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महिला सशक्तिकरण पर निबंध, भाषण और कोट्स हिंदी में।

महिला सशक्तिकरण पर निबंध, भाषण और सभी जानकारी। जानिये क्यों है महिला सशक्तिकरण की ज़रूरत, क्या है महिलाओ के अधिकार और सर्कार की योजनाए।

महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) यह शब्द पिछले 500 सालों से प्रचलन में हैं लेकिन हमारे लिए जानना जरूरी है कि इसका अर्थ क्या है? इसकी परिभाषा क्या है? इसकी आवश्यकता क्या है?

महिला सशक्तिकरण का संबंध सीधा अधिकारों और शक्तियों से है अर्थात महिलाओ की क्षमता या योग्यता जिससे वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। नारी सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं की उस क्षमता से है जिससे वह परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सकती है।

नीचे दिए गए नारी सशक्तिकरण पर निबंध (Woman Empowerment Essay, Nari Sashaktikaran ka Nibandh) के माध्यम से आप नारी सशक्तिकरण के सभी पहलुओं को सरलता से समझ सकेंगे. महिला (Mahila Sashktikaran) के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारे इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

नारी सशक्तीकरण, प्रस्तावना। 

भारत पुरुष प्रधान देश है। यहां महिलाओं को पुरुषों के समान दर्जा नहीं दिया जाता है। जिसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय पुरुष महिलाओं पर हावी होने लगे।

महिलाओं के साथ अत्याचार लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं। इस समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा दिलाने के लिए महिला सशक्तिकरण ही एक अहम भूमिका निभा सकती है।

यही एक वह माध्यम है जिससे महिलाओं को उनके अधिकार और ताकत का पता चल सकता है।

कहा जाता है कि नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों और कड़ियों को तोड़ने लगेगी तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं रोक पाएगी। महिलाओं इसी शक्ति का संचार करने के लिए महिला सशक्तिकरण (Mahila Sashktikaran) की जरूरत है।

नारी सशक्तिकरण का अर्थ और परिभाषा। 

(Woman Empowerment Meaning in Hindi, Nari Sashaktikaran ki Paribhasha, Nari Sashaktikaran Kya hai, Nari Sashaktikaran ka Mahatva)

महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, ताकि उन्हें भी पुरुषों के बराबर रोजगार और शिक्षा (women’s education) का मौका मिल सके। जिससे वह सामाजिक रूप से स्वतंत्रता को प्राप्त कर सके। अपने सभी निर्णय खुद ले सके। नारी सशक्तिकरण का सही अर्थ यही है कि समाज की महिलाओं को उनके अधिकारों को प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाया जा सके।

एक नारी हर कार्य में सक्षम होती है। पुरुषों से ज्यादा मेहनत एक महिला कर सकती है इसीलिए यह जरूरी है कि उसे खुद का फैसला लेने का बराबर हक हो। एक महिला में इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह अपने परिवार। समाज, देश और स्वयं के लिए फैसले ले सके।

वर्तमान समय में नारी सशक्तिकरण विशेष चर्चा का विषय है। महिलाएं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा है। हमारे ग्रंथों में कहा गया है कि जहां नारी की पूजा होती है। वहां देवता निवास करते हैं। उसके बावजूद भी नारी सशक्तिकरण की आवश्यकता पढ़ना हमें सोचने पर मजबूर करता है।

भारत में महिला सशक्तिकरण। 

(Woman Empowerment in India)

भारत में लिंग के आधार पर भेदभाव, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अशिक्षित महिलाएं काफी हद तक है। भारत में विशेष रुप से निम्न जातियों की महिलाएं जैसे अनुसूचित जातियां, पिछड़ी जातियां, आदिवासी समुदाय की महिलाएं विशेष रुप से असुरक्षित हैं। अशिक्षित और निर्णय लेने की क्षमता ना होने के कारण महिलाओं को अधिकतर हिंसा का सामना करना पड़ता है। इसीलिए भारत में महिला सशक्तिकरण की जरूरत है।

