प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करना तो लाभदायक होता ही है। चाहे वो औषधि हो या खेती और अगर खेती की बात की जाए तो यह और भी बेहतर हो जाता है क्योंकि कृषि पर ही मानव जीवन पूरी तरह निर्भर होता है। प्राकृतिक खेती हमारे देश में बढ़ती ही जा रही है। यदि आप भी इस खेती का इस्तेमाल करना चाहते है तो आज की पोस्ट में हम आपको ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी देंगे।

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जितना ज्यादा प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग किया जाएगा उतना ही किसानों को इसका लाभ मिलेगा। क्योंकि इसमें बहुत ही कम ख़र्चा होता है। जिससे की किसानों की बढ़ती लागतों को कम किया जा सकेगा। तो आइये जानते है ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग क्या है जिसके द्वारा भी यह खेती करने में मदद मिलेगी।

Zero Budget Kheti Kaise Kare

Zero Budget Natural Farming Kya Hai

प्राकृतिक खेती अब दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग के प्रयोग से किसान अपने द्वारा बनायी गई खाद का ही इस्तेमाल करता है। जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता है। Zero Budget में फसल या फिर बागवानी की जो फसल होगी उनकी लागत का जो मूल्य होगा वह जीरो ही होगा। इसलिए इस खेती का नाम Zero Budget Natural Farming रखा गया।

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नीरज जीवनानी
संस्थापक

Zero Budget Natural Farming First State की बात करे तो सबसे पहले भारत के कर्नाटक राज्य में इसकी शुरुआत हुई थी। प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल अधिक मात्रा में हो इसलिये Zero Budget Natural Farming Project की शुरुआत की गई। कुछ राज्यों में इस तरह की खेती करना शुरू कर दी गई है जबकि Zero Budget Natural Farming State में आँध्र प्रदेश ने इस खेती को पूरी तरह से अपना लिया है।

ZBNF Full Form:

ZBNF का पूरा नाम – Zero Budget Natural Farming होता है !

किसी भी आधुनिक उपायों का प्रयोग इस खेती में नहीं किया जाता है। किसानों को इससे अच्छा खासा लाभ प्राप्त हो रहा है। यह गाय के गोबर, मूत्र से तैयार किया गया होता है। फ़सलों को उगाने के लिए और बढ़ने के लिए जो संसाधन ज़रुरी होते है वह सब घर से ही उपलब्ध किए जा सकते है। इसके लिए बाजार से या मंडी से इन संसाधनों को नहीं खरीदना होगा।

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Zero Budget Kheti Kaise Kare

ZBNF करने के लिए कुछ मुख्य आवश्यक घटकों की आवश्यकता होती है। इन चार तकनीकों का प्रयोग करके Zero Budget Natural Farming की जा सकती है।

आच्छादन

मिट्टी की नमी के संरक्षण के लिए और उसकी प्रजनन क्षमता को बनाकर रखने के लिए आच्छादन का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में मिट्टी की सतह पर मटेरियल को लगाया जाता है। इसकी वजह से खेती के दौरान मिट्टी की गुणवत्ता को किसी तरह की हानि नहीं होती है। आच्छादन के तीन प्रकार होते है।

  • मिट्टी आच्छादन – खेती करते समय मिट्टी की बाह्य सतह को किसी भी तरह की हानि से बचाने के लिए मिट्टी आच्छादन का इस्तेमाल करते है। मिट्टी की जल प्रतिधारण क्षमता को बेहतर बनाने के लिए इसमें मिट्टी के पास और भी मिट्टी को एकत्रित करके रखते है।
  • स्ट्रा आच्छादन – भूसा, यह खेती के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। सब्जी की अच्छी फसल पाने के लिए चावल और गेहूं के भूसे का प्रयोग किया जाता है।
  • लाइव आच्छादन – इस प्रक्रिया के अंतर्गत विभिन्न तरह के पौधे एक साथ लगाये जाते है। यह सारे पौधे अपने साथ के पौधों को बढ़ने में मदद करते है। इसके अंदर ऐसे दो पौधों को एक साथ लगाया जाता है जिनमें कुछ ऐसे पौधे लगाये जाते है जो कम धुप प्राप्त करने वाले पौधे को अपनी छाया प्रदान कर देते है।

