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MS-DOS Kya Hai? MS-DOS Ke Kitne Versions Hai? – जानिए MS-DOS का इतिहास हिंदी में!

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हैलों दोस्तों ! Hindi Sahayta में आपका स्वागत है। आज हम आपको बताएँगे कि MS-DOS Kya Hai और ये कहाँ पर किस चीज़ में काम आता हैं। साथ ही हम आपको ये भी बताएँगे कि DOS Ke Features Kya Hai, अगर आप नहीं जानते हैं कि DOS Kya Hai तो यह पोस्ट आपके लिए बहुत उपयोगी होगी।

आपने बहुत सी बार Operating System शब्द सुना होगा जैसे कि Mobile या Computer खरीदते वक़्त दुकान वाला आपसे कहता हैं कि इस Mobile में Android Operating System है, या उस Laptop में आपको Windows 10, Operating System मिलेगा।

Computer, Laptop हो या Mobile इनको चलने के लिए हर वक़्त Operating System (OS) की जरूरत होती हैं। Operating System के बिना आपका Computer या Mobile कभी On नहीं हो सकता हैं। बिना Operating System आपका Mobile या Computer बिल्कुल उसी तरह है जिस तरह बिना आत्मा के हमारा शरीर।

चलिए अब हम ये जान लेते हैं कि What Is MS-DOS In Hindi लेकिन उससे पहले हमें थोड़ा ये भी मालूम होना चाहिये कि Operating System क्या हैं और उसका किसी भी Mobile, Computer या Laptop में क्या काम होता हैं।

Operating System एक System Software होता है जो Computer के Hardware और Software के बीच मध्यस्थ (पुल) के रूप में कार्य करता है। Operating System आपके Computer की Memory और Processes (प्रक्रियाओं) का प्रबंधन (Management) करता हैं।

साथ ही इसका काम Keyboard और Mouse से Input लेना, Monitor Screen पर Output देना, Input और Output को संभालना, फ़ाइल को संभालना और परिधीय उपकरण (Peripheral Devices) जैसे Disk Drives और Printer को कंट्रोल करना हैं।

अब आप ये जान गए होंगें की Operating System क्या हैं और इसका Computer में क्या काम होता हैं। अब हम आपको बताएँगे DOS Kya Hai Hindi में और साथ ही हम इसकी History, Features और Advantages के बारे में भी जानेंगे।

MS-DOS Kya Hai

MS-DOS, Command-Line पर आधारित एक Operating System हैं जिसे CLI (Command Line Interface) Operating System भी कहते हैं, जो पूरी तरह User पर निर्भर रहता है। मतलब ये कि User की Command के बिना ये कुछ भी काम नहीं करेगा। जब User उसको फ़ाइल Open करने की Command देगा तभी फ़ाइल Open होगी। और जो भी Command उस Computer को दिए जाएंगे वो सभी Text Form (लिखित रूप) में होंगें।

DOS Operating System का कोई भी काम Command के बिना नहीं हो सकता और इसलिए ऐसे Computer पर काम करने के लिए बहुत Commands याद रखने होते हैं। कई बार Commands इतने बड़े-बड़े हो जाते हैं कि हर किसी के लिए इतने बड़े Commands याद रखना उतना आसान नहीं होता है।

CLI (Command Line Interface) Operating System के बाद पहला GUI (Graphical User Interface) Operating System 1995 में आया और वो था ‘Windows95’ Operating System जो कि Microsoft की तरफ से ही था।

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MS-DOS Full Form

DOS को Microsoft ने ‘Seattle Computer Products’ से खरीदा था। फ़िर Microsoft ने DOS का नाम बदलने के लिए DOS के पहले ‘MS’ लगा दिया। यहाँ पर MS का मतलब और कुछ नहीं बल्कि ‘Microsoft’ हैं। जो कि आज दुनिया की एक बहुत बड़ी IT कम्पनी हैं।

DOS का Full Form है ‘Disk Operating System’

ऊपर हमने जाना डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम इन हिंदी, अब हम उसकी History और उसके अलग-अलग Feature के साथ समय-समय पर आने वाले Versions के बारे में बात करेंगें। MS-DOS के ये Versions 1981 (MS-DOS) से लेकर 2001 (Windows XP) तक Microsoft के द्वारा कुछ Improvements (सुधारों) के साथ Launch किये गए।

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History Of DOS

MS-DOS की उत्पत्ति दो Operating Systems, CP/M और QDOS से हुई है। CP/M को ‘Digital Research’ के Gary Kildall ने 1970 के मध्य में बनाया था। और QDOS को ‘Seattle Computer Products’ के Tom Paterson ने 1980 में बनाया था। QDOS काफी हद तक CP/M पर आधारित था।

फ़िर 1981 में Microsoft ने ‘Seattle Computer Products’ से QDOS को ख़रीद लिया और उसका एक नया नाम रखा MS-DOS 1.0 फिर Microsoft ने इसमें बहुत कुछ Improvement (सुधार) करने के बाद Microsoft ने इसे IBM को अपने नए Personal Computers में उपयोग करने के लिए दे दिया।

Version Of DOS

समय के साथ कुछ बदलाव करते हुए Microsoft के द्वारा MS-DOS के आठ अलग-अलग Version (संस्करण) Launch किये गए।

