिया जिन्होंने उसकी सफलता में उसका मार्ग रोका था और वो अपनी पढ़ाई में ध्यान देने लगा।

नतीजा यह हुआ कि साल भर की मेहनत से वह परीक्षा में सफल ही नहीं बल्कि उसने विद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। उसके माता-पिता को बहुत खुशी हुई है और उन्होंने श्याम को गले से लगाया और शाबाशी दी।

शिक्षा – जैसी संगति वैसा ही परिणाम

13. बुद्धिमान साधू (Small Story in Hindi)

एक बड़ा सा राजमहल था, जिसके द्वार पर एक साधु आया और वो साधु द्वारपाल से आकर कहने लगा कि अंदर जाकर राजा से कहो कि उनका भाई उनसे मिलने आया है। द्वारपाल सोचने लग गया कि ये साधु के भेस में राजा से कौन मिलने आया है जो राजा को अपना भाई बता रहा है। फिर द्वारपाल ने समझा कि क्या पता कोई दूर का रिश्तेदार हो जिसने सन्यास ले लिया हो। द्वारपाल ने अंदर जाकर सूचना दी जिसके बाद राजा मुस्कुराने लगे और उन्होंने कहा कि साधु को अंदर भेज दो।

बुद्धिमान साधु

साधु ने पूछा, “ कैसे हो भैया..

राजा ने जवाब दिया, “ मैं ठीक हूँ, तुम बताओ, तुम कैसे हो?

साधु ने राजा को कहा कि, “ मैं जिस महल में रहता हूँ वो बहुत ही ज्यादा पुराना हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। यहाँ तक की मेरे 32 नौकर थे वो भी एक-एक करके चले गए। ये सब सुनकर राजा ने साधु को 10 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया। पर साधु ने कहा 10 सोने के सिक्के तो कम है। ये सुनकर राजा ने कहा कि अभी तो इतना ही है तुम इससे काम चलाओ इसके बाद साधु वहाँ से चला गया।

साधु को देखकर मंत्रियो के मन में भी कई सवाल उठ रहे थे, उन्होंने राजा से कहा कि जितना हमे पता है आपका तो कोई भाई नहीं है तो अपने उस साधु को इतना बड़ा इनाम क्यों दिया? राजा ने जवाब देते हुए कहा, “देखो भाग्य के दो पहलू होते है- राजा और रंक, इस नाते उसने मुझे भाई बोला।

राजा ने समझते हुए कहा कि जर्जर महल से उसका मतलब उसका बूढ़ा शरीर था, 32 नौकर से उसका मतलब 32 दाँत थे। समंदर के बहाने उसने मुझे उलाझना दिया कि राजमहल में उसके पैर रखते ही मेरा राजकोष सुख गया, क्योंकि मैं मात्र उसे दस सोने के सिक्के दे रहा था जबकि मेरी हैसियत उसे सोने से तोल देने की है। इसलिए राजा ने ऐलान किया कि मैं उसे अपना सलाहकार नियुक्त करुँगा।

शिक्षा – किसी व्यक्ति के बाहरी रंग रूप से उसकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

एक नज़र इस पर भी: Samay Ka Mahatva – समय का महत्व पर निबंध 100 शब्द।

14. शेर की चाल : (Inspirational Short Moral Stories in Hindi)

एक घना जंगल था वहाँ चार बैल रहते थे। चारों बैल में काफी गहरी मित्रता थी। शेर की एक इच्छा थी वो चाहता था कि इन में से अगर कोई बैल मुझे अकेला मिल जाये तो मैं उसे मार कर खा जाऊँ। पर शेर की ये इच्छा कभी पूरी नहीं हुई। चारो बैल हमेशा झुंड बनाकर रखते थे और हमेशा एक दूसरे की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।

शेर की चाल

शेर उनके बड़े सींगो से काफी डरता था, और उनसे दूर भागता था। एक दिन शेर ने सोचा कि ये चारो कभी भी एक दूसरे से अलग नहीं होते, मुझे कुछ ऐसा सोचना होगा जिससे मैं उन्हें एक दूसरे से अलग कर पाऊँ। इसलिए वह कोई ऐसी योजना सोचने लगा जिससे उनकी मित्रता तोड़ी जाए। एक दिन वह एक बैल के पास गया और उससे बोला, “तुम्हारे मित्र कहते है कि तुम बहुत बड़े मूर्ख हो।

यह सुनकर बैल को बहुत बुरा लगा और उसने दूसरे बैलों से बोलना छोड़ दिया। इसी तरह शेर ने सारे बैलों के बीच में एक दूसरे के लिए नफरत भर दी। इसके बाद शेर ने एक दिन एक बैल पर हमला कर दिया, ये देखकर तीनो बैल उसकी सहायता करने के लिए आगे आ गए। पहली बैल ने धन्यवाद करते हुए कहा कि हम मूर्ख नहीं है , जो शेर की चाल में आ जाते।

शिक्षा – एकता में ही बल है।

15. गरीब लकड़हारा : (Motivational Short Moral Stories in Hindi)

एक बार की बात है, एक गरीब लकड़हारा अपने सात बच्चों के साथ रहता था। वह इतना गरीब था कि अपने बच्चों को ठीक से खाना भी नहीं दे पाता था। इसी को देखते हुए उसने अपने बच्चों को जंगल में छोड़ने का फैसला किया।

गरीब लकड़हारा

लकड़हारा के छोटे बच्चे ने उसकी ये बात सुन ली। उसने बहुत सारे सफ़ेद पत्थर अपनी जेब में भर लिए। अगले दिन जब वे जंगल में जा रहे थे तो वह रास्ते में पत्थर गिराता रहा। उनके पिता जंगल में बच्चों को छोड़कर वापिस चले गए। छोटा बच्चा उन पथरो की मदद से अपने भाई-बहनों को घर ले आया। अगली बार वह बच्चा पत्थर नहीं बटोर पाया इसलिए उसने रास्ते में रोटी के टुकड़े फांके जिन्हे चिड़िया और जानवर खा गए। बच्चे इस बार घर का रास्ता नहीं ढूंढ पाए और वे रोने लगे।

वही घर में जब बच्चों के पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो वह जंगल में अपने बच्चों को ढूंढ़ने निकल गए। अपने पिता को सामने देखकर बच्चे भाग कर उनके पास गए। पिता ने उनसे वादा किया कि आगे से वह ऐसा कभी नहीं करेंगे। बच्चे ख़ुशी-ख़ुशी अपने पिता के साथ घर की ओर चल पड़े।

16. दो मेढकों की कहानी (Short Animal Stories in Hindi)

एक बार मेंढकों का एक दल पानी की तलाश में जंगल में घूम रहा था। अचानक, समूह में दो मेंढक गलती से एक गहरे गड्ढे में गिर गए। दल के दूसरे मेंढक गड्ढे में अपने दोस्तों के लिए चिंतित थे। गड्ढा कितना गहरा था, यह देखकर उन्होंने दो मेंढकों से कहा कि गहरे गड्ढे से बचने का कोई रास्ता नहीं है और कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है।

वे लगातार उन्हें हतोत्साहित करते रहे क्योंकि दो मेंढक गड्ढे से बाहर कूदने की कोशिश कर रहे थे। वो दोनों जितनी भी कोशिश करते लेकिन काफ़ी सफल नहीं हो पाते।जल्द ही, दो मेंढकों में से एक ने दूसरे मेंढकों पर विश्वास करना शुरू कर दिया – कि वे कभी भी गड्ढे से नहीं बच पाएंगे और अंततः हार मान लेने के बाद उसकी मृत्यु हो गई।

दूसरा मेंढक अपनी कोशिश जारी रखता है और आखिर में इतनी ऊंची छलांग लगाता है कि वह गड्ढे से बच निकलता है। अन्य मेंढक इस पर चौंक गए और आश्चर्य किया कि उसने यह कैसे किया।अंतर यह था कि दूसरा मेंढक बहरा था और समूह का हतोत्साह नहीं सुन सकता था। उसने ये सोचा कि वे उसके इस कोशिश पर खुश कर रहे हैं और उसे कूदने के लिए उत्साहित कर रहे हैं !

शिक्षा – दूसरों की राय आपको तभी प्रभावित करेगी जब आप उसपर विश्वास करेंगे, बेहतर इसी में है की आप खुद पर ज़्यादा विश्वास करें, सफलता आपके कदम चूमेगी।

17. कौवे की गिनती (Tenalirama Short Moral Stories In Hindi)

एक दिन की बात है, राजा कृष्णदेवराय ने अपने दरबार में एक अजीब सा सवाल पूछा, जिससे पूरी सभा के लोग हैरान रह गए। जैसे ही वे सभी उत्तर जानने की कोशिश कर रहे थे, तभी तेनालीराम दरबार के अंदर आए और पूछा कि मामला क्या है। 

उन्होंने मन ही मन सवाल दोहराया। सवाल था की, “शहर में कितने कौवे हैं?

तेनालीराम तुरंत मुस्कुराए और महाराज के पास गए और उन्होंने उत्तर की घोषणा की; उनका जवाब था की, नगर में इक्कीस हजार पांच सौ तेईस कौवे हैं। महाराज द्वारा यह पूछे जाने पर कि वह उत्तर कैसे जानते हैं, तब तेनालीराम ने उत्तर दिया, “महाराज आप अपने आदमियों से कौवे की संख्या गिनने के लिए कहें।

यदि अधिक मिले, तो कौवे के रिश्तेदार उनके पास आस-पास के शहरों से आ रहे होंगे। यदि कम हैं, तो हमारे शहर के कौवे शहर से बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदारों के पास जरूर गए होंगे।” 

यह जवाब सुनकर, राजा को काफ़ी संतोष मिला। इस उत्तर से प्रसन्न होकर महाराज कृष्णदेव राय ने तेनालीराम को एक माणिक और मोती की जंजीर भेंट की। वहीं उन्होंने तेनालीराम की बुद्धि की काफ़ी प्रसंशा की।

शिक्षा – आपके उत्तर में सही स्पष्टीकरण होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि सही उत्तर का होना

18. गाने वाले गधे की कहानी : (Short Moral Stories in Hindi For Class 7 With Pictures)

बहुत दिन पहले की बात है, पास के जंगल में एक भूखा गधा उदास रो रहा था। दिन भर के काम के बाद, उसके मालिक ने उसे ठीक से नहीं खिलाया था, इस कारण से वो उदास रो रहा था। 

पास से ही, एक गीदड़ वहाँ से गुजर रहा था और उसने भूखे गधे को देखा। “क्या हुआ, गधा?” उसने पूछा। “मुझे बहुत ज़ोरों से भूख लग रही है और मैंने यहाँ सब चर चुका हूँ, फिर भी मैं अभी भी भूखा हूँ!” गधा रोया। 

गधे की दुःख भरी बात सुनकर सियार ने कहा, “ओह, तुम जानते हो कि पास में एक बड़ा वनस्पति बगीचे है। तुम वहाँ जा सकते हो और भर पेट खाना खा सकते हो!” 

