1. Mindfulness

Sant Rahim Ke Dohe – संत रहीम दास के लोकप्रिय दोहे, हिंदी में।

संत रहीम दास के सबसे दिलचस्प दोहे जो आपको ज़िन्दगी जीने का मर्म सिखाते है। पढ़ें सबसे सटीक और सरल अर्थों के साथ और इनसे प्रेरणा लें।

आज हम आपको ऐसी शख्सियत के बारे में बताएँगे जो मुग़ल काल में बादशाह अकबर के समय अपनी कविताओं से सबको दंग कर देते थे। जिनकी वाणी चाय में शक्कर जैसी थी, जो कम मात्रा में डालने पर भी चाय को मिठास से भर देती है।

अब्दुल रहीम खान यानि रहीम दास, जी हाँ, वही रहीम दास (Sant Rahim Das) जिनके दोहे बहुत प्रसिद्द है। सांप्रदायिक सदभाव और सभी धर्मो को सम्मान देने वाले रहीम बादशाह अकबर के वफादार बैरम खाँ के पुत्र थे, और उनकी माँ का नाम सुल्ताना बेगम था।

Rahim Das जब पैदा हुए थे तब बैरम खाँ की उम्र लगभग 60 वर्ष हो चुकी थी। कलम और तलवार दोनों के धनि रहीम दास मानव प्रेम में विश्वास रखते थे।

तो दोस्तों, दिल थाम कर बैठे क्युकी आज हम आपको संत रहीम दास के दोहे अर्थ सहित बताने वाले है।

संत रहीम दास के दोहे अर्थ सहित

(Sant Rahim Das Ke Dohe With Meaning In Hindi)

संत रहीम दास कहते है की प्रेम का धागा बड़ा ही नाज़ुक होता है, इसे कभी टूटने ना दो क्युकी दुबारा इसका जुड़ना कठिन है। यदि दोबारा जोड़ने के कोशिश भी की जाती है उसमे गाँठ पड जाती है।

रहीम दस कहते है की पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते और समुंदर अपना पानी खुद नहीं पीते। इसी तरह एक अच्छा इंसान दूसरों के लिए संपत्ति और ज़िन्दगी खर्च करता है।

गिरे हुए इंसानो से ना दोस्ती अच्छी ना दुश्मनी। जैसे कुत्ता चाहे आपको काटे या आपको चाटे, दोनों ही नापसंद होता है।

एक को साधते है तो दूसरे भी सधते है, सभी को साधने की ज़रूरत नहीं। यदि आप पेड़ के मूल को पानी से सींचते तो फूल और फल सभी को पानी प्राप्त होता है, उन्हें अलग-अलग सींचने की ज़रूरत नहीं।

कुछ दिन की संकट कोई बुरी चीज़ नहीं क्युकी संकट समय में आपको कौन अपना है और कौन पराया है यह समझ आजाता है।

जब बड़े आये तब छोटो के सामने बड़ो को तर्जी नहीं देनी चाहिए क्युकी जो काम छोटो का होता है उसे बड़े नहीं कर सकते। अगर काम सुई का हो तो वहा तलवार काम नहीं आती।

रहीम दास कहते है के मन का दुःख अपने मन में ही रखो तो बेहतर है। तुम्हारा दुःख सुनकर दूसरे इठलाते ज़रूर है पर दुःख बांटकर काम करने वाला कोई नहीं होता।

रहीम कहते है की अगर आपका की अपना रूठ जाए तो उसे सौ बार मनाइये। मोतियों के माला अगर टूट जाए तो उन मोतियों को बार-बार धागे में पिरो देना चाहिए।

रहीम कहते है की सही समय आने पर पेड़ पर फल आते है और निश्चित समय पर वह पेड़ झड़ भी जाता है। हमेशा एक जैसा समय नहीं रहता तो दुःख के समय क्यों पछतावा करना।

रहीम दास कहते है की बात अगर बिगड़ जाती है तो उसे बनाना मुश्किल काम है। एक बार अगर दूध फट जाए तो उसे मथ कर मख्खन नहीं बनाया जा सकता।

रहीम कहते है की इस शरीर पर जो भी गुज़रे हमें वो सहन करना चाहिए। जैसे इस धरती पर सर्दी, गर्मी और बारिश पड़ती है फिर भी वो उसे सहन करती है उसी तरह हमें अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों को सहन करना चाहिए।

रहीम दास कहते है की प्रेम की गली बहुत ही फिसलन से भरी है, यहाँ चींटी भी फिसल जाये। हम लोग बैल लादकर निकल पड़े है (अहंकार अपने सर पर लादकर कोई प्रेम के मार्ग नहीं चल सकता, वो ज़रूर फिसलेगा।

रहीम कहते है की सच्चा दोस्त वही है जो मुसीबत के समय काम आये, जो मुसीबत में साथ छोड़ जाए वह दोस्त कैसा। मख्खन मथते-मथते रहा जाता है पर मठ्ठा दही का साथ छोड़ देता है।

