हर किसी के मन में यह सवाल होता है की तारे क्या है, ब्रह्माण्ड कैसा है, धरती बाहर की दुनिया कैसी है और सभी लोग जानना चाहते है की इन बादलों के पीछे क्या है, क्या अंतरिक्ष में भी कोई रहता है या क्या वहां पर भी हम जीवन व्यतीत कर सकते है।

हर कोई Space के बारे में जानने को इच्छुक है। बढ़ती टेक्नोलॉजी और रोज नए-नए प्रयोगों से प्राप्त होने वाली अंतरिक्ष की जानकारी हमे इस बारे में जानने के लिए और अधिक उत्सुक बनाती है। हमारे इसी तरह के कई सवालों के जवाब को खोजने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा एक संस्थान की स्थापना की गयी जिसका नाम NASA है।

हमारे देश में भी इस तरह के कार्यो को अंजाम देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ISRO (इसरो) की स्थापना की गयी है। इन दोनों का ही कार्य Space से जुड़े कई सवालों के जवाब के बारे में जानना और Space में होने वाली घटनाओं के बारे में जानना है। आपने बहुत बार इन संस्थानों के बारे में समाचार पत्रों में पढ़ा होगा या सुना होगा। आज हम आपको हमारी इस पोस्ट के माध्यम से NASA Ke Baare Mein Jankari उपलब्ध करवाने जा रहे है।

NASA Kya Hai

NASA Kya Hai

NASA संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्र शाखा है, इसका गठन राष्ट्रीय वैमानिकी और अंतरिक्ष वैमानिकी को ध्यान में रखकर 19 जुलाई 1958 को इसकी पूर्व अधिकारी संस्था National Advisory Committee For Aeronautics के स्थान पर किया गया था। NASA का मुख्य कार्य अंतरिक्ष कार्यक्रमों और Aeronautics (वैमानिकी) के बारे में रिसर्च करना है।

NASA Full Form – National Aeronautics And Space Administration है।

फ़रवरी 2006 से NASA का लक्ष्य भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक खोज जैसे एरोनॉटिक्स और एयरोस्पेस को बढ़ाना है। 14 सितम्बर 2011 को नासा ने घोषणा की है कि, उन्होंने एक नये स्पेस डिज़ाइन सिस्टम का चुनाव किया है, जिससे अंतरिक्ष यात्री स्पेस में और अधिक दूरी तक सफ़र करने में सक्षम हो जायेंगे।

हिंदी में नासा का फुल फॉर्म – राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन है।

NASA की स्थापना के बाद अमेरिका में अंतरिक्ष की ज्यादातर खोज NASA के नेतृत्व में ही हुई है, जिसके अंतर्गत अपोलो यान का चाँद पर उतरना, स्कायलैब स्टेशन और अंतरिक्ष शटल जैसे बहुत से बड़े-बड़े कार्य शामिल है।

वर्तमान समय में NASA Ke Chairman या NASA Ke Adhyaksh – Jim Bridenstine है।

वर्तमान में नासा, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को समर्थन दे रहा है, इसके साथ ही वह Orion Multipurpose-crew Vehicle, The Space Launch System और Commercial Crew Vehicle के निर्माण और विकास में भी अपना सहयोग देते हुए नज़र आ रहा है।

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NASA Ki Sthapna

NASA दुनिया की सबसे बड़ी और सफलतम अंतरिक्ष एजेंसी मानी जाती है। NASA ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़े से बड़े मुकाम को हासिल किया है, फिर भले ही वो चंद्रमा पर जाने की बात हो या मंगल पर NASA ने अंतरिक्ष के बड़े से बड़े ग्रहों और उपग्रहों पर जाकर अपनी सफलता को स्थापित करना। NASA Ki Khoj का पूरी दुनिया में लोहा मनवाया है।

जानकारों का कहना है कि, NASA Ki Sthapna का विचार यूनाइटेड स्टेट को अंतरिक्ष के क्षेत्र में मिली लगातार बढ़त से आया। अपनी स्थापना के बाद ही NASA ने अपने पहले उपग्रह ‘Explore 1’ का भी सफल परीक्षण किया था।

NASA की स्थापना अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति Dwight D. Eisenhower द्वारा सन 1958 में की गयी थी। इसका मुख्यालय Washington DC में है, जिसमे लगभग 18000 कर्मचारी तथा वैज्ञानिक काम करते है तथा आपको यह जानकर हैरानी होगी और साथ ही गर्व भी होगा कि नासा में कार्य करने वालो में लगभग 36 प्रतिशत नासा के वैज्ञानिक भारतीय तथा भारतीय मूल से सम्बन्धित है।