“कृपया मुझे वहाँ ले चलो!” गधे ने कहा। ऐसा सुनकर गीदड़ ने गधे को उस बगीचे तक ले चला। एक बार सब्जी के बगीचे में वो लोग पहुँच गए, फिर वे चुपचाप ताजी सब्जियां चबाते हैं। तभी उनके पास में किसी के आने की आवाज़ सुनायी पड़ी। आवाज़ सुनकर वो दोनों भाग जाते हैं। 

अब से दोनों ही जानवर हर दिन सब्जी के बगीचे में जाते थे और भर पेट खाना खाते थे। लेकिन एक दिन उनकी क़िस्मत ख़राब थी, उन्हें एक किसान ने देख लिया और उन्हें भगा दिया। 

उस दिन दोनों जानवर भूखे थे। जैसे ही रात हुई, गीदड़ ने सुझाव दिया कि वे वापस सब्जी के बगीचे में चले जाएँ, ताकि उन्हें फिर से भर पेट खाने को मिले। 

रात होने पर, गधा और गीदड़ चुपचाप बगीचे में घुस गए और फिर भर पेट खाने लगे। खाते वक्त, गधे के मन में कुछ सूझा और उसने कहाँ, “ओह, इतने स्वादिष्ट खीरे और चाँद को देखो! यह इतना सुंदर है कि मैं एक गाना गाना चाहता हूं”। 

गाने वाला गधा

ऐसा सुनते ही गीदड़ ने कहा, “अभी नहीं! तुम यहाँ से नहीं गा सकते!” “लेकिन, मैं चाहता हूँ,” गधे ने गुस्से में कहा। गीदड़ ने उसे समझाने की कोशिश करी और कहाँ की, “किसान उसकी बात सुनेगा, उनके पकड़े जाने का डर भी है। जब गधे ने उसकी बात नहीं मानी तब वो वहाँ से चला गया। 

गधे ने आह भरी और गाना शुरू कर दिया। थोड़ी ही दूर पर किसान और उसके परिवार ने एक गधे के रेंकने की आवाज सुनी। वे लाठी लेकर गधे की ओर दौड़े।

गधे को पीटकर जल्द ही बगीचे से बाहर खदेड़ दिया गया। “ओउ-ओउ-ओउ!” गधे को रेंकते हुए वह वापस चला गया। वो वापस गीदड़ के पास आ गया, और उस घटना का वर्णन किया। 

उसकी बात सुनकर, गीदड़ ने कहा “तुम्हें तब तक इंतजार करना चाहिए था जब तक हम गाने के लिए बगीचे से बाहर नहीं आ गए! लेकिन तुमने मेरी बात बिलकुल भी नहीं सुनी। जिससे आगे चलकर तुम्हें मार भी खानी पड़ी। चलो, तुम्हें आराम करने की जरूरत है! 

आगे से ऐसी गलती कभी भी मत करना, ऐसा कहने के बाद गीदड़ वहाँ से चला गया।

शिक्षा – कोई भी चीज़ करने का एक उचित समय और स्थान होता है, आपको चीजों को करने के लिए हमेशा समय और स्थान का ध्यान रखना चाहिए।

19. लालची बंदर : (Short Animal Stories in Hindi)

एक बंदर रोज एक आदमी के घर आता था और दंगा करता था । कभी कपड़े फाड़ देता, कभी बर्तन ढोता, कभी बच्चों को पीटता। उसने खाने-पीने की चीजें भी ले लीं, लेकिन उसके परिवार को कोई शिकायत नहीं थी। लेकिन वे बंदरों से त्रस्त थे।

लालची बंदर

एक दिन घर के कर्ता ने कहा, “मैं इस बंदर को पकड़ कर निकाल दूंगा।” केवल घागरी का मुंह खुला रह गया था। सब चले गए। बंदर घर में आया। कुछ देर बाद वह कूद कर बाहर आया। जब उसने दबे हुए घड़े में छोले देखे तो वह वहीं बैठ गया।

चना निकालने के लिए उसने जार में हाथ डाला और एक मुट्ठी चना पकड़ लिया। लेकिन घड़े का मुंह छोटा होने के कारण हाथ का हत्था बाहर नहीं निकला। इसके लिए उसने जोर से धक्का दिया और कूदने लगा। लेकिन लालची बंदर ने हाथ के चने नहीं छोड़े।

फिर नौकर ने बंदर को रस्सी से बांधकर बाहर निकाला। लालची बंदर पकड़ा गया।

शिक्षा –लालच बुरी बला है।

20. सच्ची दोस्ती का महत्व : (Moral Story For Kids)

अरुण गर्मी की छुट्टी में अपनी नानी के घर जाता है। वहां अरुण को खूब मजा आता है, क्योंकि नानी के यहाँ आम का बगीचा है। वहां अरुण ढेर सारे आम खाता है और खेलता है। उसके पांच दोस्त भी हैं, पर उन्हें अरुण आम नहीं खिलाता है।

एक दिन की बात है, अरुण को खेलते खेलते चोट लग गई। अरुण के दोस्तों ने अरुण को उठाकर घर पहुंचाया और उसकी मम्मी से उसके चोट लगने की बात बताई, इस पर अरुण को मालिश किया गया।

मम्मी ने उन दोस्तों को धन्यवाद किया और उन्हें ढेर सारे आम खिलाएं। अरुण जब ठीक हुआ तो उसे दोस्त का महत्व समझ में आ गया था। अब वह उनके साथ खेलता और खूब आम खाता था।

शिक्षा –जीवन में सच्चे मित्र का महत्व बहुत है।

21. तीन मछलियों की कहानी : (Short Moral Stories in Hindi For Class 3 With Pictures)

यह पंचतंत्र की उन लघु नैतिक कहानियों में से एक है, जो बच्चों को जीवन का एक आवश्यक पाठ पढ़ाती है।

एक छोटी सी नदी में तीन मछलियाँ रहती थी। प्रत्येक मछली एक अलग रंग की थी – लाल, नीली और पीली। फिर भी ये तीनों मछलियाँ एक दूसरे के साथ मिलझूल कर रहती थी। 

एक दिन, नीली मछली किनारे के पास तैर रही थी और उसने मछुआरों की बातें सुनीं। “एक मछुआरा दूसरे से कह रहा था की, यह नदी में मछली पकड़ने का समय आ गया है। नदी की मछलियाँ यहाँ बहुत भोजन के लिए तैरती होंगी! चलो कल मछली पकड़ने चलते हैं!”

चिंतित नीली मछली अपने अन्य दो दोस्तों के लिए जितनी जल्दी हो सके तैर गई। उनके पास पहुँचकर उसने उन्हें कहा, “सुनो सुनो! मैंने अभी-अभी मछुआरों को बात करते हुए सुना है। वे कल इस नदी में मछली पकड़ने की योजना बना रहे हैं। हमें कल के लिए नदी की सुरक्षित रूप से तैरना चाहिए!” 

इस बात पर लाल मछली ने कहा, “ओह, यह सब ठीक है! वे मुझे पकड़ नहीं पाएंगे क्योंकि मैं उनके लिए बहुत जल्दी हूं।इसके अलावा, हमारे पास वह सब खाना है जो हमें यहाँ चाहिए!” 

लाल मछली की बात सुनकर, नीली मछली ने कहा, “लेकिन, हमें सिर्फ एक दिन के लिए यहाँ से कहीं सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए!” अब नीली मछली की बातें सुनकर, पीली मछली ने कहा, “मैं नीली मछली से सहमत हूं। माना की यह हमारा यह घर है, लेकिन हमें ज़रूर से सुरक्षित रहने की जरूरत है!” 

इन दोनों मछलियों ने, अपने दोस्तों को समझाने की कोशिश की लेकिन कोई उनकी बातों पर भरोशा नहीं किया। जैसे ही अगली सुबह हुई, मछुआरों ने अपना जाल डाला और जितनी हो सके उतनी मछलियाँ पकड़ लीं। इनमें से कुछ हरे थे, कुछ नारंगी थे, कुछ सफेद थे, कुछ बहुरंगी थे और उनमें से एक लाल मछली भी थी! 

इस बात पर मछुआरों ने आपस में बात की, “बेहतरीन पकड!” लंबे दिनों के बाद। दूर रे ये सभी चीजें दोनों दोस्त पीली मछली और नीली मछली देख रहे थे, उन्हें इस बात पर काफ़ी दुःख भी था की उनके दोस्त को “लाल मछली” को भी मछुआरों ने अपने जाल में पकड़ लिया था।

शिक्षा – जब कोई आपको किसी समस्या के बारे में चेतावनी देता है, तब ऐसे में उनकी बातों को समझदारी से सुनना और उसके ऊपर कार्य करना महत्वपूर्ण होता है। रोकथाम इलाज से बेहतर है!