भारत में महिला सशक्तिकरण विभिन्न पहलुओं पर निर्भर करता है जैसे भौगोलिक (शहर,ग्रामीण स्तर), शिक्षा (Education and Women’s Empowerment in India), जाति, आयु, वर्ग इत्यादि. भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण (Woman Empowerment in India) के लिए राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर बहुत से कानून (law of women), कार्यक्रम, संगठन मौजूद हैं जो महिलाओं को जागरूक करते है। उन्हें इस काबिल बना रहे हैं कि वह अपने और अपने परिवार, समाज और देश से जुड़े निर्णय ले सके।

नारी सशक्तिकरण का उद्देश्य / भारत में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता। 

(Aims and Objective of Woman Empowerment in India)

हमारे समाज में महिलाओं की आवाज को हमेशा दबाया जाता है उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। लड़का और लड़की में भेदभाव होता है।

हजारों सालों से पुरुषों के द्वारा महिलाओं का शोषण किया जा रहा है और इन सब का परिणाम यह हुआ कि हमारे देश की महिलाओं को दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, यौन हिंसा इत्यादि का सामना करना पड़ा। रोज अखबार में महिलाओं के साथ हुए दुष्कर्म, अत्याचार की खबरें छपने लगी। रोज किसी घर की रसोई में महिलाओं को जलाया जाता। रोज किसी नन्ही सी जान को इस दुनिया में आने से पहले ही मार दिया जाता।

नारी पर हो रहे इन सभी अत्याचारों पर रोक लगाने के लिए और उन्हें अपने अधिकारों से रूबरू करवाने के लिए महिला सशक्तिकरण की जरूरत पड़ी। अब यह जरूरी है कि देश की सभी महिलाएं शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत बने। नारी सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं को यह भरोसा दिलाया जाएगा कि वह चाहे तो समाज और देश में बहुत कुछ बदल सकती हैं। वह किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। एक सशक्त नारी में इतनी क्षमता होती है कि वह अपने पूरे समाज को सशक्त कर सकती है।

भारत में महिला सशक्तिकरण का यही उद्देश्य (aims of woman empowerment in India) है कि महिलाओं को साक्षर बनाया जाए, उनमें इतनी क्षमता का विकास किया जाए कि वह अपने, अपने परिवार, अपने समाज, देश से संबंधित सभी निर्णय ले सके। अपने अधिकारों के लिए लड़ सके और अपने ऊपर हो रही हिंसा पर रोक लगा सके।

कहा जाता है कि जिस महिला के मुख्य में कहने की शक्ति हो या आवाज हो सही मायने में वह एक मजबूत और निडर औरत कहलाती है। नारी सशक्तिकरण का उद्देश्य (Nari Sashaktikaran Ka Uddeshya) है कि भारत की सभी महिलाएं निडर औरत बनें।

महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की योजनाएं। 

(Nari ShaktiKaran Yojana Kya Hai, Nari Shakti Karan Yojana)

भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। कई सारी योजनाएं (Nari Shakti Karan Yojana) सरकार द्वारा बनाई गई है जिससे महिलाओं का विकास हो सके। समाज में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा सके। जीवन के इस तराजू में महिला और पुरुष बराबर हो।