NASA History In Hindi

अभी हमने आपको ऊपर नासा की स्थापना के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई। अब हम NASA History पर एक नजर डालते है। NASA की स्थापना के लिए 29 जुलाई 1958 को National Aeronautic Space एक्ट तैयार किया गया, जिस पर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति Dwight D. Eisenhower ने हस्ताक्षर कर पारित किया।

NASA की स्थापना से पहले यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका में होने वाली सभी अंतरिक्ष कार्यक्रमों को National Advisory Committee For Aeronautics (NACA) द्वारा संचालित किया जाता था। NASA की स्थापना के बाद NACA को बंद करके NASA में ही शामिल कर दिया गया।

NACA के विलय के साथ इसमें कार्य करने वाले 8000 कर्मचारी, 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक बजट, एरोनॉटिकल प्रयोगशाला, एरोनॉटिक्स प्रयोगशाला और लुइस फ्लाइट प्रनोदय प्रयोगशाला जैसी तीन मुख्य रिसर्च प्रयोगशालाएँ और दो छोटे परीक्षण प्रयोगशाला भी NASA में विलय हो गए।

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What Does NASA Do

जैसा हम आपको बता चुके है, नासा रोज़ाना अंतरिक्ष से सम्बन्धित नए-नए प्रयोगों और खोजों को अंजाम देता है। नासा की स्थापना से आज तक नासा ने बहुत से बड़े-बड़े प्रयोगों को अंजाम दिया है। जिनके बारे में दुनिया ने कभी सोचा भी नहीं था, उन असंभव को कामों को नासा ने संभव कर दिखाया है। नीचे कुछ मुख्य NASA Ke Prayog दर्शाये गए है, जिन्हे पढ़ कर आप दाँतों तले ऊँगली दबा लेंगे।

Pioneer

Pioneer 10 (1972) और Pioneer 11 (1973) में लॉन्च किए गए थे, यह सौर-मंडल के सबसे फोटोजेनिक गैस दिग्गज, बृहस्पति और शनि की यात्रा करने वाले पहले अंतरिक्ष यान थे। पायोनियर 10 सौर प्रणाली के क्षुद्रग्रह बेल्ट और मंगल तथा बृहस्पति के बीच की चट्टानों की परिक्रमा के क्षेत्र के मध्य यात्रा करने वाली पहली जांच थी। फिर इसके लॉन्च के लगभग डेढ़ साल बाद, इस अंतरिक्ष यान ने बृहस्पति ग्रह का पहला फ्लाईबाई बनाया। इसने ग्रेट रेड स्पॉट की भी आश्चर्यजनक नज़दीकी तस्वीरें लीं।

Pioneer 10 की लाँच के लगभग एक साल बाद, पायोनियर 11 ने बृहस्पति से ही उड़ान भरी और यह शनि पर चला गया, जहां इसने इस ग्रह के चारों ओर पहले से अज्ञात छोटे चंद्रमाओं की एक जोड़ी और एक नई अंगूठी की खोज की। अब इन दोनों ने डाटा भेजना बंद कर दिया है, तथा यह अपने सौर प्रणाली से परे अंतरिक्ष में यात्रा कर रहे है।

WMAP

सन 2001 में नासा द्वारा लॉन्च किया गया Wilkinson Microwave Anisotropy Probe (WMAP) भले ही ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन यह अभूतपूर्व सटीकता के साथ बिग बैंग से छोड़े गए विकिरण के तापमान को मापता है। इसने कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन में उतार-चढ़ाव को मैप करके, मनुष्य को ब्रह्मांड की प्रकृति और उत्पत्ति के बारे में कॉस्मोलॉजिकल सिद्धांतों की जानकारी हासिल करने में एक कदम आगे बढ़ा दिया है।

अन्य खुलासों के अनुसार, WMAP के डाटा ने ब्रह्मांड की उम्र के लिए अधिक सटीक अनुमान लगभग 13.7 बिलियन वर्ष बताया और इस बात की भी पुष्टि की कि ब्रह्मांड का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी नामक खराब चीजों से बना है।