22. मूर्ख चोर की कहानी : (Akbar Birbal Stories in Hindi With Pictures)

बहुत पहले की बात है। एक बार, एक अमीर व्यापारी बीरबल से मदद मांगने के लिए राजा अकबर के दरबार में आया। उस व्यापारी के कुछ सामान की चोरी हो गयी थी। अब उस व्यापारी को ये शक था कि उसके किसी नौकर ने उसे लूट लिया है। लेकिन चूँकि उसके बहुत से नौकर थे इसलिए वो असली चोर को पकड़ नहीं पा रहा था।

जब उसने अपनी इस परेशानी के बारे में राजा अकबर को बतायी, तब महाराज अकबर ने अपने सबसे चतुर मंत्री बीरबल को इस परेशानी का हल खोजने का दायित्व दिया। यह सुनकर बीरबल ने एक चतुर योजना के बारे में सोचा और व्यापारी के नौकरों को बुलाया।

महामंत्री बीरबर ने प्रत्येक सेवक को समान लम्बाई की एक छड़ी दी। और फिर उनसे सभी को कहा कि अगले दिन तक चोर की छड़ी दो इंच बढ़ जाएगी। ऐसा सिर्फ़ उसके साथ होगा जिसने व्यापारी का सामान चुराया है। 

अगले दिन बीरबल ने सभी नौकरों को सम्राट के दरबार में फिर से बुलाया। उसने देखा कि एक नौकर की छड़ी दूसरों की तुलना में दो इंच छोटी थी।

अब बीरबल को असली चोर के बारे में मालूम पड़ गया था। वह जानते थे कि चोर कौन है।

मूर्ख चोर ने अपनी छड़ी को दो इंच छोटा कर दिया था क्योंकि उसे लगा कि यह सच में दो इंच बढ़ जाएगी। इस प्रकार बीरबल सेन बहुत ही चतुरायी से असली चोर को पकड़ लिया।

शिक्षा –सच्चाई किसी से छुपाये नहीं छुपती।

23. गधा और धोबी : (Very Short Story in Hindi)

एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी कमजोर था. क्योंकि उसे बहुत कम खाने को मिलता था।

गधा और धोबी

एक दिन, धोबी को एक मरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, “में गधे के ऊपर इस बाघ की खाल डाल दूंगा और पड़ोसियों के खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया करूँगा। किसान समझेंगे कि सचमुच का बाघ है और उससे डर कर दूर रहेंगे और गधा आराम से खेत चर करेगा।”

धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना काम कर गई।

एक रात, गधा खेत में चर रहा था कि उसे किसी गधे की रेंकने की आवाज़ सुनाई दी। उस आवाज़ को सुनकर वह इतने जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा।

गधे की आवाज़ सुनकर किसानो को गधे की असलियत का पता लग गया और फिर गधे की खूब पिटाई की !

शिक्षा –सत्य और न्याय की हमेशा जीत होती है।

24. एकता में बल : (Good Short Moral Stories in Hindi)

एक व्यक्ति के पांच पुत्र थे, लेकिन पुत्रों के बीच पूर्ण सामंजस्य नहीं था वो एक दुसरे से झगड़ते रहते थे।

जब वह व्यक्ति मरने ही वाला था, तो उसने 5 लड़को को बुलाकर बैठा दिया, और पतली छड़ियों का एक पूरा गट्ठर दिया और उनमें से एक से कहा, “तुम इस गट्ठर को तोड़ दो, लेकिन पांचो पुत्रो से किसी ने पूरी गट्ठर नहीं तोड़ पाया,

तब उस बूढ़े व्यक्ति ने कहा अब गट्ठर को छोड़ दें, और हर एक पुत्र एक एक डंडे को तोड़ दो। पुत्रो ने ऐसा किया तो सारी डंडिया तुरंत टूट गईं।

पांचो पुत्र बहुत हैरान हुए और उन्होंने पिता से पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया। फिर उसने कहा, वे सब लाठियां एक साथ इकट्ठी थी, सो उन में इतना बल था कि सारा गट्ठर तुमसे से न टूटा। लेकिन जब एक एक लाठी अलग हो गई, तो उसे दूसरी छड़ियों के बल से सहारा नहीं मिला। तो यह तुरंत टूट गया।

इस तरह अगर आप सब एक हो जाएं तो आपको कोई अलग नहीं कर सकता और आपकी जवानी खुशियों में चली जाएगी। लेकिन अगर आपस में लड़ो और बिछड़ो तो तुम भी कमजोर हो जाओगे और डंडे की तरह टूट जाओगे, इसलिए अभी से साथ रहो।

शिक्षा –एकता में बल होता है

25. चतुर किसान : (Short Story in Hindi With Moral)

एक बार एक किसान एक बकरी, एक घास के गट्ठर और एक शेर लिए नदी के किनारे खड़ा था। उसे नाव से नदी पार करनी थी लेकिन नाव बहुत छोटी थी वह एक साथ इन सब को नदी पार नहीं करा सकता था। अगर वह शेर को पहले ले जाता तो बकरी घास खा जाती अगर वह घास के गट्ठर को ले जाता तो शेर बकरी को खा जाता।

image credit – YouTube

इस परेशानी से थक हर कर वह निराश हो कर जमीन पर बैठ गया।

बहुत सोचने के बाद अंतत: उसे इस परेशानी से निकलने का समाधान मिल गया उसने पहले बकरी को साथ में लिया और नदी के उस पर छोड़ आया। दूसरे चक्कर में वह शेर को नदी पर ले आया, लेकिन लौटते वक्त किसान वापस बकरी को नदी के इस पर ले आया।

इस बार वह बकरी को इस पार छोड़ कर उस पार घास के गट्ठर को शेर के पास छोड़ आया, इस बार किसान खली नव लेकर गया और उस पर खड़ी बकरी को भी इस पर ले आया

इस तरह किसान ने अपनी सूझभूझ से बिना किसी नुकसान हुए नदी पर कर ली।

शिक्षा –धैर्य और समझदारी से कठिन कार्य आसानी से किये जा सकते है।

26. सच्चा मित्र (Short Story in Hindi)

एक बार की बात है, दो दोस्तों को जंगल से होकर जाना था। यह कई जंगली जानवरों के साथ एक खतरनाक जंगल था। जंगल में शेर, भालू, सांप और यहां तक ​​कि जहरीली मकड़ियां भी थीं। जैसे ही दो दोस्त जंगल में दाखिल हुए, वे इस डर से जकड़े हुए थे कि आगे क्या होगा। मैं इतना भयभीत हूँ। काश हमें इस जंगल से न गुजरना पड़े। मैं आपसे सहमत हुँ। लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं है।

दूसरे गाँव में जाने के लिए हमें जंगल पार करना होगा। क्या होगा अगर हम मुसीबत में पड़ गए? आइए वादा करें कि अगर हम में से कोई एक मुसीबत में पड़ गया, तो दूसरा नहीं भागेगा। वह रहेगा और संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करेगा। हाँ, मैं तुमसे वादा करता हूँ, मेरे दोस्त, अगर तुम मुसीबत में हो तो मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा। और मैं तुमसे वही वादा करता हूँ, मेरे दोस्त।

मुझे अब कम डर लग रहा है। मुझे लगता है कि अब मैं आसानी से जंगल पार कर सकता हूं। मैं खुश हूं। चलो चलते हैं कुछ देर जंगल में घूमने के बाद दोनों दोस्तों ने अपने आगे की झाड़ियों से सरसराहट की आवाज सुनी। वे अपने ट्रैक में रुक गए। आप क्या सोचते हैं की यह क्या है? श… मुझे नहीं पता। मैं स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता, है ना?

तभी उनके सामने एक बड़ी, काली आकृति दिखाई दी। धत्तेरे की! यह एक जंगली भालू है! इसने हमें अभी तक नहीं देखा है, इसलिए भागो! तब लड़का एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया और उसकी एक डाल पर बैठ गया। लेकिन उसका दोस्त पेड़ पर चढ़ना नहीं जानता था। मेरा दोस्त! मुझे नहीं पता कि पेड़ पर कैसे चढ़ना है। कृपया मुझे इस पर चढ़ने में मदद करें! लेकिन पेड़ पर बैठे लड़के ने उसकी मदद नहीं की।

उसने सिर हिलाया और पेड़ को कसकर पकड़ लिया। जमीन पर पड़े लड़के ने भालू को अपने पास आते देखा और फौरन मौके पर लेट गया। उसने सुना था कि भालू मरी हुई चीजों पर हमला नहीं करते हैं, इसलिए उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, अपनी सांसें रोक लीं और बहुत शांत पड़ा रहा। भालू उसके करीब आ गया। यह उसके सिर के पास आया और सूंघा और उसके कान को सूंघ कर देखा कि क्या लड़का सांस ले रहा है, लेकिन लड़के ने अपनी सांस रोक रखी थी।

भालू ने लड़के को छोड़ दिया और यह सोचकर आगे बढ़ गया कि वह मर चुका है। भालू के जाने के बाद पेड़ से उतरा लड़का नीचे आया। क्या तुम ठीक हो? हाँ मैं। वह एक नजदीकी मामला था! सच है, यह था मुझे बताओ, मेरे दोस्त। मैंने देखा कि भालू तुम्हारे कान के पास आया और कुछ फुसफुसा रहा था। इसने आपको क्या कहा? इसने मुझे झूठे दोस्त से सावधान रहने और ऐसी संगत न रखने के लिए कहा।

शिक्षा –मित्र वही जो मुसीबत में काम आये।

27. नन्ही चिड़िया : (Story of Small Birds)

बहुत समय पहले की बात है। एक बहुत बड़ा घना जंगल हुआ करता था। एक बार की बात है जंगल में बहुत ही बड़ी भीषण आग लग गई। सभी जानवर आग देखकर डर गए और जान – बचाने हेतु इधर उधर भागने लगे।

आग लगने के कारण जंगल में बहुत ही ज्यादा भगदड़ मची हुई थी। हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहा था। इस जंगल में एक नन्हीं सी चिड़ियाँ भी रहती थी। चिड़ियाँ ने देखा सभी जानवर बहुत भयभीत हैं। इस आग लगे हुए जंगल में मुझे जानवरों की मदद करनी चाहिए।

