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Hindi Patra Lekhan – पत्र लेखन | Format | प्रकार | उदाहरण।

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पत्र लेखन एक कला है जिसके माध्यम से व्यक्ति को लिखित में अपने मन के विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का मौका मिलता है। Hindi Patra Lekhan ऐसा होना चाहिए, जिसमें पाठक को लेखक के पत्र लिखने का उद्देश्य अच्छे से समझ में आये। पत्र लेखन में एक प्रेषक (Sender) और एक प्रापक (Receiver/ Recipient) होता है। पत्र लेखन हिंदी में दो प्रकार से किया जाता है; औपचारिक पत्र लेखन और अनौपचारिक पत्र लेखन।

आज के इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में भी Patra Lekhan In Hindi की एक अहम् भूमिका रहती है। सरकारी कार्यों से लेकर निजी व्यवसायिक कार्यों में पत्र लेखन को आवश्यक माना जाता है। अच्छे पत्र लेखन से आप किसी अपरिचित को भी अपने विचार सरलता से समझा सकते है और अपनी बात मनवा सकते है।

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लेटर या पत्र लेखन की महत्वता को समझते हुए आज हम ये ब्लॉग लेकर आये है। इस ब्लॉग में आपको पत्र लेखन क्या है, पत्र लेखन कैसे लिखा जाता है, औपचारिक पत्र कैसे लिखते है, अनौपचारिक पत्र के आज के ज़माने में क्या मायने है, आदि महत्वपूर्ण जानकारी उदाहरण सहित बताई है, जिससे आप हिंदी पत्र लेखन (Hindi Letter Writing) की कला में निपुणता हासिल कर सके और पत्र के पाठक पर अच्छा प्रभाव डाल सके।

Hindi-Patra-Lekhan

पत्र लेखन क्या होता है?

Letter या पत्र लेखन एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने विचारों को निसंकोच रूप से लिख कर प्रस्तुत कर सकता है। पत्र लिख कर भेजने वाले को प्रेषक कहा जाता है, और पत्र पाने वाले को प्रापक कहा जाता है। पत्र लेखन का प्रयोग बहुत लंबे समय से किया जा रहा है। सरकारी, निजी अथवा व्यापार संबधी कार्यों में Hindi Patra Lekhan का विशेष महत्व है।

दूर रह रहे परिजनों, परिवारवालों, मित्रों इत्यादि से संबंध साधने हेतु, सलाह देने व संदेश भेजने के लिए भी पत्रलेखन का प्रयोग किया जाता है। पत्र को लिखते समय उद्देश्य का ध्यान रखते हुए, संक्षेप में स्पष्टता से लिखा जाता है। Patra Lekhan Hindi Mein दिनांक, संबोधन और अभिवादन का भी ख़ास महत्व होता है।

 

आइये अब जानते है Letter Writing in Hindi के लिए क्या-क्या जानकारी होना आवश्यक है।

क्या आपने इसे पढ़ा: Handwriting Kaise Sudhare – English Handwriting सुधारने के आसान तरीके!

पत्र लेखन के लिए आवश्यक जानकारी

एक पत्र का महत्व तभी होता है जब उसे एक आदर्श पत्र की तरह लिखा गया हो। एक आदर्श पत्र प्रभावशाली होता है, जिससे पत्र पाने वाले को पत्र भेजने वाले का उद्देश्य सही तरीके से समझ आ सके, और प्रापक पत्र में लिखी गयी बातों पर संज्ञान ले सके। आइये जानते है Patra Lekhan के लिए किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है-