Voyager

Pioneer के कुछ समय बाद नासा ने Voyager 1 और Voyager 2 को लॉन्च किया गया। इन्होने बृहस्पति और शनि के बारे में कई महत्वपूर्ण खोज की, जिसमें बृहस्पति के चारों ओर के छल्ले और बृहस्पति के चंद्रमा पर आयोवा की उपस्थिति आदि शामिल है। Voyager ने यूरेनस के लिए भी दुनिया की सबसे पहली उड़ान भरी। इसने वहां पर 10 नए चंद्रमाओं की खोज की और नेप्च्यून की भी जानकारियाँ एकत्रित की, जहां यह पाया गया कि नेप्च्यून वास्तव में खगोलविदों के अनुमान की तुलना में बहुत ही कम वजन का है।

दोनों Voyager Crafts में कम से कम 2025 तक रेडियो सिग्नल प्रसारित करने की पर्याप्त शक्ति है, और अब यह सौर प्रणाली के बहुत किनारे और इंटरस्टेलर स्पेस की शुरुआत का पता लगा रहे हैं। Voyager 2 वर्तमान में पृथ्वी से सबसे दूर जाने वाली मानव निर्मित वस्तु है, जो वर्तमान में पृथ्वी से सूर्य की दूरी के सौ गुना से भी अधिक और पृथ्वी से प्लूटो की दोगुने से भी अधिक दूरी पर है।

Hubble

नासा के सभी अंतरिक्ष यानों में हबल स्पेस टेलीस्कोप को दुनिया भर में सबसे अधिक ख्याति और मान्यता प्राप्त है। इसकी तस्वीरों ने हर रोज लोगों को खुद को ब्रह्मांड को और अधिक जानने के लिए विवश कर दिया है। इस वेधशाला ने मौलिक रूप से विज्ञान को भी बदल दिया है और इसकी मदद से खगोलीय मुद्दों पर बहुत अधिक गणना की जा सकती है। नासा ने आकाश में पृथ्वी के अंत में Turbulent Atmosphere से परे एक ऑप्टिकल टेलीस्कोप को भेजकर एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जो सितारों, ग्रहों, नेबुला और आकाशगंगाओं को हमारे सामने पूरी तरह से विस्तृत रूप में प्रकट कर सकता है।

Spirit & Opportunity

सिर्फ 90 दिनों के मिशन के लिए बने, इन मार्स रोवर्स ने खुद को विज्ञान की दुनिया में बहुत आगे निकाल दिया है, और यह अभी भी लैंडिंग के पांच साल से अधिक समय बाद भी लाल ग्रह पर भाग रहे है। Spirit & Opportunity नाम के जुड़वाँ मार्स एक्सप्लोरेशन रोवर्स, जनवरी 2004 में इस ग्रह के अपोजिट साइड पर उतरे और तब से ही वे मंगल की सभी सतह पर यात्रा करते हुए क्रेटरों तथा पहाड़ियों में बेरोजगार घूम रहे है। उन रोवर्स की प्रमुख खोजों में इस बात का प्रमाण प्राप्त हुआ है कि किसी समय मंगल की सतह पर तरल पानी हुआ करता था।

Apollo

अब हम बात करेंगे नासा के सबसे बेहतरीन अंतरिक्ष विज्ञान मिशन की और गर्व की बात है कि इस मिशन का श्रेय मशीन को नहीं बल्कि मनुष्य को जाता है। इस मिशन में मानव इतिहास के लिए न केवल इंसान को चंद्रमा पर भेजा गया था, बल्कि अपोलो यात्रा पृथ्वी पर किसी भी आकाशीय सामान मनुष्य द्वारा लाने के लिए पहली बार प्रयोग की गयी थी। अपोलो ने चंद्रमा के बारे में हमारी वैज्ञानिक समझ को बहुत ही ज्यादा बढ़ा दिया है।

अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा एकत्रित किये गए डाटा से हमे यह जानने में मदद मिली कि चंद्रमा कितना पुराना है, इसका भार कितना है, इससे क्या बना है और यह सब कैसे शुरू हुआ होगा। अपोलो 11 का चालक दल जिन्होंने पहला लैंडिंग किया उसके मुख्य कमांडर Neil Armstrong, कमांड मॉड्यूल पायलट Michael Collins, और लूनर मॉड्यूल पायलट Buzz Aldrin थे।

Conclusion:

आज नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी एक अलग ही पहचान बना चुका है। नासा विश्व की अन्य स्पेस एजेंसियों के साथ मिलकर भी कार्य करता है, जिनमे यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी, इसरो आदि प्रमुख है। आज हमने आपको NASA Ke Bare Mein कम शब्दों मे परन्तु लगभग सभी मुख्य जानकारियाँ प्रदान की है यदि आपको नासा की जानकारी पसंद आयी है तो इसे शेयर करना न भूले, धन्यवाद!

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