यह सोचकर नन्हीं सी चिड़िया एक नदी के पास चली गई। नदी में जाने के बाद चिड़ियाँ अपनी छोटी सी चोंच नदी की जल भर कर आग बुझाने का प्रयास करने लगी। चिड़ियाँ को देखकर एक उल्लू यह सोच रहा था की ये चिड़िया कितनी मुर्ख है। इतनी भीषण आग इसके द्वारा लाये पानी कहाँ बुझेगी।

यह देखकर उल्लू चिड़िया के पास गया की तुम बेकार ही मेहनत कर रही हो तुम्हारे लाये पानी से यह आग कहाँ बुझेगी। इस पर चिड़ियाँ ने बड़ी ही विनम्रता से जवाब दिया की मुझे बस अपना प्रयास करते रहना है चाहे आग कितनी भी भयंकर हो।

यह सुनकर उल्लू बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुआ और चिड़ियाँ के साथ आग बुझाने में लग गया।

शिक्षा –मुसीबत कितनी भी बड़ी हो हमें अपना प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए।

28. बातूनी कछुए की कहानियाँ : (Short Story In Hindi)

एक बार की बात है की एक तालाब में एक कछुआ और दो हंसों का जोड़ा रहा करता था। हंस और कछुए में बहुत ही गहरी दोस्ती थी। कछुआ बहुत ही बातूनी था वह हंसों से बहुत बाते करता और शाम होते ही अपने घर चला जाता।

एक बार की बात है जहाँ तालाब था वहां बारिश के मौसम में बारिश नहीं हुई तालाब सूखने लगा। कछुए को चिंता होने लगी की गर्मी के मौसम आते-आते तालाब पूरी तरह से सुख जाएगा। इस पर कछुआ हंसों के पास गया और कहा की तुम आस-पास के क्षेत्र में जाओ और ऐसा तालाब का पता लगाओ की जहाँ पानी हो जहां हम जाके रह सके।

बातूनी कछुए

हंसों ने पास के एक गाँव में एक पानी से भरा तालाब खोज लिया। ये बात उन्होंने कछुए को जाकर बता दी। इसके बाद कछुए ने हंसों से कहा की तुम मुझे भी वहां ले चलो। हंसों ने कहा की ठीक है हम एक लकड़ी लाते हैं हम तुम्हें उस पर बिठा देंगे और तुम्हें ले चलेंगे। बस एक शर्त यह है की तुम पुरे रास्ते अपना मुंह बंद रखोगे। यदि तुम मुंह खोलोगे तो तुम गिर जाओगे। कछुए ने वादा किया ठीक है।

इसके बाद दोनों हंसों ने लकड़ी एक-एक कोने से अपनी चोंच में दबा ली और लकड़ी को बीच में से कछुए ने अपने मुंह में पकड़ ली। जब दोनों हंस कछुए को लेकर आसमान में उड़ रहे थे तो तभी रास्ते में एक गाँव आया। गाँव में खेल रहे सभी बच्चे यह देख चिल्लाने लगे की कछुआ आसमान में उड़ रहा है।

यह देख कछुआ नीचे देखने लगा। कछुए को यह सब देख रहा नहीं गया। कछुए ने हंसों से बात करने के लिए जैसे ही मुंह खोला लकड़ी टूट गई और कछुआ हंसों से छूटकर गांव में गिर गया।

ज्यादा ऊंचाई से गिरने के कारण कछुए को बहुत चोट लगी और थोड़ी देर बाद कछुआ तड़पकर मर गया।

शिक्षा –मुसीबत कितनी भी बड़ी हो हमें अपना प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए।

29. बुद्धिमान वानर की कहानी : (Short Stories in Hindi)

हज़ारों साल पहले किसी वन में एक बुद्धिमान बंदर रहता था। वह हज़ार बंदरों का राजा भी था।

एक दिन वह और उसके साथी वन में कूदते-फाँदते ऐसी जगह पर पहुँचे जिसके निकट क्षेत्र में कहीं भी पानी नहीं था। नयी जगह और नये परिवेश में प्यास से व्याकुल नन्हे वानरों के बच्चे और उनकी माताओं को तड़पते देख उसने अपने अनुचरों को तत्काल ही पानी के किसी स्रोत को ढूंढने की आज्ञा दी।

बुद्धिमान बंदर

कुछ ही समय के बाद उन लोगों ने एक जलाशय ढूंढ निकाला। प्यासे बंदरों की जलाशय में कूद कर अपनी प्यास बुझाने की आतुरता को देख कर वानरराज ने उन्हें रुकने की चेतावनी दी, क्योंकि वे उस नये स्थान से अनभिज्ञ था। अत: उसने अपने अनुचरों के साथ जलाशय और उसके तटों का सूक्ष्म निरीक्षण व परीक्षण किया। कुछ ही समय बाद उसने कुछ ऐसे पदचिह्मों को देखा जो जलाशय को उन्मुख तो थे मगर जलाशय से बाहर को नहीं लौटे थे। बुद्धिमान् वानर ने तत्काल ही यह निष्कर्ष निकाला कि उस जलाशय में निश्चय ही किसी खतरनाक दैत्य जैसे प्राणी का वास था। जलाशय में दैत्य-वास की सूचना पाकर सारे ही बंदर हताश हो गये। तब बुद्धिमान वानर ने उनकी हिम्मत बंधाते हुए यह कहा कि वे दैत्य के जलाशय से फिर भी अपनी प्यास बुझा सकते हैं क्योंकि जलाशय के चारों ओर बेंत के जंगल थे जिन्हें तोड़कर वे उनकी नली से सुड़क-सुड़क कर पानी पी सकते थे। सारे बंदरों ने ऐसा ही किया और अपनी प्यास बुझा ली।

जलाशय में रहता दैत्य उन्हें देखता रहा मगर क्योंकि उसकी शक्ति जलाशय तक ही सीमित थी, वह उन बंदरों का कुछ भी नहीं बिगाड़ सका । प्यास बुझा कर सारे बंदर फिर से अपने वन को लौट गये।

30. इंसान की कीमत : (Short Kahani In Hindi)

एक बार लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है?”

इंसान की कीमत

पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये।

फिर वे बोले-“बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, वो तो अनमोल है।”

बालक – क्या सभी उतने ही कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?

पिताजी – हाँ बेटे।

बालक के कुछ पल्ले पड़ा नहीं, उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है? किसी की कम इज्जत तो किसी की ज्यादा क्यो होती है?

सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा।

रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?

बालक – लगभग 300 रूपये।

पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छोटे कील बना दू, तो इसकी कीमत क्या हो जायेगी ?

बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का।

पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?

बालक कुछ देर सोचता रहा और फिर एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी।”

पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्कि इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है।”

बालक अपने पिता की बात समझ चुका था।

शिक्षा –मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्कि इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है।

31. दादी की पेन्सिल : (Kids Moral Story in Hindi)

रोहित अपने कमरे में उदास बैठा था। उसका मैथ्स का एग्जाम बहुत खराब हुआ था। वह दुःखी था कि उसको बहुत कम मार्क्स मिलेंगे।

दादी माँ की पेंसिल

रोहित की दादी कमरे में आती हैं और रोहित को एक सुन्दर सी पेन्सिल गिफ्ट में देती हैं।

रोहित कहता है कि दादी मां मुझे ये पेन्सिल मत दो, मेरा एग्जाम तो खराब हुआ है इसलिए मुझे ये गिफ्ट नहीं चाहिए।

दादी मां कहती हैं – रोहित बेटा, ये पेन्सिल भी एकदम तुम्हारी तरह है। यह पेन्सिल तुमको बहुत कुछ सिखाएगी।

देखो जब यह पेन्सिल को छीला जाता है तो इसे भी ऐसे ही दर्द होता है जैसे अभी तुमको हो रहा है।

लेकिन पेन्सिल छिलने के बाद पहले से शॉर्प और अच्छी हो जाती है और उससे अच्छी लिखाई होती है। अब तुम भी आगे से बहुत मेहनत करोगे तो तुम भी पहले से ज्यादा होशियार और अच्छे बनोगे।

रोहित खुश होकर दादी की पेन्सिल रख लेता है।

शिक्षा –मित्रों, पेन्सिल जब तक छिलती नहीं है तब तक उससे अच्छी लिखाई नहीं की जा सकती, वैसे ही इंसान को भी अच्छा बनने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

32. चश्मा और एक गाँव वाला (Short Story in Hindi)

एक ग्रामीण था। वह अनपढ़ था। वह पढ़ना-लिखना नहीं जानता था। उन्होंने अक्सर लोगों को किताबें या पेपर पढ़ने के लिए चश्मा पहना हुआ देखा था। उसने सोचा, “अगर मेरे पास चश्मा हो, तो मैं भी इन लोगों की तरह पढ़ सकता हूँ। मुझे शहर जाना चाहिए और अपने लिए एक जोड़ी चश्मा खरीदना चाहिए।”

इसलिए एक दिन वह एक शहर में गया। एक चश्मे की दुकान में पहुंचा। उसने दुकानदार से एक जोड़ी चश्मा दिखाने के लिए कहा। दुकानदार ने उन्हें कई जोड़े चश्मे और एक किताब दी।

ग्रामीण ने एक-एक कर सभी चश्मों को आजमाया। लेकिन वह कुछ पढ़ नहीं सका। उसने दुकानदार से कहा कि – ये सब चश्में तो बेकार हैं।

दुकानदार ने उसे ऊपर से नीचे तक घूरा। फिर उसने किताब की तरफ देखा। वह उल्टी थी! दुकानदार ने कहा, “शायद आप नहीं जानते कि कैसे पढ़ना है।”

ग्रामीण ने कहा, “नहीं, मैं नहीं जानता। मैं चश्मा खरीदना चाहता हूं ताकि मैं दूसरों की तरह पढ़ सकूं। लेकिन ये सभी चश्में तो बकवास हैं।”