  1. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (Beti Bachao Beti Padhao Yojana)- लड़की एक बोझ है इस बात को गलत साबित करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इस योजना के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या और कन्या शिक्षा पर काम किया गया है साथ ही लड़कियों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जाती है।
  2. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjawala Yojana)- इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिया गया है। जिससे उन्हें सशक्त बनाया जा सके और वह शारीरिक रूप से स्वस्थ रहे।
  3. महिला हेल्पलाइन योजना (Women Helpline Number)- इस योजना के अंतर्गत महिलाओं की मदद के लिए 24 घंटे इमरजेंसी सहायता सेवा प्रदान की जाती है। जिससे महिलाएं अपने विरुद्ध होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा या अपराध की शिकायत खुद कर सकती हैं। इस योजना के अंतर्गत महिलाएं निर्धारित नंबर 181 पर डायल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
  4. महिलाओं के लिए आरक्षण (Reservation for Women)- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की घोषणा की है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के सामाजिक स्तर को सुधारने के लिए भी प्रयास किया गया है। इसी का परिणाम देखने को मिला कि कई प्रदेशों में भारी मात्रा में महिलाएं ग्राम पंचायत अध्यक्ष चुनी गई।
  5. किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी योजना- इस योजना को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की देखरेख में चलाया जा रहा है। इस योजना से प्राप्त होने वाले लाभ को दो समूहों में विभाजित किया गया है। पहले समूह में 11-15 वर्ष की बालिकाएं आते हैं जिन्हें सरकार की तरफ से पका हुआ खाना दिया जाता है। दूसरे समूह में 15-18 वर्ष की महिलाएं आती हैं जिन्हें आयरन की गोलियां और अन्य दवाइयां उपलब्ध करवाई जाती है।
  6. इंदिरा गांधी (Indra Gandhi) मातृत्व सहयोग योजना – इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो बच्चों के जन्म तक वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
  7. स्वाधार घर योजना- समाज की कुछ महिलाएं जैसे रिहा कैदी, विधवा, मानसिक रूप से विकलांग, बेसहारा महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था इस योजना के अंतर्गत की जाती है साथ ही इस योजना के अंतर्गत तलाकशुदा महिलाओं को कानूनी परामर्श, चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाती है।

महिला सशक्तिकरण कानून। 

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार ने कई कानून भी बनाए हैं जिससे महिलाओं का समाज में शोषण ना हो।

  • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम।
  • हिंदू विवाह अधिनियम।
  • दहेज निषेध अधिनियम।
  • मातृत्व लाभ अधिनियम।
  • गर्भावस्था अधिनियम।
  • कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण एक्ट।
  • लिंग परीक्षण तकनीक एक्ट।
  • बाल विवाह रोकथाम अधिनियम।
  • राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनयम।
  • विदेशी विवाह अधिनियम।
  • भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम।

सरकार के द्वारा महिलाओं के लिए इतने सारे कानून बनाने के बावजूद भी महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है। ग्रामीण इलाकों में तो आज भी महिलाओं को पुरुषों के पैरों की जूती ही समझा जाता है। इसका मुख्य कारण महिला शिक्षा (Education and Women’s Empowerment in India), आर्थिक परतंत्रता, और महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी ना होना है।

महिला सशक्तिकरण के मार्ग में आने वाली समस्याएं। 

भारतीय समाज ऐसा समाज है जिसमें कई तरह के रीति-रिवाज, मान्यताएं, परंपराएं शामिल है. यही कुछ परंपराएं महिला सशक्तिकरण के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी समस्याएं हैं। पुरानी विचारधारा के कारण महिलाओं को उनके घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं होती।

जिसके कारण रोजगार तो दूर की बात है वह उचित शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर सकती और इसी विचारधारा के कारण वह अपने आप को हमेशा पुरुषों से कम समझती है। भारत में केवल 64.6 प्रतिशत महिला शिक्षा दर है जबकि पुरुष शिक्षा दर 80.9 प्रतिशत है। आजकल कुछ परिवार लड़कियों को स्कूल तो भेजते हैं लेकिन आठवीं, दसवीं कक्षा पास करने के बाद उनकी पढ़ाई छुड़वा दी जाती है ताकि वह घर की चारदीवारी में रहकर घर के काम सीख सकें।

पुरुष प्रधान समाज होने के कारण भी महिलाओं के लिए समस्याएं उत्पन्न होती हैं। महिलाओं को अपने कार्य क्षेत्रों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है जिसके चलते वह रोजगार के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। लैंगिक स्तर पर भी उनके साथ भेदभाव किया जाता है हमेशा यह माना जाता है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं कमजोर है। समान कार्य होने के बावजूद भी महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा कम भुगतान किया जाता है।

Women Empowerment Essay

(Nari Sashaktikaran Par Nibandh) (100-200 Words में)

इस नारी सशक्तिकरण निबंध (Women Empowerment Essay) के माध्यम से आप नारी सशक्तिकरण से जुड़े सभी पहलुओं को सरलता से समझ पाएंगे.