वाफसा

पौधों की वृद्धि के लिए उनके बढ़ने के लिए ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता नहीं होती है। वह भाप की मदद से बढ़ते है। हवा और वाष्प के कणों का समान मात्रा में मिश्रण ही पौधों का निर्माण करते है। 50% हवा और 50% वाष्प की मात्रा होना चाहिए जिनकी वजह से ही पौधे विकसित होते है।

बिजामृत

जब नवीन पौधे के बीजों को रोपित करते है तब बिजामृत का इस्तेमाल किया जाता है। इनके द्वारा जो नए पौधे की जड़े होती है उनमें लगने वाली कवक, मिट्टी से जो बीमारी पैदा होती है और बीजों की बीमारी आदि सबसे बचा जा सकता है। बिजामृत तैयार करने के लिए गौमूत्र, पानी, चूना, गौबर का मिश्रण तैयार किया जाता है।

किसी भी तरह की फसल के बीज बोने के पूर्व बिजामृत को लगा दीजिए इसके बाद कुछ देर तक इन बीजों को सूखने दे इसके बाद इन्हें ज़मीन में बोया जा सकता है।

जीवामृत

इसके द्वारा ज़मीन के पौषक तत्वों की पूर्ति होती है। ज़मीन को पौषक तत्व प्राप्त होते है। इसके द्वारा मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों की गतिविधि बढ़ती है और फ़सलों की पैदावार बेहतर होती है।

बनाने की विधि – किसी प्लास्टिक या सीमेंट की टंकी में 200 लीटर पानी डाले। इसमें गाय का 10 किलो ताज़ा गोबर मिलाए। 5 से 10 लीटर गाय का गौमूत्र मिलाए। 2 किलोग्राम फलो के गुदे या गुड़ भी मिलाये। इसमें 2 किलोग्राम बेसन मिलाकर पूरे मिश्रण को अच्छे से मिला ले। 48 घंटे में यह तैयार हो जाएगा। इस बीच इसे 4 बार किसी डंडे की सहायता से मिला ले।

कैसे करे इस्तेमाल – इस मिश्रण का महीने में 2 बार फ़सलों पर छिडकाव करे। सिंचाई में इस्तेमाल किए जाने वाले पानी में भी इस मिश्रण को मिलाकर फ़सलों पर छिड़काव किया जा सकता है।

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Advantages Of Zero Budget Natural Farming

इस तरह की खेती करने के बहुत से फायदे होते है जो आपको नीचे बताये गए है। तो चलिए जानते है Zero Budget Natural Farming Ke Fayde क्या है।

  • इसका सबसे अच्छा फायदा यह होता है की यह खेती ज़ीरो बजट पर आधारित होती है। जिसमें किसानों का बहुत ही कम मात्रा में ख़र्चा आता है।
  • ZBNF Scheme से फसलों की पैदावार अच्छी होती है।
  • यह फसल की सेहत के लिए अच्छी होती है जो सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुँचाती है। क्योंकि इन फ़सलों को उगने में किसी तरह के कीटनाशक या केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  • यह फसल ज़मीन के लिए भी लाभदायक होती है। इससे ज़मीन का उपजाऊपन बने रहने में मदद मिलती है।
  • पानी की व्यर्थता में भी कमी होती है। पानी का कम प्रयोग करके अधिक सिंचाई की जा सकती है।
  • ज़मीन की और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ने में भी मदद मिलती है।

Conclusion:

Zero Budget Natural Farming करने से किसानों को बहुत से फायदे तो प्राप्त होते ही है साथ ही यह सेहत के लिए भी अच्छी होती है। ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित होती है। केमिकल का प्रयोग नहीं होने की वजह से बीमारी की समस्या भी उत्पन्न नहीं होगी। तो अगर आपको भी यह खेती करने का तरीका पसंद आया हो तो इसे ज़रुर अपनाए और पोस्ट पसंद आने पर इसे लाइक करे, शेयर करे साथ ही इससे सम्बन्धित आपके और भी सवाल हो तो कमेंट में पूछ सकते है और ऐसी ही आवश्यक जानकारी के लिए जुड़े रहे हमसे हिंदी सहायता पर, धन्यवाद!

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