दुकानदार ने हंसी आ गयी. उसने बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी रोकी. अब उसको अनपढ़ ग्राहक की असली समस्या समझ आ गई थी।

उसने गाँव वाले को समझाया, “मेरे प्यारे दोस्त, तुम बहुत अनजान हो। चश्मा पढ़ने या लिखने में मदद नहीं करते हैं। वे केवल आपको ठीक से देखने में मदद करते हैं। सबसे पहले, आपको पढ़ना और लिखना सीखना चाहिए।”

शिक्षा –अज्ञानता अंधापन है।

33. जैसी करनी वैसी भरनी : (Short Story in Hindi With Moral)

एक रात, तीन चोरों ने एक अमीर आदमी के घर से बहुत सारे पैसे चुराए। उन्होंने पैसे एक बैग में डाले और जंगल चले गए। उन्हें बहुत भूख लगी हुई थी। इसलिए, उनमें से एक चोर भोजन खरीदने के लिए पास के गाँव में चला गया। अन्य दो चोर पैसे के थैले की देखभाल करने के लिए जंगल में ही रह गये।

भोजन के लिए गया चोर ने तरकीब निकाली। उसने एक होटल में अपना खाना खाया। फिर उसने जंगल में अपने दो साथियों के लिए भोजन खरीदा और उस खाने में ज़हर मिला दिया। उसने सोचा, “वे दोनों इस जहरीले भोजन को खाएँगे और मर जाएँगे। और मुझे अपने लिए बहुत सारा पैसा मिल जाएगा।”

इस बीच, जंगल में दोनों चोरों ने अपने साथी को मारने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि वे उन दोनों के बीच पैसे बांट देंगे। उन तीनों दुष्टों ने अपनी क्रूर योजनाओं को अंजाम दिया।

जो चोर अपने लिए सारा पैसा चाहता था, वह जहरीले भोजन के साथ जंगल में आया। उसके पहुँचते ही उन दोनों ने उस चोर को मार डाला। फिर उन्होंने जहरीला खाना खाया और मर गए।

इस प्रकार, तीनों दुष्टों को उनके किये की सज़ा मिल गयी।

शिक्षा –बुरे को बुराई ही मिलती है।

34. हवा और सूरज : (Very Short Story In Hindi)

एक बार हवा और सूर्य की बहस हो गयी। “मैं तुमसे ज्यादा मजबूत हूं,” हवा ने कहा।

“नहीं, तुम नहीं हो,” सूर्य ने कहा। बस उसी समय, उन्होंने एक यात्री को सड़क पर चलते देखा। वह एक शॉल लपेटे हुए था। सूर्य और हवा इस बात पर सहमत हो गये कि जो भी यात्री को अपनी शॉल से अलग करेगा वह अधिक मजबूत होगा।

हवा ने पहली बारी ली। उसने कंधों से यात्री के शॉल को फाड़ने के लिए अपनी सारी ताकत लगा दी। लेकिन जितनी तेजी हवा ने दिखाई, उतने ही जोर से यात्री ने शॉल को अपने शरीर में जकड़ लिया। सूर्य की बारी आने तक संघर्ष चलता रहा।

अब सूर्य की बारी थी। सूर्य गर्म होकर मुस्कुराया। यात्री ने मुस्कुराते हुए सूर्य की गर्मी महसूस की। जल्द ही उसने शॉल को खुला छोड़ दिया। सूर्य गर्म और गर्म … गर्म और गर्म हो गया।

अब यात्री को अपने शॉल की जरूरत नहीं थी। उसने उसे उतारकर जमीन पर गिरा दिया। फिर सूर्य को हवा से अधिक मजबूत माना गया।

शिक्षा –क्रूर बल वह हासिल नहीं कर सकता जो एक कोमल मुस्कान कर सकती है।

बहुत पुरानी बात है। एक जंगल में दो पक्के दोस्त रहते थे। एक था गीदड़ और दूसरा था ऊँट। गीदड़ काफ़ी चालाक था और ऊँट सीधा-सा। ये दोनों दोस्त घंटों नदी के पास बैठकर अपना सुख-दुख बांटते थे। दिन गुज़रते गए और उनकी दोस्ती गहरी होती गई।

एक दिन किसी ने गीदड़ को बताया कि पास के खेत में पके हुए तरबूज़ हैं। यह सुनते ही गीदड़ का मन ललचा गया, लेकिन वो खेत नदी पार था। अब नदी को पार करके खेत तक पहुँचना उसके लिए मुश्किल था। इसलिए, वो नदी पार करने की तरकीब सोचने लगा।

सोचते-सोचते वो ऊँट के पास चला गया। ऊँट ने दिन के समय गीदड़ को देखकर पूछा, “मित्र, तुम यहाँ कैसे? हम तो शाम को नदी किनारे मिलने वाले थे।” तब गीदड़ ने बड़ी ही चालाकी से कहा, “देखो मित्र, पास के ही खेत में पके तरबूज़ हैं। मैंने सुना है तरबूज़ बहुत मीठे हैं। तुम उन्हें खाकर खुश हो जाओगे। इसलिए, तुम्हें बताने चला आया।”

ऊँट और गीदड़

ऊँट को तरबूज़ काफ़ी पसंद था। वो बोला, “वाह! मैं अभी उस गाँव में जाता हूँ। मैंने बहुत समय से तरबूज़ नहीं खाए हैं।”

ऊँट जल्दी-जल्दी नदी पार करके खेत जाने की तैयारी करने लगा। तभी गीदड़ ने कहा, “दोस्त, तरबूज़ मुझे भी अच्छे लगते हैं, लेकिन मुझे तैरना नहीं आता है। तुम तरबूज़ खा लोगे, तो मुझे लगेगा कि मैंने भी खा लिए।”

तभी ऊँट बोला, “तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हें अपनी पीठ पर बैठाकर नदी पार करवाऊँँगा। फिर साथ में मिलकर तरबूज़ खाएंगे।”

ऊँट ने जैसा कहा था वैसा ही किया। खेत में पहुँच कर गीदड़ ने मन भरकर तरबूज़ खाए और खुश हो गया। खुशी के मारे वो ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें निकालने लगा। तभी ऊँट ने कहा, “तुम शोर मत मचाओ, लेकिन वो माना नहीं।”

गीदड़ की आवाज़ सुनकर किसान डंडे लेकर खेत के पास आ गए। गीदड़ चालाक था, इसलिए जल्दी से पेड़ों के पीछे छुप गया। ऊँट का शरीर बड़ा था, इसलिए वो छुप नहीं पाया। किसानों ने गुस्से के मारे उसे बहुत मारा।

किसी तरह अपनी जान बचाते हुए ऊँट खेत के बाहर निकला। तभी पेड़ के पीछे छुपा गीदड़ बाहर आ गया। गीदड़ को देखकर ऊँट ने गुस्से में पूछा, “तुम क्यों इस तरह चिल्ला रहे थे?”

गीदड़ ने कहा कि मुझे खाने के बाद चिल्लाने की आदत है, तभी मेरा खाना पचता है।

इस जवाब को सुनकर ऊँट को और गुस्सा आ गया। फिर भी वो चुपचाप नदी की ओर बढ़ने लगा। नदी के पास पहुँचकर उसने अपनी पीठ पर गीदड़ को बैठा लिया।

इधर ऊँट को मार पड़ने से मन-ही-मन गीदड़ खुश हो रहा था। उधर नदी के बीच में पहुँचकर ऊँट ने नदी में डुबकी लगानी शुरू कर दी। गीदड़ डर गया और बोलने लगा, “यह क्या कर रहे हो?”

गुस्से में ऊँट ने कहा, “मुझे कुछ खाने के बाद उसे हज़म करने के लिए नदी में डुबकी मारनी पड़ती है।”

गीदड़ को समझ आ गया कि ऊँट उसके किए का बदला ले रहा है। बहुत मुश्किल से गीदड़ पानी से अपनी जान बचाकर नदी किनारे पहुँचा। उस दिन के बाद से गीदड़ ने कभी भी ऊँट को परेशान करने की हिम्मत नहीं की।

शिक्षा –ऊँट और गीदड़ की कहानी से यह सीख मिलती है कि चालाकी नहीं करनी चाहिए। अपनी करनी खुद पर भारी पड़ जाती है। जो जैसा करता है उसे वैसा ही भरना होता है।

36. दुष्ट सांप और कौवा : (Short Moral Stories For Kids)

एक बार की बात है। एक जंगल में किसी पेड़ पर कौवे का एक जोड़ा रहा करता था। वो दोनों खुशी-खुशी उस पेड़ पर जीवन बसर कर रहे थे। एक दिन उनकी इस खुशी को एक सांप की नजर लग गई। जिस पेड़ पर कौवों का घोंसला था, उसी पेड़ के नीचे बने बिल में सांप रहने लगा था। जब भी कौवों का जोड़ा दाना चुगने के लिए जाता, सांप उनके अंडों को खा जाता था और जब वो वापस आते, तो उन्हें घोंसला खाली मिलता था, लेकिन उन्हें पता नहीं चल पा रहा था कि अंडे कौन ले जाता है।

इस प्रकार से कई दिन निकल गए। एक दिन कौवे का जोड़ा दाना चुग कर जल्दी आ गया, तो उन्होंने देखा की उनके अंडों को बिल में रहले वाला एक सांप खा रहा है। इसके बाद उन्होंने पेड़ पर किसी ऊंचे स्थान पर छुपकर अपना घोंसला बना लिया। सांप ने देखा कि कौवों का जोड़ा पहले वाले स्थान को छाेड़कर चला गया है, लेकिन शाम होते ही दोनों वापस पेड़ पर आ जाते हैं।