  • पत्र लिखते समय सरल भाषा का उपयोग करना आवश्यक होता है, जिससे पत्र का पाठक आसानी से आपकी बात समझ पाए।
  • लेटर या पत्र का उद्देश्य पूर्ण तरीके से लिखा जाना चाहिए। पत्र लिखते वक़्त उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सीधी और स्पष्ट भाषा में पत्र लिखना चाहिए।
  • पत्र को संक्षेप में लिखा जाना आवश्यक होता है (खासकर Aupcharik Patra In Hindi लिखते समय)। इधर-उधर की बात करने से बचें, ताकि पढने वाले का ध्यान आपके उद्देश्य पर ही केन्द्रित रहे।
  • लेटर लिखते समय भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पत्र की भाषा को विनम्र और शिष्ट होना चाहिए, जिससे प्रापक पर पत्र लिखने वाले का अच्छा प्रभाव पड़े। Hindi Letter लिखते समय कृपया, धन्यवाद, जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • पत्र दिखने में साफ़ होना चाहिए। उसमें किसी प्रकार की काट-पीट नहीं होनी चाहिए, ऐसा होने से पाठक के मन में पत्र के उद्देश्य के प्रति संशेय पैदा हो सकता है। अथवा यह दिखने में भी अच्छा नहीं लगता है।
  • लेटर की शुरुआत पढ़ने वाले व्यक्ति के स्वभाव, भावनाओं एवं आत्मसम्मान को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। महोदय, आदरणीय, प्रिय जैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।
  • पत्र का मौलिक होना आवश्यक है। पत्र लिखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पत्र में पत्र पढने वाले के विषय में अधिक लिखा जाए। ऐसा करने से पाठक के मन में पत्र पढने में रुचि उत्पन होती है।

पत्र लेखन के प्रकार

Patra Lekhan Hindi के मुख्य रूप से दो प्रकार होते है-

  1. औपचारिक पत्र (Formal Letter)
  2. अनौपचारिक पत्र (Informal Letter)

आइये अब विस्तार से पत्र लिखने के इन दोनों प्रकारों को समझते हैं और साथ ही जानते हैं Hindi Patra Lekhan Format के बारे में.

1. औपचारिक पत्र

औपचारिक पत्र में उन पत्रों को शामिल किया जाता है जो पदाधिकारियों, संपादक, प्रधानाचार्य, व्यापारियों, ग्राहक, पुस्तक विक्रेता, आदि को लिखे जाते है, अर्थात Aupcharik Patra Lekhan In Hindi में पत्र उन लोगों को लिखे जाते हैं जिनसे हमारा कोई निजी या पारिवारिक संबंध नहीं होता। औपचारिक पत्र लिखते समय भाषा और पत्र के प्रारूप (Letter Format In Hindi) को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक होता है।

Formal Letter In Hindi (औपचारिक पत्र) में निम्नलिखित पत्र भी आते है –

#1. प्रार्थना पत्र: विद्यालय से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या के लिए प्रार्थना पत्र लिखा जाता है। निम्न स्तिथियों में प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक को प्रार्थना पत्र लिखा जाता है-

  • अवकाश
  • शुल्क मुक्ति
  • आर्थिक सहायता
  • छात्रवृत्ति (Scholarship), आदि।

#2. आवेदन पत्र: किसी कंपनी, संस्थान, या औद्योगिक विभाग में नौकरी प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र लिखा जाता है।

#3. बधाई पत्र: औपचारिक बधाई पत्र वो पत्र होता है जिसमें किसी अधिकारी को उसकी सफलता की उपलब्धि के लिए बधाई दी जाती है.

#4. शुभकामना पत्र: जो पत्र किसी अधिकारी को शुभकामनाएं देने के उद्देश्य से लिखा जाता है उसे शुभकामना पत्र कहते हैं।

#5. व्यावसायिक पत्र: जो पत्र व्यापारिक प्रतिष्ठानों, प्रकाशकों अथवा पुस्तक विक्रेताओं आदि को लिखे जाते हैं उन्हें व्यावसायिक पत्र कहते हैं। आसान भाषा में कहा जाये तो, व्यापर-संबंधी पत्रों को व्यवसायिक पत्र कहते हैं।

#6. शिकायती पत्र: जो पत्र किसी अधिकारी को समस्या प्रकट करने हेतु लिखा जाता है उसे शिकायती पत्र कहते है।

#7. धन्यवाद पत्र: किसी कार्यक्रम या विशेष उत्सव को सफल बनाने हेतु शुक्रियादा करने के लिए धन्यवाद पत्र लिखा जाता है।

#8. सांत्वना पत्र: यह पत्र किसी अधिकारी या उसके परिवार को शोक के अवसर पर सांत्वना प्रदान करने हेतु लिखा जाता है।

#9. संपादकीय पत्र: संपादकीय पत्र वो पत्र होते हैं जो संपादक (Editor) को लिखे जाते हैं। संपादकीय पत्र का उद्देश्य कोई जानकारी या समस्या संबंधित अधिकारी तक पहुँचाने के लिए, या अपने लिखे हुए लेख जैसे- कहानियां, कविताएँ समाचार पत्र (जैसे अख़बार) में छपवाने के लिए, लिखे जाते है।