  • Version 1 में 8 तरह के MS-DOS Operating Systems Launch किये गए।
  • Version 2 में 5,
  • Version 3 में 9,
  • Version 4 में 3,
  • Version 5 में 4,
  • Version 6 में 4,
  • Version 7 में 2 और
  • Version 8 में 2 तरह के MS-DOS Operating Systems Launch किये गए।

आइए अब हम थोड़ा ये जान लेते हैं कि MS-DOS के इन Versions में हमें क्या-क्या बदलाव देखने को मिले:

  • Version 3.1 में हमें नेटवर्क के लिए सपोर्ट देखने को मिला।
  • Version 3.3 पहला Version था जिसमे 3.5 इंच, 1.44 MB की Floppy Drive का सपोर्ट मिला।
  • Version 4.0 में Multitasking और Graphics का सपोर्ट मिला।
  • Version 5.0 पहला Version था जिसमे 3.5 इंच, 2.88 MB की Floppy Drive का सपोर्ट मिला।
  • Version 7.0 में हमें पहला GUI (Graphical User Interface) वाला Operating System Microsoft का ‘Windows95’ देखने को मिला। जिसमें हमें और अच्छे Graphics देखने को मिले।
  • Version 7.1 में ‘Windows98’ कुछ नए फ़ीचर के साथ Launch किया गया।
  • Version 8.0 में हमें ‘Windows XP’ देखने को मिला और ये Operating System लोगों के बीच काफ़ी मशहूर रहा। आज भी कुछ लोग Windows XP Operating System को चलाते हैं।

अब आप जान गए होंगें Version Of DOS In Hindi अब हम जानेंगे कि DOS Kernel Kya Hai और इसका काम हैं।

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DOS Kernel Kya Hai

Kernel एक Program है जो किसी भी Operating System का Central Part होता हैं। जब Computer को On किया जाता है तो सबसे पहले Kernel और उसके बाद Operating System Memory में Load होता है, और Kernel तब तक Memory में रहता है जब तक Computer Shut Down नहीं हो जाता।

यह Computer के Hardware जैसे Memory, CPU और Input/Output Devices को Application Software से जोड़ता हैं।
Kernel भी दो तरह के होते हैं:

  • Monolithic Kernel, जिसमें कई तरह के Device Drivers होते हैं।
  • Microkernel, जिसमें सिर्फ Basic Functions होते हैं।

Kernel का Code आमतौर पर Memory के संरक्षित (सुरक्षित) क्षेत्र में Load रहता हैं, ताकि कोई और Program इसके Code की जगह ना लिखने पाए।

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Feature Of MS-DOS

  • MS-DOS फ़ाइल प्रबंधन करने में सहायक है। उदाहरण के लिए फ़ाइल बनाना, फ़ाइल Edit करना और फ़ाइल Delete करना।
  • MS-DOS एक एकल उपयोगकर्ता (Single User) Operating System है। एक उपयोगकर्ता इस Operating System में एक समय में काम कर सकता है।
  • MS-DOS Character (A-Z) पर आधारित Interface System हैं। MS-DOS Operating System में हम सिर्फ़ Characters या Letter (अक्षर) ही Type कर सकते हैं।

Advantages Of DOS

MS-DOS आज के Operating System की तुलना में बहुत ही छोटा Operating System हैं, और इसलिए आज के Operating Systems की तुलना में इसके कई Advantage हैं।

  1. जब Computer को On करते हैं तब MS-DOS काफ़ी जल्दी ‘Boot’ हो जाता हैं।
  2. पूरे MS-DOS Operating System को एक अकेली Modern Rom चिप पर आसानी से Store किया जा सकता हैं।
  3. MS-DOS बहुत ही Lightweight (हल्का) Operating System हैं, यह लगभग 8 MB में पूरा Install हो जाता हैं।
  4. यह बहुत छोटे System पर भी आसानी से चल सकता हैं।
  5. यह आपको किसी भी Process का ‘सीधे’ तथा ज्यादा अच्छे से नियंत्रण उपलब्ध कराता हैं।
  6. इसके द्वारा आप Bios (Basic Input Output System) तथा ज्यादातर Hardware तक सीधी पहुँच प्राप्त कर सकते हैं।

ऊपर हमने इन Points की सहायता से जाना Advantages Of DOS In Hindi

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Conclusion:

हाँ तो दोस्तों आपको हमारी आज की पोस्ट कैसी लगी आज हमने आपको बताया कि What Is DOS In Hindi और History And Version Of DOS In Hindi ये हमने आज की पोस्ट में जाना। उम्मीद है आपको समझ आया होगा और पसंद भी आया होगा, क्योंकि आज हमने सरल भाषा में आपको और Update जानकारी बताई है, जो आपके लिए उपयोगी और महत्वपूर्ण हैं।

हम आशा करते है आपके कई सवालों के जवाब आज आपको यहाँ मिले होंगे, अगर आपके मन में अब भी कुछ सवाल है तो वो भी आप Comment Box में Comment करके हमसे पूछ सकते हैं, हमारी टीम आपकी सहायता करने की कोशिश करेगी।

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Comments to: MS-DOS Kya Hai? MS-DOS Ke Kitne Versions Hai? – जानिए MS-DOS का इतिहास हिंदी में!
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    June 26, 2019

    Ms dos ka use ka use aaj ke time me to koi nhi krta hoga kyoki aaj kal to window pr sab graphical hota h Or easy hota hai

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