इस प्रकार कई दिन निकल गए। कौवा के अंडों में से बच्चे निकल आए और वो बड़े होने लगे। एक दिन सांप को उनके नए घोंसले का पता चल गया और वह कौवों के जाने का इंतजार करने लगा। जैसे कौवे घोंसला छोड़ कर गए, सांप उनके घोंसले की ओर बड़ने लगा, लेकिन किसी कारण से कौवों का जोड़ा वापस पेड़ की ओर लौटने लगा। उन्होंने दूर से ही सांप को उनके घोंसले की ओर जाता देख लिया और जल्दी से वहां पहुंच कर अपने बच्चों को पेड़ की ओट में छुपा दिया।

सांप ने देखा की घोंसला खाली है, तो वह कौवों की चाल समझ गया और वापस बिल में जाकर सही मौके का इंतजार करने लगा। इसी बीच कौवे ने सांप से पीछा छुड़ाने के लिए एक योजना बनाई। कौवा उड़कर जंगल के बाहर बने एक राज्य में चला गया। वहां एक सुंदर महल था। महल में राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ खेल रही थी। कौवा उसके गले में से मोतियों का हार लेकर उड़ गया। सभी ने शोर मचाया, तो पहरेदार हार लेने के लिए कौवे का पीछा करने लगे।

कौवे ने जंगल में पहुंचकर हारा को सांप के बिल में डाल दिया, जिसे पीछे कर रहे सैनिकों ने देख लिया। जैसे ही सैनिकों ने हार निकालने के लिए बिल में हाथ डाला, तो सांप फुंकारता हुआ बाहर निकल आया। सांप को देखकर सैनिकों ने तलवार से उस पर हमला कर दिया, जिससे सांप घायल हो गया और अपनी जान बचाकर वहां से भाग गया। सांप के जाने के बाद कौवा अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी रहने लगा।

शिक्षा –कभी भी निर्बल का फायदा नहीं उठाना चाहिए। साथ ही मुसीबत में समझदारी से काम लेना चाहिए।

37. जीवन की नश्वरता : (Moral Stories For Kid In Hindi)

एक दिन प्रजापति को बहुत उदास देख कर, इन्द्र ने पूछा-भगवन्, आज इतने परेशान क्यों दिखलाई दे रहे हैं? प्रजापति ने कहा- ’’मैंने मनुष्य को बुद्धि का उपहार और कर्म की घूंट, यह सोच कर दी थी कि वह इनका सदुपयोग करेगा। परन्तु वह तो इनका सही उपयोग नहीं कर रहा है। यही सोचकर मन दुःखी है। यमराज पास ही विराजे हुए थे।

उन्होंने प्रजापति की बात काटकर कहा- ’’परन्तु मेरे पास तो जब भी मनुष्य आता है बहुत ही विनम्र और दीन भाव से आता है।’’ इन्द्र भगवान तुरन्त ही यमराज से बोले – ’आपका तो मनुष्य से मृत्यु के क्षणों में पाला पङता है। मनुष्य के सामान्य जीवन के व्यवहार को देखकर आप भी भौचक्के रह जायेंगे।

प्रजापति पहले ही व्यथित थे। अब उन्हें एक और नई जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने तुरन्त ही नारदजी को बुलाकर कहा- ’मृत्युलोक में जाकर, मनुष्य को जीवन को नश्वरता का बोध कराओ जिससे वह मृत्यु के डर से हमेशा विनम्र और सज्जन बना रहे।

38. हीरालाल का व्यापर : (Moral Story in Hindi for Class 5)

एक दूध बेचने वाला जिसका नाम हीरालाल था वह कुछ सालो में बहुत अमीर हो गया क्योंकि वह गलत तरीके से दूध का व्यापार करता था। वह दूध बेचने के लिए एक नदी पार करके अपने ग्राहकों को दूध देता था।

नदी पार करने के दौरान वह दूध में पानी मिला दिया करता था। यह करके वह खूब आभूषण और पैसा जमा कर चूका था।

उसका बेटा बड़ा हो चूका था और उसकी शादी तय हो गयी. वह ढेर सारे आभूषण लेके नाव पे वापस आ रहा था। अचानक से उसकी नाव पलट गयी और सारा का सारा धन और आभूषण डूब गया।

हीरालाल रोने लगा। तभी अचानक से नदी से आवाज़ आयी “रोना बंद करो ,जो डूबा है वह तुम्हारा था नहीं ,तुमने गलत तरीके से इसको अर्जित किया था और इसलिए वो तुमसे छिन गया।”

शिक्षा –सत्यता ही सर्वोच्च निति है

39. अंगुलीमाल डाकू : (Gautam Buddha Stories in Hindi)

भगवान बुद्ध के समय में कोशल राज्य में अंगुलीमाल नाम का एक डाकू रहता था । जिसने सैकड़ों लोगों का खून किया था | वह जितने लोगों की हत्या की थी । उन सभी की अंगुली काट कर उसे अपनी माला में पिरोकर पहन लेता था, इसलिए उसका नाम अंगुलीमाल पड़ गया ।

वह बहुत हीं निर्दयी और क्रूर था। जंगल में जिस ओर उसका इलाका था, लोग उस तरफ जाने से भी डरते थे। राजा ने उसे पकड़ने के लिए कई बार अपनी सेना भेजी मगर सभी असफल रहे ।

अंगुलिमाल डाकू और गौतम बुद्ध

बुद्ध ने अपनी ज्ञान से यह अनुभव किया कि अंगुलीमाल के मन में कहीं दया व करुणा की भावना सोई हुई है, बस उसे जगाने की आवश्यकता है । यह सोच बुद्ध उस ओर चल दिए, जंगल में जिस ओर अंगुलीमाल रहता था। लोगों ने बुद्ध को उस ओर जाने से बहुत मना किया मगर वे नहीं रुके।

अंगुलीमाल बुद्ध को अपनी ओर आता देख अपनी तलवार लेकर दौड़ा मगर बुद्ध अपनी स्वाभाविक गति से चलते रहे। उसने जोर से चिल्ला कर कहा, ‘ठहर जाओ’ – बुद्ध रुक गए।

जब अंगुलीमाल बुद्ध के पास आया तो उन्होंने कहा, ‘मैं तो ठहर गया मगर तू कब ठहरेगा ? तू भी पाप करने से रुक जाओ इसलिए मैं यहाँ आया हूँ कि तू भी सत्य के पथ का अनुगामी बन जाओ। तेरे अंदर पुण्य मरा नहीं है। यदि तू इसे अवसर देगा, तो तुम्हारी काया पलट जाएगी।

भगवान बुद्ध ने अंगुलीमाल से कहा की तुम पेड़ की डाली तोड़कर लाओ। अंगुलीमाल ने पेड़ की टहनी को तोड़ कर बुद्ध के सामने लाया । बुद्ध ने उससे कहा की अब इसे जोड़ो।

अंगुलीमाल बोला – यह कैसे संभव है ? यह मैं नहीं कर सकता। बुद्ध ने अंगुलीमाल से कहा कि जब तुम किसी चीज को जोड़ नहीं सकते, उसे तुम्हें तोड़ने का भी अधिकार नहीं है।

बुद्ध की इस बात में बहुत तेज़ थी । यह सुन कर अंगुलीमाल के रोंगटे खड़े हो गए । उस पर बुद्ध के वचनों का बहुत हीं अच्छा प्रभाव पड़ा । वह शीतल हो गया ।

वह भगवान बुद्ध के चरणों में गिर कर माफ़ी की गुहार करने लगा । पहली बार किसी ने उससे इतने प्रेम भाव से बात की थी ।

अंगुलीमाल ने कहा – मुझे माफ़ कर अपना अनुयायी बना लीजिए | मैं इस अनुशासन को स्वीकार करने को तैयार हूँ | उसने अंगुलियों की माला उतार कर फेंक दी और बुद्ध के चरणों में गिर पड़ा ।

वह उसी समय भिक्षु हो गया और कुछ समय के बाद उसे अर्हत पद भी प्राप्त हो गया, वह भी बुद्ध से साथ सत्य के मार्ग पर चल पड़ा।

शिक्षा –सत्यता ही सर्वोच्च निति है

40. मधुमखी का डंक : (Very Short Moral Stories For Kid)

 एक मधुमक्खी थी। वह दिनभर बड़े परिश्रम पूर्वक एक फूल से दूसरे फूल पर जाती और उनका रस चूसती। फिर वह अपने छत्ते पर जाकर उस रस से शहद बनाती।

एक दिन उसने सोचा – ‘मैं दिनभर मेहनत करती हूँ और फूलों के रस से शहद बनाने के बाद हर समय डर लगा रहता है कि कहीं कोई मेरा शहद न चुरा ले।’ एक दिन मधुमक्खी गुरु बृहस्पति के पास जा पहुँची।

उन्हें थोड़ा-सा शहद भेंट करके वह बोली,   “गुरुवर! कोई भी आकर कड़ी मेहनत से तैयार किया गया मेरा शहद चुराकर ले जाता है। इसलिए कृपा करके आप मुझे एक डंक दे दें, ताकि मैं शहद चुराने वालों को डंक मार सकूँ।”

यह सुनकर गुरु बृहस्पति को बुरा लगा, लेकिन उन्हें मधुमक्खी को वर देना ही पड़ा।वैसे उन्होंने एक शर्त रख दी, “तुम किसी भी व्यक्ति को डंक मारकर जान से नहीं मारोगी, वरना डंक तुम्हें ही मार देगा।”

शिक्षा –दूसरों का बुरा करना पाप है।

41. किसान की बिल्ली : (Short Moral Stories For Kid In Hindi)

एक समय की बात है एक किसान था जो खेती करने में काफी अच्छा था और उसके पास और किसानो के मुकाबले ज्यादा अनाज होता था। तो अपने अनाज को लम्बे समय तक रखने के लिए उसने एक छोटा सा गोदाम बनवाया लेकिन कुछ ही महिनों में उस गोदाम में बहुत सारे चूहे भी हो गए.