 औपचारिक पत्र को मुख्य रूप से तीन भाग में बाँटा गया है – 
  • सामाजिक पत्र – सामाजिक पत्र के अंतर्गत मित्रों, संबंधियों को लिखे गए पत्र और निमंत्रण पत्र आते हैं।
  • व्यापारिक और व्यवसायिक पत्र – संपादकीय पत्र, प्रार्थना पत्र तथा कार्यालय संबंधी पत्र आदि व्यापारिक और व्यवसायिक पत्रों के अंतर्गत आते हैं।
  • सरकारी कार्यालय के लिए पत्र – इसमें वो पत्र आते हैं जो सरकारी कार्यालयों में एक विभाग से दूसरे विभाग को, एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी को लिखे जाते हैं। इन्हें आधिकारिक पत्र भी कहा जाता है।
 औपचारिक पत्र का प्रारूप के अंतर्गत आने वाले 7 अंग 

Aupcharik Patra Lekhan के निम्नलिखित सात मुख्य अंग होते हैं, इन्हें क्रमानुसार दिया गया है-

  1. प्रेषक का पता: सबसे पहले बाएं ओर से पत्र की शुरुआत करते हुए पत्र लिखने वाले का नाम और पता लिखा जाता है।
  2. दिनांक: प्रेषक के पते के नीचे जिस तारीख को पत्र लिखा गया है, वो तारिख लिखी जाती है।
  3. पत्र प्रापक का पदनाम (Designation) और पता: अब पत्र पाने वाले का पदनाम और पता लिखा जाता है।
  4. विषय: पत्र लिखने के उद्देश्य को संक्षेप में, केवल एक ही वाक्य में ‘विषय’ के अंतर्गत लिखा जाता है।
  5. संबोधन: विषय के बाद पत्र प्रापक को संबोधित करते हुए माननीय, महोदय, मान्यवर आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
  6. विषय-वस्तु: संबोधन के बाद विषय-वस्तु को आमतौर पर दो अनुच्छेदों में लिखा जाता है। पहले अनुच्छेद में समस्या के बारे में लिखा जाता है तथा दूसरे अनुच्छेद में आप प्रापक से उस समस्या के सन्दर्भ में क्या अपेक्षा रखते हैं, यह लिखना होता है।
  7. हस्ताक्षर और नाम: पत्र की समाप्ति पर पत्र लिखने वाले को अपने हस्ताक्षर करने होते हैं और उसके नीचे अपना नाम लिखना होता है।

Aupcharik Patra Format – औपचारिक पत्र के उदाहरण

औपचारिक पत्र: अपने क्षेत्र में सड़कों पर गड्ढों से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए दैनिक समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।

11/4, नवादा
उत्तम नगर,
दिल्ली
दिनांक: 07 जनवरी 2018

सेवा में,
संपादक महोदय,
नवभारत टाइम्स,
उत्तम नगर, दिल्ली

विषय- हमारे क्षेत्र में गड्ढों के कारण हो रही परेशानी।

महोदय,

मैं आपके लोकप्रिय दैनिक समाचार के माध्यम से सम्बंधित अधिकारीयों को सूचित करना चाहती हूँ कि सड़कों पर गड्ढे होने के कारण हमें अपने क्षेत्र में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, कुछ दिन पहले ही बारिश का मौसम शुरू हुआ है जिससे हमारी समस्याएं और बढ़ गयी हैं।

इस संकट का सामना सबसे अधिक आम लोगो को, दुकानदारों को और छात्रों को करना पड़ रहा है। गड्ढों के कारण गाड़ियों को निकालने में दिक्कत होती है, जिसकी वजह से मुख्य सड़क पर लम्बा जाम लगा रहता है। राहगीरों के लिए भी सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। गड्ढों से होने वाले हादसों की समस्या तो और भी अधिक गंभीर हो गयी है।

इसलिए मैं आपके अखबार की सहायता से सम्बंधित अधिकारियो का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहती हूँ। मुझे उम्मीद है कि आप हमारी मदद करने में सक्षम होंगे और जल्द से जल्द हमारी इस समस्या का समाधान निकालने का कार्य किया जाएगा। इस कार्य में आपके सहयोग के लिए मैं आपकी सदा आभारी रहूंगी।

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धन्यवाद
भवदीया
रिया वोहरा

औपचारिक पत्र: ग्यारहवीं कक्षा में विज्ञान विषय लेने के लिए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को आवेदन पत्र लिखिए।