महिलाओं के व्यक्तिगत विकास और उन्हें सभी निर्णय स्वयं लेने के लिए सशक्त बनाना ही नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) कहलाता है।

भारत प्राचीन काल से ही अपनी संस्कृति, परंपराओं, समाज, धर्म और भौगोलिक विशेषताओं के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत पुरुष रूढ़िवादी राष्ट्र के रूप में भी जाना जाता। भारतीय पुरुषों के द्वारा महिलाओं को बोलने या कभी कोई निर्णय लेने का मौका नहीं दिया जाता।

इसी बात का परिणाम है कि आज हमारे देश की महिलाओं को घरेलू हिंसा, बलात्कार, असमानता, मानव तस्करी, यौन हिंसा, दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा ओं और अत्याचारों का सामना करना पड़ता है।

जब पानी सर से ऊपर जाने लगा और महिलाओं के प्रति अत्याचार लगातार बढ़ता गया तो महिला सशक्तिकरण ही एक ऐसा उपाय था जिससे महिलाओं को सशक्त किया जा सकें। उन्हें उनके अधिकारों की पहचान करवाई जा सकें, उन्हें इस काबिल बनाया जा सकें कि वह अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध खड़ी होकर अपने हक की लड़ाई लड़ सकें साथ ही अपनी जिंदगी के सभी निर्णय खुद ले सकें।

महिलाएं देश का आधा हिस्सा है इसीलिए इस चीज को पूरी तरह से शक्तिशाली बनाने के लिए केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाओं का भी साथ जरूरी है इसीलिए महिला सशक्तिकरण बहुत आवश्यक है।

नारी सशक्तिकरण पर निबंध। 

(Nari Sashaktikaran Par Nibandh) (300-500 Words में)

भारत में अनपढ़ आबादी का ज्यादातर अंश महिलाओं द्वारा कवर किया जाता है। महिला सशक्तिकरण का मतलब महिलाओं को शिक्षित करने के साथ-साथ उन्हें अपने देश, समाज और परिवार से संबंधित निर्णय लेने के योग्य बनाना है.

भारत देश के उज्जवल भविष्य, समाज और परिवार को फलने फूलने के लिए महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता है.

महिला सशक्तिकरण महिलाओं को अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ सामाजिक विकास के लिए अपने फैसले लेने का अधिकार देता है. महिलाएं समाज की रीढ़ होती है इसीलिए उन्हें बचपन से ही विकसित करना जरूरी है।

हमारी सरकार के द्वारा महिलाओं को जागरूक करने और उनके अधिकारों से अवगत कराने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं साथ ही महिलाओं को समाज में हो रहे अत्याचारों से बचाने के लिए कई कानून भी बनाए गए हैं। हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, मातृ दिवस मनाया जाता है।

महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ यही है कि ही महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत करवाने के साथ-साथ उन्हें इस काबिल बनाना है कि वह अपने सभी निर्णय स्वयं ले सके। अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों पर खुद आवाज उठा सके।

पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा कहा गया है कि “लोगों को जगाने के लिए महिलाओं को जागरूक होना जरूरी है। जब एक महिला अपना कदम आगे बढ़ाती है तो उसका परिवार भी आगे बढ़ता है, उसका गांव भी आगे आता है और सभी का विकास होता है।

लैंगिक समानता को प्राथमिकता देते हुए पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण पर लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत देश के लिए जरूरी है कि महिलाएं शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनें। देश को मजबूत बनाने के लिए हमें सबसे पहले महिलाओं के खिलाफ हो रहे दुर्व्यवहार, अत्याचार, हिंसा को रोकना होगा जिससे महिलाओं का विकास हो सके और वह देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकें।

लंबे समय के संघर्ष के बाद महिलाओं को संपत्ति का अधिकार, मतदान का अधिकार, नागरिक अधिकार, विवाह और रोजगार के मामलों में कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो पाई है।

महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा के लिए सरकार के द्वारा कई कल्याणकारी योजनाएं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ उज्ज्वला योजना किशोरी कौशल योजना जैसी योजनाएं चलाई जा रही है.