उन चूहों से छुटकारा पाने के लिए किसान एक बिल्ली लेकर आया। और कुछ ही दिनों में उस बिल्ली ने बहुत सारे चूहों को मार दिया। बिल्ली के डर से बांकी के बचे हुवे चूहों ने फैसला किया की अब वो अपने बिल से बाहर ही नहीं निकलेंगे।

चूहे न मिल पाने की वजह से बिल्ली समझ गयी की चूहों ने अपनों बिलों से बहार निकलना बंद कर दिया है। चूहों को बाहर निकालने के लिए बिल्ली ने एक प्लान बनाया। वो उस गोदाम के दरवाजे पर चढ़ी और वहां से नीचे कूद गयी और मरने का नाटक करने लगी।

बिल्ली के गिरने की आवाज सुनकर एक चूहे ने अपने बिल से बाहर झाका और बिल्ली को गिरा हुवा देख वो जोर से बोला ,” इस बात में कोई शक नहीं है की आप बहुत चालक हैं, लेकिन आप चाहे खुद को किसी अनाज की बोरी में भी क्यों न छुपा लें हम फिर भी अपने बिलों से निकलने की कोशिश नहीं करेंगे और आप हमें चाह कर भी अपने पास आते हुए नहीं पकड़ सकते। ”

शिक्षा –यदि आप समझदार हैं तो आप उन लोगों से कभी दोबारा धोखा नहीं खाएंगे जो पहले भी आपका नुकसान कर चुके हैं ।

42. घमंडी राजा : (Moral Story In Hindi For Class 3)

एक बार की बात है, एक राज्य था जिस पर एक अत्याचारी राजा का शासन था। राजा इतना अहंकारी था कि, हमेशा खुद की प्रशंसा करता था।

अपने अलावा कभी किसी और की प्रशंसा नहीं कर सकता था। एक बार उनके राज्यों में एक साधु आया। साधु की प्रशंसा कुछ ही दिनों में पूरे राज्य मे फैल गया।

वह बहुत ही दयालु और बुद्धिमान था। लोग उनके पास समाधान पूछने के लिए आता था। और उन्होंने लोगों के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी मदद करता था।

जल्द ही साधु की यह खबर राजा के पास पहुंच गई। राजा ने उनसे ईर्ष्या की और राज्य में लोगों के बीच उसे बदनाम करने का फैसला किया।

राजा एक योजना के बारे में सोचा। फिर, राजा ने ऋषि को महल में आमंत्रित करने के लिए अपने रक्षकों को भेजा। साधु राजा के तरफ से निमंत्रण स्वीकार कर लिया।

निर्धारित दिन पर साधु मुसकराते हुए महल में आए। राजा ने साधु का स्वागत किया। फिर राजा साधु से कहा, “हम आपके बुद्धि के बारे में लोगों से बहुत सुना है। और इसीलिए आज हम खुद सबके सामने देखना चाहते हैं।”

राजा ने कहा, “मैं तुमसे कुछ सवाल पूछूंगा।”

जवाब में, साधु मुस्कुराते हुए अपना सर हिलाया।

राजा के हाथ में काले कपड़ों का एक थैली था। फिर राजा साधु से सवाल किया, “बताओ मेरे हाथ में क्या है?”

साधु ने उत्तर दिया, “महाराज आप उस थैली के अंदर एक एक पक्षी को पकड़े हुए हैं।”

राजा थोड़ा हैरान हुआ, फिर भी शांति से जवाब दिया। “हां,तुम सही कह रहे हो। अब बताओ हमारे हाथ में पक्षी जिंदा है या मर गया?”

यदि आप एक बुद्धिमान व्यक्ति है, तो आप हमारे सवालों का उत्तर देने में सक्षम होगी।” राजा ने यह टिप्पणी की।

राजा अपने मन ही मन एक योजना बनाई। अगर साधु कहता है कि पक्षी जीवित है, तो वह पक्षी की गर्दन दबा कर उसे मार देगा। और सभी लोगों को यह एक मरा हुआ पक्षी दिखाएगा।

और यदि वह कहता है, कि यह एक मरा हुआ पक्षी है। तो राजा पक्षी को जीवित रहने देगा, और सभी को दिखाएगा कि यह जीवित है।

राजा ने सोचा कि उसने चाहे जो भी उत्तर देगा, यह राजा के लिए एक जीत की स्थिति होगा।

साधु ने उत्तर दिया, “ठीक है, यह आपके हाथ में है। आप खुद यह तय कर सकते हैं, यह जीवित है या मृत।”

शिक्षा –इसी तरह हम अपने जीवन को जो पथ देते हैं, वह हमारे अपने हाथों में है। अपनी पसंद और प्रयासों से हम यह तय कर सकते हैं कि, हमें अपने जीवन का क्या बनाना है।

43. ब्राह्मण और क्रूर दानव : (Moral Story For Kids)

बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में एक क्रूर दानव रहता था। एक दिन उसने एक ब्राह्मण को देखा। वह दानव उछल कर ब्राह्मण के कंधों पर चढ़ गया और बोला, “मुझे पास की नदी तक ले चलो। मुझे स्नान करना है।”

ब्राह्मण के पास कोई चारा नहीं था। इसलिए वह राजी हो गया। नदी के रास्ते में बढ़ते हुए ब्राह्मण ने दानव के पैरों को गौर से देखते हुए कहा, “तुम्हारे पास इतनी कोमल और साफ सुत्रे कैसे हैं?”

दानव ने जवाब दिया, “मैं कभी भी अपने पांव को साफ किए बिना जमीन पर कदम नहीं रखता।”

जल्द ही वे नदी के पास पहुंच गए और दानव नदी के अंदर नहाने चला गया। ब्राह्मण समझ गया था कि नहाने के बाद राक्षस उसे मार डालेगा।

वह यह भी समझ गया था की बिना अपने पांव को साफ किए दानव उसका पीछा नहीं करेगा। इसलिए वह फौरन भाग खड़ा हुआ। दानव ने उसका पीछा नहीं किया।

शिक्षा –मुसीबत का सामना सूझ–बूझ से करें।

44. ज्ञान की प्यास : (Short Moral Story For Children’s)

उन दिनों कबीर सिंह यादव उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। उन्हें भाषा सीखने में बहुत रुचि थी, अपने जुनून के कारण उन्होंने कई भाषाएँ सीखीं। लेकिन अभी तक बंगला भाषा नहीं सीखी थी।

अंततः। उसने एक उपाय निकाला और एक बंगाली सलून जाकर शेविंग करवाना शुरू किया। जब तक नाई उनकी दाढ़ी बनता। वे उससे बंगला भाषा सीखते रहे।

यादव जी की पत्नी को यह बुरा लगा। उसने अपने पति को बताया। आप उच्च न्यायालय के न्यायाधीश होकर एक भाषा सीखते हैं। अगर लोग देखंगे तो क्या कहेंगे। यदि आप बंगाली सीखना चाहते हैं, तो किसी विद्वान से सीखें।

यादव जी ने हंसते हुए जवाब दिया। मैं ज्ञान का प्यासा हूं, मुझे जाति से क्या लेना-देना। जवाब सुनकर पत्नी ने फिर कुछ नहीं कहा। ज्ञान उच्च और निम्न की किसी भी पेटी में बंद नहीं रहता है।

शिक्षा –शिक्षा कहीं से भी लिया जाना चाहिए।

45. सच्चे मित्र कहानी : (Hindi Short Story)

दो दोस्त रेगिस्तान से गुजर रहे थे। यात्रा के कुछ समय के दौरान उनके बीच एक बहस हुई, और एक दोस्त ने दूसरे को चेहरे पर थप्पड़ मारा।

जिसे थप्पड़ मारा गया, उसे चोट लगी, लेकिन बिना कुछ कहे, उसने रेत में लिखा; “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।”

वे तब तक टहलते रहे जब तक उन्हें एक नखलिस्तान नहीं मिला, जहां उन्होंने स्नान करने का फैसला किया। जिसको थप्पड़ मारा गया था, वह घोड़ी में फंस गया और डूबने लगा, लेकिन दोस्त ने उसे बचा लिया। डूबने से बचने के बाद उस दोस्त ने एक पत्थर पर लिखा ;

“आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।”

जिस दोस्त ने थप्पड़ मारा और अपने सबसे अच्छे दोस्त को बचाया, उसने उससे पूछा;

“मैंने आपको चोट पहुंचाने के बाद, आपने रेत में लिखा और अब, आप एक पत्थर पर लिखते हैं, क्यों?”

दूसरे मित्र ने उत्तर दिया; “जब कोई हमें ठेस पहुँचाता है तो हमें इसे रेत में लिख देना चाहिए जहाँ क्षमा की हवाएँ इसे मिटा सकती हैं। लेकिन, जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करता है, तो हमें उसे पत्थर में उकेरना चाहिए, जहां कोई हवा उसे मिटा नहीं सकती।”

46. बेईमानी का नतीज़ा : (Short Stories in Hindi)

एक औरत ने अपने घर में दो नौकरानी रखी हुई थी। वह कौन से दिन भर काम कराती उस औरत के पास एक मुर्गा भी था। जो सुबह 4:00 बजे आवाज देकर उनको सुबह जल्दी उठा देता था। नौकरानी यों को सुबह उठना बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

इसलिए नौकरानीयों को मुर्गे से भी नफरत हो गया था। एक दिन एक नौकरानी दूसरे नौकरानी से बोली जिस दिन नौकरानी कहीं गई होगी उस दिन मुर्गे को खत्म कर देंगे। इसके बाद हमें कोई जल्दी सुबह नहीं उठाएगा और हम जी भर के सो सकेंगे।

दूसरी नौकरानी को भी उसकी यह योजना पसंद आ गई। एक दिन मौका पाकर उन्होंने मुर्गे को मार दिया और आरोप किसी और पर लगा दिया। मालकिन को उनकी याद चाल समझ में आ गई थी।

इसलिए मालकिन ने उन्हें आधी रात को ही उठा दिया। वह दोनों बोली मालकिन अभी 4:00 नहीं बजे हैं। महिला बोली तुम काम करना शुरू करो और 4:00 बजे हमें जगा देना। नौकरानीया पछताने लगी कि हमने अपना ही नुकसान कर लिया। दोस्तों धोखेबाजी से अपना ही नुकसान होता है।