सेवा में
प्रधानाचार्य जी
कमल मॉडल स्कूल
पुणे, महाराष्ट्र

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में दसवीं कक्षा का छात्र हूँ। मैंने इसी सत्र में बोर्ड परीक्षा दी है। मेरे परिवार में सभी लोग मेडिकल के क्षेत्र में कार्यरत हैं। मेरी भी विज्ञान विषय में रुचि है और मैं डॉक्टर बनना चाहता हूँ। विद्यालय में दसवीं की अर्धवार्षिक परीक्षा में मैंने 90% अंक प्राप्त किये हैं और विज्ञान विषय में 96% अंक प्राप्त किये हैं। मेरी आपसे प्रार्थना है कि मुझे 11वीं कक्षा में विज्ञान विषय लेने की अनुमति प्रदान करें जिससे मैं डॉक्टर बनने की ओर अग्रसर हो सकूँ।

आपकी अति कृपा होगी।
धन्यवाद्।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
कुलदीप
कक्षा 10
12 अप्रैल 2020

औपचारिक पत्र- प्रधानाचार्य को गणित अध्यापक के पद के लिए पत्र लिखिए।

ए-52
जनकपुरी पूर्व,
दिल्ली
दिनांक- 16 अगस्त, 20XX

प्रधानाचार्य
एवरेस्ट हाई स्कूल
छतरपुर
दिल्ली-110074

विषय- गणित अध्यापक के पद हेतु आवेदन पत्र।

महोदय,

आपके द्वारा ‘पंजाब केसरी’ में प्रकाशित विज्ञापन के प्रत्युत्तर में मैं गणित अध्यापक के पद हेतु अपना आवेदन-पत्र भेज रहा हूँ। मेरा व्यक्तिगत विवरण निम्नलिखित है: नाम- अंकुश कुमार, पिता जी का नाम: अनिल कुमार, जन्म तिथि- 6 मई 1986। शैक्षणिक योग्यताएं-

– मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से 10वीं की परीक्षा 2002 में 83% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।
– मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से 12वीं की परीक्षा 2004 में 87% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।
– दिल्ली विश्विद्यालय से बी.एस.सी. मैथ्स की परीक्षा 2007 में 85% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।
– मैंने जामिया मिलिया विश्वविध्यालय से एम.एस.सी. मैथ्स की परीक्षा 2009 में 84% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।

अनुभव: मैं पिछले 4 वर्षों से केन्द्रीय विद्यालय, द्वारका में गणित अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। महोदय, यदि उक्त पद पर कार्य करने का अवसर मुझे प्रदान करें, तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि निश्चित ही मैं आपकी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा और अपनी पूरी लगन व निष्ठा के साथ काम करूँगा।

धन्यवाद
भवदीय
अंकुश

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2. अनौपचारिक पत्र

अनौपचारिक पत्र में वो पत्र आते हैं जो सगे-संबंधी, रिश्तेदार, परिवार के लोगों, मित्रों आदि को लिखे जाते हैं। अर्थात इसके अंतर्गत वो पत्र आते हैं जिनका पत्र के लेखक से व्यक्तिगत या निजी संबंध होता है। अनौपचारिक पत्र का प्रयोग निमंत्रण देने, हालचाल जानने, सूचना देने, बधाई देने आदि के लिए किया जाता है। अनौपचारिक पत्र नियमों से बंधें नहीं होते, इसमें भाषा में ढील दी जाती है।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप (Informal Letter Format In Hindi)

  1. प्रेषक का पता
  2. दिनांक
  3. संबोधन: यदि अपने से बड़े को पत्र लिखा जा रहा है तो उनके संबोधन के लिए आदरणीय, पूजनीय, जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए और साथ में रिश्ते में वो आपके क्या लगते हैं, जैसे अगर पत्र पिता जी को लिखा जाना है तो उनके संबोधन में उनके नाम की बजाये पूजनीय पिता जी लिखा जायेगा। अथवा वैसे ही अपने से छोटे या अपने बराबर के व्यक्ति को पत्र लिखते वक़्त उनके नाम के साथ प्रिय, बंधुवर आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
  4. विषय-वस्तु: इसको अनुच्छेदों में लिखा जाता है, सर्वप्रथम हाल चाल पूछ कर फिर अपनी बात रखी जाती है।
  5. अभिवादन: विषय वस्तु की समाप्ति के बाद धन्यवाद कहा जाता है।
  6. प्रेषक का नाम अथवा हस्ताक्षर: अभिवादन के बाद अंत में तुम्हारा स्नेही, आपका पुत्र, आदि शब्दों का प्रयोग करते हुए प्रेषक का नाम और हस्ताक्षर किया जाता है।