वास्तव में सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं को अपने स्वयं के अधिकारों के बारे में जागरूक होने की आवश्यकता है। महिलाओं को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि उनके आसपास उनके समाज और उनके देश में क्या हो रहा है ? महिलाओं को यह पता होना चाहिए कि किसी भी समस्या का समाधान करने में वह पुरुषों के मुकाबले ज्यादा सक्षम हैं अगर महिलाएं आगे आकर देश के विकास में अपनी भागीदारी निभाएगी तो उम्मीद की जा सकती है कि हमारे देश को कभी भी किसी भी तरह के आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

हमारे देश में प्रतिभाशाली महिलाओं के उदाहरण कम नहीं है। इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, झांसी की रानी, पीटी उषा इत्यादि कुछ ऐसी महिलाओं के उदाहरण हैं जिन्होंने दयालुता और बहादुरी दिखाते हुए इस देश को गर्व महसूस करवाया है।

महिला सशक्तिकरण Quotes

(Woman Empowerment Quotes/ Nari Sashaktikaran Slogan in Hindi)

वह ऊष्मा है ऊर्जा है प्रकृति है पृथ्वी है क्योंकि वही तो आधी दुनिया और पूरी स्त्री है
किसी को भी मत कहने दो कि तुम कमजोर हो क्योंकि तुम एक औरत हो
जिम्मेदारी संग नारी भर रही है उड़ान ना कोई शिकायत ना कोई थकान
औरत को देने वाले उपहार में सबसे बेहतरीन उपहार है उसका आदर करना
स्त्री सरल भाषा में कहूं, स्त्री मतलब अगरबत्ती जिसमें आग भी है धीरज भी है सहनशीलता भी है अपने आप को धीरे धीरे चला कर अपने परिवार को सुगंधित करने की ताकत भी है
नारी का जो करे अपमान माने उसे पशु समान
जब है नारी सबसे शक्तिशाली तो फिर क्यों नारी को कहें बेचारी
औरत कोई खिलौना नहीं होता घरवाले तो प्यार से ही गुड़िया कहते हैं
मैं भी छू सकती हूं आकाश मौके की है मुझे तलाश
बराबर का साथ निभाए महिलाएं अब आगे आएं
सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्त समाज
नारी का करो सम्मान तभी बनेगा देश महान
महिलाओं को अब अपना स्वाभिमान जगाना है, देश को तरक्की की ओर बढ़ाना है
मां लक्ष्मी मां सरस्वती कि चाहे कितनी भी पूजा कर लो या फिर 9 दिन तक अखंड उपवास करो लेकिन अगर नारी की इज्जत करना नहीं सीखा तो सब बेकार है
बेटियां हर किसी के नसीब में कहां होती है, भगवान को जो घर पसंद आए बस वहां होती है
नर से भारी नारी
नारी के बिना पुरुष अधूरा है, नारी से ही घर पूरा है
औरत का जितना सम्मान होगा दुनिया उतनी ही खूबसूरत होगी
महिलाएं अब आगे बढ़ रही हैं हर कुरीतियों से लड़ रहे हैं
नहीं सहना है अत्याचार, महिला सशक्तिकरण का यही है मुख्य विचार
महिला अबला नहीं सबला है, जीवन कैसे जीना है यह उसका फैसला है
महिलाओं को सशक्त करना है, मानवता में नया रंग भरना है
महिलाएं हैं देश की तरक्की का आधार, उनके प्रति बदलो अपने विचार
महिला शक्ति का परचम दिखाना है, महिलाओं को आगे बढ़ाना है
महिलाओं ने ठाना है, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना है
जब महिला में शक्ति होगी, तभी राष्ट्र की उन्नति होगी
मर्द नहीं है वह जो महिला पर हाथ उठाएं, जो नारी को सशक्त करें वही मर्द कहलाए
सशक्त महिला होगी तो सशक्त परिवार होगा, अन्यथा चारों ओर से हाहाकार होगा
महिला सशक्तिकरण का नारा है, समाज को तरक्की के मार्ग पर लाना है
महिलाओं की शक्ति को कम मत समझो, इनकी शक्ति को भी वहम मत समझो
महिला है समाज का आईना, इसका जीवन पूरी करता सबकी कामना
आओ मिलकर करें उन्हें नमन, जिन्होंने दिया मानवता को जीवन