शिक्षा –हमें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। धोखेबाजी से अपना ही नुकसान होता है।

47. समझदार लोमड़ी ((Short Stories in Hindi)

एक शेर और एक गधा और एक लोमड़ी में नई नई दोस्ती हो गई। तीनों मिलकर शिकार करने की योजना बनाई। और कहा कि शिकार पर तीनों का बराबर हिस्सा होगा। अचानक उन्होंने एक हिरण देखा तीनों ने मिलकर उसे बहुत थक आया।

और जब हिरन थक गया तो शेर ने उसे मार दिया। और गधे से कहा शिकार के तीन हिस्से कर दो। गधे ने उसे तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया यह देखकर शेर को गुस्सा आ गया। और शेर ने गधे पर हमला करके मार दिया और फिर लोमड़ी से भी बोला लोमड़ी सब देख रही थी।

लोमड़ी अपने खुद के लिए एक चौथाई भाग रखा और सब शेर को दे दिया। तब शेर बहुत प्रसन्न हुआ और बोला तुम सही में बुद्धिमान हो यह सब तुमने कहां से सीखा है। लोमड़ी बोली यह सब हमने गधे की गलतियों से सीखा है।

शिक्षा –हमें अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए। धोखेबाजी से अपना ही नुकसान होता है।

48. राम पिंटू की शरारत : (Hindi Moral Stories)

राम-पिंटू दोनों भाई थे , दोनों की उम्र लगभग 2 साल की होगी। दोनों खूब शरारत करते थे। चिंटू ज्यादा शरारती था। वह पिंटू के सूंढ़ को अपने सूंढ़ में लपेटकर खींचता और कभी धक्का देकर गिरा देता।

एक दिन की बात है , दोनों खेल में लड़ते-झगड़ते दौड़ रहे थे।

राम का पैर फिसल जाता है , वह एक गड्ढे में गिर जाता है।

राम काफी मशक्कत करता है फिर भी वह बाहर नहीं निकल पाता।

पिंटू उसे अपने सूंढ़ से ऊपर खींचने की कोशिश करता। मगर उसकी कोशिश नाकाम रहती।

पिंटू दौड़कर अपनी मां को बुला लाता है।

उसकी मां अपने लंबे से सूंढ़ में लपेट कर चिंटू को जमीन पर ले आती है।

राम की शरारत उस पर आज भारी पड़ गई थी।

उसने रोते हुए कहा – आगे से शरारत नहीं करूंगा।

दोनों भाई खेलने लगे , इसको देकर उसकी मां बहुत खुश हुई।

शिक्षा –अधिक शरारत और दूसरों को तंग करने की आदत सदैव आफत बन जाती है।

49. सुनहरा पिंजरा : (Moral Stories in Hindi)

कुछ दिनों बाद सेठ को गांव में से कुछ मसलो की आर्डर आयी और उसने खुद ही जाने का फैसला किया। जाते वक्त उसने अपने तोते से कहा, ”तोते राम, मैं गांव में जा रहा हूं। लौटते समय मैं तेरे माता पिता व सगे संबंधियों से मिलूंगा। तुझे उनके लिए कोई संदेश भेजना हो तो बता?“

तोते ने कहा,”सेठ जी, उन सबसे कहना, तोता भूखा नहीं है, तोता प्यासा भी नहीं है। तोता सोने के पिंजरे के अंदर आनंद से रह रहा है।“

सेठ अपने मसाले बेचकर लौटते समय उसी पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रूका। तभी तोतों का एक समूह उस पर टूट पड़ा। वे उसे चोंच से मारने लगे। उनमें से एक तोते ने सेठ से पूछा, ”सेठ जी, हमारा तोता क्या कर रहा है?“

सेठ ने उन्हें शांत करते हुए कहा, ”तोता भूखा नहीं है, तोता प्यासा नहीं है। तोता सोने के पिंजरे के अंदर आनंद कर रहा है।“

यह सुनकर सभी तोते बिना कुछ बोले जमीन पर मुर्दों की तरह लुढ़क गए। सेठ उनके पास गया उसने तोतों को हिला डुलाकर देखा, पर ऐसा लगा जैसे सारे तोते आघात से मर गए हों।

सेठ जी घर पर आए। सेठ को देखते ही तोते ने अपने माता पिता एवं सगे संबंधियों के समाचार पूछे।

सेठ ने कहा, ”तेरे माता पिता और सगे संबंधियों को जब मैंने तेरा संदेश सुनाया तो सभी लुढ़क गए। क्या उन्हें आघाल लगा होगा?“

पिंजरे के तोते ने कोई जवाब नहीं दिया। सेठ की बात सुनकर वह स्वयं भी पिंजरे में झूले से नीचे गिर पड़ा। सेठ ने यह देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उसने पिंजरे का दरवाजा खोला और तोते को हिला डुलाकर देखा। सेठ जी को लगा वह तोता भी आघात से मर गया है। सेठ जी ने तोते को पिंजरे से बाहर निकालकर थोड़ी दूर पर रख दिया। मौका देखकर तोता पंख फड़फड़ाता हुआ उड़ गया।

जाते जाते उसने कहा, ”सेठ जी, मैं आपका आभारी हूं। मुझे अपने माता पिता का संदेश मिल गया है। मैं उनसे मिलने जा रहा हूं। आपका पिंजरा सोने का था, लेकिन वह पिंजरा था। मेरे लिए वह जेल थी।“ तोता उड़ता हुआ जंगल में अपने माता पिता और सगे संबंधियों के पास पहुंच गया। उसे लौटकर आया हुआ देख सब खुश हो गए।

अब मुक्त वातावरण में तोता सबके साथ आनंद से रहने लगा।

50. होशियार इंसान : (Hindi Story for Class 3 with Moral)

एक बार एक छोटे प्राइवेट हवाई जहाज में शाम के समय एक डॉक्टर, एक वकील, एक छोटा बच्चा और एक पंडित जी जा रहे थे। अचानक हवाई जहाज के इंजिन में कुछ तकनीकी खराबी हो गई।

पायलट की तमाम कोशिशों के बावजूद हवाई जहाज नीचे जाने लगा। पायलट ने पैराशूट लेकर मुसाफिरों से कहा कि वह कूद जाए और खुद को बचा लें। दुर्भाग्य से सिर्फ तीन पैराशूट बचे थे और हवाई जहाज में चार लोग बाकि थे।

एक पैराशूट डॉक्टर ने ले लिया और कहा “मैं डॉक्टर हूं, मैं जिंदगियां बचाता हूं इसलिए मुझे जीना चाहिए।” यह कहकर वह कूद गया।

फिर वकील ने कहा, “मैं वकील हूं और वकील दुनिया के सबसे होशियार इंसान होते है।” उसने पैराशूट लिया और वह भी कूद गया।

पंडित जी ने छोटे लड़के की ओर देखा और कहा, “बेटा, मैने अपनी जिंदगी जी ली है। तुम अभी छोटे हो और तुम्हारी पूरी जिंदगी पड़ी हे। यह आखिरी पैराशूट लो और आराम से जीना।”

छोटे लड॒के ने पैराशूट पंडित जी को वापिस किया और कहा, “आप परेशान ना हो। जो आदमी खुद को सबसे होशियार बता रहा था वह मेरा बैग लेकर नीचे कूद गया है। हमारे पास दोनों पैराशूट सुरक्षित है। हम आराम से नीचे कूद सकते है।”

Conclusion

बच्चों के मानसिक विकास के लिए कहानियाँ अहम भूमिका निभाती है। इसके साथ ही उन्हें एक आदर्श इंसान बनाने में मदद करती है। तो दोस्तों Kahaniyan सबके जीवन का एक अहम हिस्सा है, जिसके चलते आज हम आपके लिए Short Stories In Hindi For Kids और इसके साथ ही Moral Short Story In Hindi लेकर आए है, इन hindi small story को पढ़ने के बाद आपने इनसे कुछ न कुछ जरूर सीखा होगा।

आशा करती हूँ कि मेरे द्वारा दी गई Top 10 Moral stories in Hindi आपको जरूर पसंद आई होंगी, आपके बच्चे को सबसे अच्छी Short Stories Hindi कौन-सी लगी हमें नीचे Comment बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताये। ऐसी ही और मजेदार कहानियां पढ़ने के लिए बने रहिये हमारे साथ हिंदी सहायता पर, धन्यवाद।

FAQs

3 प्रकार की कहानियां कौन सी है?

एक रिसर्च में में दावा किया गया कि कहानियां केवल तीन प्रकार की होती है –
1. सुखद अंत (Happy ending)
2. दुखद अंत (Unhappy ending)
3. त्रासदी (Tragedy)

कहानियाँ इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

Stories या कहानियां हमें दूसरों को और खुद को समझने में एवं खुद में परिवर्तन लाने में मदद करती है। हम कहानियों में जिन पात्रों (character) को देखते है, उनके साथ हम सहानुभूति महसूस करते है।

एक अच्छी कहानी के लिए क्या संरचना होती है?

सबसे मजबूत कहानियों में अच्छी तरह से विकसित किया गया विषय, आकर्षक प्लॉट्स, उपयुक्त संरचना, यादगार केरैक्टर, अच्छी तरह से चुनी गई सेटिंग्स और आकर्षक स्टाइल आदि चीजे होती है।

आपको हमारा यह लेख कैसा लगा ?

Average rating 4.4 / 5. Vote count: 179

अब तक कोई रेटिंग नहीं! इस लेख को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

Editorial Team

एडिटोरियल टीम, हिंदी सहायता में कुछ व्यक्तियों का एक समूह है, जो विभिन्न विषयो पर लेख लिखते हैं। भारत के लाखों उपयोगकर्ताओं द्वारा भरोसा किया गया। Email के द्वारा संपर्क करें - contact@hindisahayta.in

Tags

Related

Comments are closed.