Anopcharik Patra Format

Anopcharik Patra Lekhan में संबोधन के लिए आप नीचे दिए गये शब्दों का प्रयोग कर सकते है –

रिश्ता प्रशस्ति  अभिवादन समाप्ति
अपने से बड़े संबंधियों के लिए पूजनीय, आदरणीय, पूज्य, श्रद्धेय, आदि सादर प्रणाम, सदर नमस्कार, सदर चरणस्पर्श, आदि आपका आज्ञाकारी, आपका बेटा/ आपकी बेटी, आपका पोता/ आपकी पोती, आदि (रिश्ते के अनुसार)
अपने से छोटे या बराबर वाले लोगों के लिए प्यारे, प्रिय, चिरंजीव, आदि सदा खुश रहो, आशीर्वाद, सुखी रहो, मधुर स्मृतियाँ आदि तुम्हारा मित्र, तुम्हारा शुभचिंतक, तुम्हारा हितैषी, आदि

अनौपचारिक पत्र के प्रकार

अनौपचारिक पत्रों के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के पत्र आते है-

  • निमंत्रण पत्र
  • शुभकामना पत्र
  • बधाई पत्र
  • विशेष अवसरों पर लिखे गये पत्र
  • कोई सलाह आदि देने के लिए पत्र
  • किसी प्रकार की जानकारी देने के लिए
  • सांत्वना पत्र

अनौपचारिक पत्र के उदाहरण

अनौपचारिक पत्र- जन्मदिन पर उपहार भेजने के लिए नाना जी को धन्यवाद देते हुए पत्र लिखिए।

चांदनी चौंक
पुरानी दिल्ली
11/12/2021

आदरणीय नाना जी
सादर प्रणाम

अपने जन्मदिन पर आपके द्वारा भेजी गई कहानियों की किताब प्राप्त हुई। मुझे आपका यह उपहार बहुत अच्छा और उपयोगी लगा। मैं बहुत लंबे समय से एक अच्छी कहानियों की किताब पढ़ना चाह रहा था, और उसकी खोज कर रहा था, जाने कैसे आपने मेरे मन की बात जान ली।
आपकी किताब पा कर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं इसे पढने के लिए बहुत उत्साहित हूँ। मेरे बारे में इतना सोचने के लिए और मुझे मेरी पसंद का उपहार देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

आदरणीय नानी जी को मेरा प्रणाम कहियेगा।

आपका नाती
शुभम

अनौपचारिक पत्र- परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर मित्र को सहानुभूति पत्र लिखे।

राँची, झारखंड
दिनांक – 6/4/20**

प्रिय मित्र केशव,

कल तुम्हारी बहन का पत्र प्राप्त हुआ। उसने बताया की तुम अपने 12वीं कक्षा के परिणाम से बहुत चिंतित हो। मित्र तुम्हारी परीक्षा का परिणाम जानकार मुझे भी बहुत दुःख हुआ। मैं समझ सकता हूँ की तुम कैसा महसूस कर रहे होंगे।

केशव मैं जानता हूँ कि तुम्हें पढने का कितना शौक है, तुमने आजतक कभी अपना समय व्यर्थ नहीं किया। इसलिए तुम इस असफलता का दोष खुद को मत दो। मैं जानता हूँ तुम्हारी 12वीं की परीक्षाओं के दौरान तुमने कितनी कठिनाइयों का सामना किया है। तुम्हारा पूरा परिवार कोरोना से जंग लड़ रह था, तुम्हारी माता जी की असामयिक मृत्यु हो गयी थी, तुम्हारे पिता जी का स्वास्थ्य भी बेहद ख़राब हो गया था। अपनी परीक्षाओं के दौरान तुमने पूरे घर को संभाला है। हम सब को तुम पर गर्व है मित्र।

केशव सुख और दुःख जीवन में आते रहते हैं, तुम्हें इनसे परेशान होने की ज़रूरत नहीं। तुम्हें बस थोड़ा साहस और धैर्य रखना है और हार नहीं माननी है।