रहीम दास कहते है की ऐसी जगह कभी ना जाओ जहा लोग छल-कपट करें। हम तो कुए से ढेकुली द्वारा पानी खींचकर अपने खेत सींचते है।

रहीम कहते है की बड़े को छोटा कहने से उसका बड़प्पन काम नहीं हो जाता, जैसे गिरधर को मुरलीधर कहने से उनकी महिमा में कोई कमी नहीं आती।

रहीम कहते है की कौआ और कोयल दोनों रंग में एक सामान होते है पर जब वो बोलते है तब उनकी पहचान होती है। जब वसंत ऋतु आती है तब कोयल की मधुर आवाज़ से दोनों के बिच का अंतर पता चलता है।

रहीम कहते है की वो लोग धन्य है जो दूसरों के लिए उपकारी है। महेंदी बाटने वाले के तन पर भी उसका रंग चढ़ जाता है जब वो दुसरो को बाटने जाता है।

उम्र में बड़े लोगो को क्षमा करने वाला स्वाभाव शोभा देता है और छोटो को बदमाशी। छोटे अगर बदमाशी करते है तो बड़ो को उन्हें माफ़ कर देना चाहिए। छोटो की बदमाशी नुकसान देय नहीं होती जैसे कीड़ा अगर लात भी मारे तो कोई नुकसान नहीं।

रहीम कहते है है की मुसबित के समय सभी ईश्वर को याद करते है पर सुख में कोई उन्हें याद नहीं करता। यदि सुख के समय ईश्वर को याद रखें तो दुःख आएगा ही नहीं।

रहीम दास कहते है की खैर, खून, खांसी, ख़ुशी, दुश्मनी, दोस्ती और शराब का नशा छुपाने से नहीं छुपता, सारे जहाँ को पता चल ही जाता है।

दुनिया में जब लोग तरक्की पर होते है तो वे बहुत इतराते है। शतरंज में जब प्यादा फ़र्ज़ी बन जाता है तब वो टेडी चाल चलने लगता है।

जो लोग दुनिया में ज़्यादा लालच नहीं रखते वो राजाओ के भी राजा है। ऐसे लोगो को कोई चिंता नहीं होती और वे दुनिया से बेपरवा होते है।

रहीम कहते है की जो लोग गरीबों का साथ देते है वो असल में बड़े लोग है। जैसे सुदामा कहते है की कृष्णा की दोस्ती भी एक साधना है।

रहीम दास कहते है की दीपक और कुपुत्र एक समान है, दोनों पहले तो उजाला करते है पर बढ़ने पर अँधेरा होजाता है।

जो इंसान दूसरों से मांगने जाते है वो मरे हुए है पर उनसे पहले वो लोग मरे हुए है जो मुँह से कुछ नहीं बोलते।

रहीम कहते है की खजूर का पेड़ बड़ा होकर भी किसी काम का नहीं। वह पेड़ ना तो पंछियों को चाव दे पाता है और उसके फल भी दूर दिखाई पड़ते है।

जब बुरे दिन आये तो उन्हें धैर्यता पूर्वक सेह लेना चाहिए क्युकी अच्छी दिन आने पर बात बनते देर नहीं लगती।

अपने अंदर की इर्षा और अहंकार छोड़कर इस तरह बात करनी चाहिए की जब आप बोले तो सुनने वाले को और आपको, दोनों को अच्छा महसूस हो।

रहीम कहते है की मन, मोती, फूल, दूध और रस ये सब जब तक अपनी असली स्थिति में रहते है तब तक वे सहज रहते है। यदि ये फैट जाए तो इन्हे दोबारा सामान्य स्थिति में लाना बड़ा ही कठिन है।

इस दोहे में रहीम पानी शब्द का उपयोग विनम्रता के लिए कर रहे है। हमेशा विनम्र स्वाभाव अपना चाहिए क्युकी पानी के बिना आटा नरम नहीं हो सकता, मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता और विनम्रता के बिना मानव का कोई मूल्य नहीं।

बारिश के मौसम में कोयल और रहीम ने मौन धारण कर लिया। बारिश में तो मेंढक ही बोलते है जिनका कोई मूल्य नहीं, इसका मतलब कुछ इसे मौके होते है जहा गुणवान को चुप रहना चाहिए।

तो दोस्तों, यह थे रहीम दास के दोहे (Rahim Das Ke Dohe) जो हमें हमेशा से प्रेरित करते आये है। यह कुछ प्रसिद्ध संत रहीम के दोहे है जो हमने आपको अर्थ सहित बताये (Rahim Ke Dohe With Meaning).

रहीम के दोहे हमें अपने जीवन में उतार कर इसपर अमल करना चाहिए। आपको हमारा ये लेख कैसा लगा ये हमें Comment में ज़रूर बताए और इसे अपने दोस्तों से ज़रूर Share करें।

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Comments to: Sant Rahim Ke Dohe – संत रहीम दास के लोकप्रिय दोहे, हिंदी में।
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    August 11, 2020

    nice line dhoa

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