नारी सशक्तिकरण पर भाषण। 

(Nari Sashaktikaran Par Speech)

यह मेरे लिए खुशी का मौका है कि मुझे आप सभी के सामने बोलने का मौका मिला। सबसे पहले मेरे सभी अध्यापकों, प्यारे दोस्तों को मेरा प्रणाम. जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि आज महिला दिवस है और हम सब यहां महिला दिवस (Women’s Day) मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। भारत में लिंग के आधार पर भेदभाव अभी भी जारी है।

हमारा समाज आज भी लड़का और लड़की में भेदभाव करने की सोच से ऊपर नहीं उठ पाया है। लेकिन इस देश के विकास के लिए हमें सबसे पहले इस भेदभाव को मिटाना होगा।

लैंगिक समानता लाने के लिए भारत में सबसे पहले महिला सशक्तिकरण बहुत आवश्यक है। जब महिला सशक्त होगी तो वह घर के कामकाज से उभर कर अपने लिए भी जिंदगी जीना सीखेगी और देश की आर्थिक, सामाजिक स्थिति को सुधारने में अपना योगदान दे पाएंगे।

महिलाएं देश की आधी शक्ति है जब यह आदिशक्ति पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी तो वह दिन दूर नहीं होगा जब भारत देश भी विकसित देशों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवाएगा।

नारी सशक्तिकरण के कई उपाय हैं. हमारी सरकार ने महिलाओं के लिए बहुत से कानून बनाए हैं। देश में बहुत से ऐसे संगठन है जो नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) पर काम कर रहे हैं। आजकल महिलाओं को शिक्षा के लिए घर से बाहर भी जाने दिया जा रहा है। शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण करना सबसे आसान है अगर महिला शिक्षित होगी तो सशक्तिकरण को और अच्छे से समझ पाएगी।

लेकिन भारतीय पुरुषों के लिए यह आवश्यक है कि वह एक महिला की शक्ति को समझें। किसी भी पुरुष को यह नहीं सोचना चाहिए कि महिला घर में परिवार के कामकाज के लिए बनी है साथ ही महिलाओं को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा जिससे वह एक बेहतर कैरियर बना सके।

धन्यवाद!

भारत में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए लगातार सरकार और कुछ संगठनों के द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को उनके अधिकार से अवगत कराने के लिए देश में हर साल 8 मार्च को महिला दिवस (women’s day) भी मनाया जाता है।

लेकिन भारतीय समाज में सच में महिला सशक्तिकरण लाने के लिए उनके खिलाफ बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना होगा और उन्हें हटाना होगा जो महिलाओं के विकास में बाधा उत्पन्न कर रही है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि हमें महिलाओं के खिलाफ लोगों की पुरानी सोच को बदलना होगा। अगर इस देश की तरक्की में महिला और पुरुष की बराबर की भागीदारी होगी तो वह दिन दूर नहीं होगा जब भारत विकासशील से विकसित देश बन जाएगा।

हमारा यह लेख यहीं समाप्त होता है। उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आप महिला सशक्तिकरण (Mahila Sashaktikaran) से जुड़े सभी पहलुओं को समझ गए होंगे। आपको यह लेख कैसा लगा? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

 

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