मुझे तुम पर पूरा भरोसा है कि तुम इस असफलता से निराश होने के बजाये धैर्य से काम लोगे और अपनी पढाई जारी रखोगे। मित्र सदैव याद रखना हम दूर ज़रूर है मगर तुम अकेले कभी नहीं हो।
तुम अपना ख्याल रखना।

तुम्हारा प्यारा मित्र,
प्रेम,
चेन्नई

अनौपचारिक पत्र- अपने छोटे भाई को समय का सदुपयोग करने की सलाह देते हुए पत्र लिखिए।

75, सुजाता नगर,
फरीदाबाद
दिनांक- 07-08-20XX

प्रिय गन्नू,

हम सब यहाँ कुशल मंगल हैं। आशा करता हूँ तुम भी वहां सकुशल होंगे। होस्टल में तुम्हारा मन लग गया होगा और तुम्हारा दिनचर्या भी नियमित चल रहा होगा। प्रिये गन्नू तुम बहुत भाग्यशाली हो कि तुम्हें बाहर रहकर पढने का और अपना जीवन संवारने का मौका मिला है।

यहाँ माँ को तुम्हारी चिंता लगी रहती है इसलिए उन्होंने मुझे तुमको ये पत्र लिखने का आग्रह किया। गन्नू मैं जानता हूँ तुम समझदार हो, समय का सदुपयोग करना जानते हो, परन्तु तुम्हारा मन थोडा चंचल है तुम आसानी से लोगों के बहकावे में आ जाते हो। तुम्हारी बड़ी बहन होने के नाते मैं तुम्हें ये कहना चाहती हूँ कि तुम इस समय का भरपूर सदुपयोग करना, खूब मन लगा कर पढाई करना, मगर सारा दिन किताब में मत उलझे रहना। कुछ देर बाहर टहलना, खेलना मस्ती करना। अपना दिनचर्या इस तरह से बनाना की उसमें अधिकतर समय तुम्हें पढने के लिए मिल सके।

आशा करती हूँ तुम मेरी बातों को समझकर अपने समय का उचित प्रकार से सदुपयोग करोगे तथा अपने दिनचर्या का उचित प्रकार पालन करके परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करोगे।

तुम्हारी बहन
दानिया

एक नज़र इस पर भी: शिक्षा का महत्व पर निबंध – Essay on Importance of Education

औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र में अंतर

औपचारिक पत्र  अनौपचारिक पत्र 
औपचारिक पत्र का प्रयोग सरकारी, निजी तथा व्यापारिक सूचनाओं और संदेशों के लिए किया जाता है। अनौपचारिक पत्र का प्रयोग परिवारवालों, रिश्तेदारों, मित्रों आदि का हालचाल पूछने या संदेश देने के लिए किया जाता है।
औपचारिक पत्रों में शिष्ट भाषा का प्रयोग आवश्यक होता है। अनौपचारिक पत्र की भाषा में थोड़ी ढिलाई होती है।
औपचारिक पत्र का व्यापारिक जगत में बहुत महत्व होता है। इन पत्र का व्यापारिक जगत में कोई महत्व नहीं होता।
यह पत्र लिखने के लिए विशेष औपचारिक उद्देश्य होना ज़रूरी होता है। इन पत्रों को लिखने के लिए किसी विशेष उद्देश्य की आवश्यकता नहीं होती।
औपचारिक पत्रों को संक्षेप में स्पष्टता से लिखा जाता है, जिससे पत्र प्रापक को उद्देश्य से संबंधित किसी प्रकार का संशय उत्पन्न न हो। अनौपचारिक पत्रों को भावनात्मक रूप से लिखा जाता है। यह पत्र प्रेम, सहानुभूति, हर्ष, उत्साह, आदि भावनाओं से परिपूर्ण होते है।

Conclusion

आज के इस पोस्ट में हमने आपको Hindi Me Patra Lekhan के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी। औपचारिक पत्र और अनौपचारिक पत्र क्या होता है, उनमें क्या अंतर होता है, उन्हें कैसे लिखा जाता है यानी Format Of Patra Lekhan In Hindi के बारे में हमने आपको उदाहरण सहित बताया। हमें उम्मीद है इस पोस्ट में दी गयी जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी।

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Riya Vohra

रिया वोहरा पढ़ने-लिखने की शौक़ीन है। इन्हें फैक्ट्स के आधार पर अपनी बात रखना पसंद है। इन्हें स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है और लोगों को अपनी कलम के माध्यम से जागरूक करना चाहती है।

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