“हर घर में हो साक्षरता का वास, तभी तो होगा देश का विकास” किसी भी विकसित या विकासशील देश की सबसे बड़ी ताकत होते है उस देश के युवा और बच्चे। सही मायनों में बच्चे ही देश की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होते है क्योंकि बच्चे ही तो बड़े होकर युवा बनते है और अपने ज्ञान द्वारा देश को आगे बढ़ाते है। अगर बचपन में ही वो शिक्षा से वंचित रह जाये या सही शिक्षा अर्जित न कर पाए तो आप सोच सकते है उस देश का भविष्य कैसा होगा।

प्राचीन काल से ही हमारा भारत वर्ष विश्व गुरु रहा है। शून्य की खोज हमारे ही देश के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट द्वारा की गयी थी। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रख्यात शिक्षा संस्थानों का भारत जन्म दाता रहा है। परन्तु विदेशी आक्रमणकारियों ने हमारे पुस्तकालय जला दिए, गुरुकुलों को नष्ट कर दिया। परिणामस्वरूप हमारा शिक्षा का स्तर गिर गया और आज़ादी के बाद भी लगातार गिरता ही चला गया।

बहुत से बच्चे पढ़ाई से वंचित हो गए और साक्षरता दर बहुत कम हो गयी। इसी में सुधार करने के लिए और सभी बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सके, इसके लिए भारत सरकार द्वारा RTE Act पारित किया गया है। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको आरटीई एक्ट क्या है? और आरटीई एक्ट कब लागू हुआ? की संपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।

RTE Act In Hindi

Right To Education Act Kya Hai

निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारत सरकार द्वारा नागरिकों को प्रदान किए गए 6 मौलिक आधिकारो में से एक संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार के अंतर्गत लागू किया गया एक प्रावधान है। सरल शब्दों में Right To Education Act Indian Kanoon है, जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A को RTE Act कहते है। इस एक्ट के अनुसार 6-14 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा के लिए क़ानूनी अधिकार प्राप्त है।

RTE Act Full Form:

आर.टी.ई. एक्ट का फुल फॉर्म Right To Education Act / शिक्षा का अधिकार अधिनियम है। इसे Right Of Children To Free And Compulsory Education Act / निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के नाम से भी जाना जाता है।

RTE Act Kab Lagu Hua:

RTE Act भारतीय संसद द्वारा 4 अगस्त 2009 को पारित किया गया था तथा 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ।

Right To Education Act In India

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लचीला और विस्तृत संविधान है। Right To Education Act के लागू होने के बाद भारत भी उन 135 देशों की सूची में सम्मिलित हो गया है। जहां बच्चो के लिए अनिवार्य तथा मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है।

Right To Education Act Key Points

Aims And Objectives Of Right To Education Act 2009 इस प्रकार है:

Provisions Of RTE Act 2009 के अंतर्गत सभी 6-14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
प्राइवेट स्कूलों को 6-14 वर्ष की उम्र वाले 25% गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करनी होगी तथा ऐसा नहीं करने पर वसूली गयी फीस से 10 गुना अधिक जुर्माना तथा स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है।

  • मान्यता रद्द होने के बाद भी स्कूल संचालित करने पर एक लाख रूपये तथा इसके बाद रोज़ाना दस हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
  • Shiksha Ka Adhikar Adhiniyam 2009 Ki Visheshta है कि इसमें विकलांग बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की उम्र 14 से बढ़ाकर 18 वर्ष की गयी है।
  • बच्चों को मुफ्त शिक्षा मुहैया करवाने की ज़िम्मेदारी केंद्र तथा राज्य की होगी।
  • प्रवेश के समय कई स्कूल प्रतिव्यक्ति शुल्क की मांग करते है और बच्चों के माता-पिता को साक्षात्कार भी देना पड़ता है। इस अधिनियम के तहत प्रवेश की इस प्रक्रिया को भी बदलने की बात कही गयी है।
  • इस अधिनियम के अनुसार बच्चों की स्क्रीनिंग और माता-पिता का इंटरव्यू लेने पर 25,000 तथा दोहराने पर 50,000 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा।
  • RTE अधिनियम के अनुसार शिक्षक ट्यूशन नहीं पड़ा सकते है।
  • इस एक्ट द्वारा जिन बच्चों का प्रवेश (एडमिशन) नहीं हुआ हो, वो अपनी आयु वर्ग के अनुसार एडमिशन करवा सकते है।
  • इस एक्ट द्वारा छात्रों और शिक्षकों के मध्य अनुपात, स्कूलों की इमारतों, शिक्षकों के कार्य समय और स्कूल कार्य दिवस आदि के मानक और अंतर बनाए गए है।
  • RTE Act विद्यार्थियों पर होने वाले शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न को रोकता है।
    शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा बाल सुलभ और बाल केंद्रित शिक्षा प्रणाली को शुरू किया गया है।
  • यह एक्ट बच्चे के संपूर्ण विकास, ज्ञान, क्षमता और प्रतिभा को बढ़ावा देने तथा बच्चे को भय, आघात एवं चिंता से मुक्त करने के लिए बनाया गया है।

Right To Education Act 2009 Role And Responsibilities Of Teachers

Shiksha Ka Adhikar Adhiniyam 2009 Me Shikshak Ki Bhumika के लिए भी प्रावधान दिए गए है:

  • इस प्रावधान के अनुसार यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक राज्य, जिला या ब्लॉक में शिक्षकों की संख्या औसत होने के बजाय छात्रों और शिक्षकों की संख्या में एक निश्चित अनुपात हो।
  • यह प्रावधान शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में शिक्षकों की समान संख्या में पोस्टिंग सुनिश्चित करता है।
  • यह प्रावधान गैर-शैक्षणिक कार्यो में शिक्षकों की तैनाती पर प्रतिबंध के साथ-साथ जनगणना, विधानसभा तथा लोकसभा चुनाव, आपदा प्रबंधन आदि कार्यो में भी शिक्षकों की भूमिका सुनिश्चित करता है।
  • RTE Act उचित रूप से प्रशिक्षित तथा शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करता है।

शिक्षा का अधिकार की आलोचना

शिक्षा का अधिकार अधिनियम की कुछ प्रमुख आलोचनाए या कमियाँ नीचे लिखी गयी है:

  • मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा से ज्यादा जरूरी है सामान शिक्षा। सरकार को घोषणा करना चाहिए थी कि, देश का प्रत्येक बच्चा एक ही तरह के स्कूल में जाएगा और सभी स्कूलों में सामान पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।
  • इस विधेयक में छः वर्ष तक की उम्र वाले 17 करोड़ बच्चों के बारे में कोई बात नहीं बताई गयी है।
  • इस विधेयक में मुफ्त शिक्षा के लिए बजट प्रावधान का जिक्र नहीं है।
  • इस अधिनियम द्वारा बिना किसी दस्तावेज़ के एडमिशन का जिक्र किया गया है। परन्तु कुछ राज्यों में पहले से ही चले आ रहे नियमों का पालन हो रहा है। जिनमे दस्तावेज़ जैसे बीपीएल कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, जाती प्रमाण पत्र आदि जमा करने के पश्चात् ही दाख़िला मिलता है। इन नियमों के कारण बहुत से अनाथ बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते है।
  • यह अधिनियम निजी प्रबंधकों के संवैधानिक अधिकार “बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के अपने संस्थानों को चलाना” का उल्लंघन करता है।

RTE Act 2009 Teachers Qualification

RTE एक्ट के अंतर्गत शिक्षकों के लिए Teachers Eligibility Test करवाया जाता है जिसके लिए न्यूनतम Qualification नीचे दर्शाया गया है:

प्राइमरी स्टेज कक्षा 1-5

सीनियर सेकंडरी न्यूनतम 50% अंको के साथ एवं D.El.Ed.
या
सीनियर सेकंडरी न्यूनतम 50% अंको के साथ एवं B.El.Ed.
या
सीनियर सेकंडरी न्यूनतम 50% अंको के साथ एवं D.Ed.
या
ग्रेजुएशन एवं D.El.Ed.

एलीमेंट्री स्टेज कक्षा 6-8

ग्रेजुएशन एवं D.El.Ed.
या
ग्रेजुएशन न्यूनतम 50% अंको के साथ एवं B.Ed.
या
सीनियर सेकंडरी न्यूनतम 50% अंको के साथ एवं B.El.Ed.
या
सीनियर सेकंडरी न्यूनतम 50% अंको के साथ एवं B.A. Ed. / B.Sc. Ed.

Right To Education Act Amendment

निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019 भारतीय संसद में 3 जनवरी 2019 को पारित किया गया। आरटीई अधिनियम 2019 में संशोधन के कुछ प्रमुख बिंदु नीचे दर्शाए गए है:

  • इस नए विधेयक में स्कूलों में नो डिटेंशन की नीति को समाप्त करने के लिए संशोधन किया है वर्तमान प्रावधान के अनुसार 8वीं कक्षा तक किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता है।
  • अगर कोई बच्चा कक्षा 5वीं या 8वीं में फेल हो जाता है तो इस नए विधेयक के अनुसार उस बच्चे को दो माह के भीतर पुनः परीक्षा देने का अवसर प्रदान किया जायेगा।
  • फेल हुए बच्चों के बेहतर प्रदर्शन के लिए दो माह तक विशेष शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
  • अगर बच्चा दोबारा परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाता है तो उस बच्चे को अनुत्तीर्ण किया जा सकता है।

Conclusion:

आज हमने आपको शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 से जुड़ी लगभग सभी जानकारियाँ उपलब्ध करवाई है। अगर आप किसी बच्चे का एडमिशन RTE Act के तहत करवाना चाहते है तो किसी भी स्कूल में एडमिशन करवा सकते है।RTE Act In CBSE Schools, State Board School आदि सभी Board में शिक्षा पाने का कानूनी हक़ प्रदान करता है। इसके अलावा यदि आप किसी भी कॉम्पिटिटिव परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो यह जानकारी आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

यदि आपके पास RTE Act से संबंधित कोई भी सवाल है तो आप हमसे कमेंट में पूछ सकते है। हम आपके सवालों के जवाब ज़रूर देंगे। दोस्तों अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आया है तो इसे Like ज़रूर करें एवं अपने दोस्तों से शेयर कर उन्हें भी RTC Act की जानकारी दें।

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1 COMMENT

  1. Kiya garib ke baccho ko ek samn siksha pane ka hak nahi Kiya…..
    Dehli ke sabhi school Mai parivartan aaya hai…
    Jhugee jhopadee ke Bichon Mai Jo parimari school hai jas ka tas pada hai….
    Akhir Kar inke mata/pita asiskhit hai islye Kiya……

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