वैसे तो Viral Fever होने का कोई भी मौसम स्थायी नही होता, लेकिन लगातार मौसम के बदलते रहने से उसके तापमान में बदलाव आते रहते है। जिस वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी नाज़ुक हो जाती है।

हम मान सकते है कि वायरल, बरसात के मौसम में कुछ ज्यादा ही सक्रिय हो जाते है जिस वजह से शरीर संक्रमित होकर हमें वायरल बुखार जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो आज की इस पोस्ट में हम आपको वायरल बुखार कितने दिनों में ठीक हो जाता है या वायरल फीवर से कैसे बचे के बारे में बताएँगे।

Viral Fever Kyu Hota Hai

Viral Fever Kya Hai

जैसा कि हमने लोगों से सुना ही होगा कि उन्हें वायरल बुखार हो गया है, कुछ ही लोग बोलते होंगे कि उन्हें वायरल हो गया है। वायरल फीवर एक प्रकार के वायरस से होने वाली बीमारी नही है, बल्कि यह कई अन्य तरह के वायरस से पैदा होने वाली संक्रमित रोगों को बतलाती है। वायरल फीवर की मुख्य पहचान है बार-बार आपके शरीर के तापमान का बढ़ना। खासकर Viral Fever In Kids और वृद्धों में आसानी से होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है।

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Viral Fever Kyu Hota Hai

सीवर का पानी, पिने के पानी में मिलना जो अधिकतर बरसात के समय में होता है और दूसरा यह कारण भी है कि वायरल एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बड़ी ही सरलता से फैलता है। रोग ग्रस्त व्यक्ति जब छींकता, खांसता या फिर उबासी लेता है। यहाँ तक की वह बोलता भी है तब द्रव की बारीक बूंदे हवा में मिल जाती है और यदि कोई व्यक्ति आस-पास है तो वह साँस लेने के माध्यम से वे बूंदे व्यक्ति के शरीर तक जा पहुँचती है। जैसे ही यह वायरस आपके शरीर में जाता है वैसे ही यह पूरी तरह से आपके शरीर में फैलने लगता है और यह आपको पूरी तरीके से संक्रमित कर देता है जिससे आपको वायरल फीवर हो जाता है।

Viral Fever Kitne Din Rehta Hai – आमतौर पर वायरल फीवर का असर लगभग 3-5 दिनों तक दिखाई देता है।

Viral Fever Ke Lakshan

वायरल फीवर के इन शुरुआती लक्षणों को पहचान कर इससे बचा जा सकता है:

  • बुखार के साथ-साथ ज्यादा थकान और बदन दर्द का होना।
  • चक्कर आना, ठंड लगना, सर दर्द व मांसपेशियों में दर्द।
  • आँखों का लाल होना व जलन करना, नाक का बहना, गले में दर्द और जोड़ों का दर्द।
  • उलटी-दस्त और कभी-कभी शरीर पर चकते पड़ना।
  • रुक-रुक कर तीव्र गति से बुखार आना (खासकर उन लोगों को दोपहर और शाम के समय वायरल फीवर का आना)।

वायरल फीवर की जाँच

आमतौर पर हम वायरल बुखार की पहचान उनके लक्षणों को देख कर ही पता लगा पाते है। इसके लिए कोई विशेष तरीके के परीक्षण की जरुरत नही होती है लेकिन कुछ जीवाणु संक्रमण का पता लगाने के लिए हमें रक्त परीक्षण की जाँच या अन्य कोई जाँच की जरूरत हो सकती है।

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Viral Fever Treatment (वायरल बुखार का इलाज)

आगे आपको वायरल फीवर के इलाज के कुछ तरीके बताये गए है तो आइए जानते है:

  • जब भी आपको बुखार आता है तब डॉक्टर के द्वारा वायरल फीवर मेडिसिन एलोपैथिक या एसिटामिनोफेन (पेरासिटामोल) तरह की दवाए लिखते है।
  • तरल पदार्थ का सेवन पूर्ण रूप से करे जैसे कि – चाय, पानी, सूप, नारियल पानी और दाल का पानी पर्याप्त मात्रा में दे।
  • शारीरिक क्रियाएँ अधिक नही करे क्योंकि इससे आपके शरीर के ठीक होने की गति कम हो जाती है।
  • गिले कपड़े से रोगी के शरीर को पोंछते रहिए और एंटीबायोटिक का उपयोग डॉक्टर की सलाह लेकर ही करे।

वायरल फीवर से बचाव

वैसे तो वायरल फीवर को रोकना आसान नही होता है लेकिन इन हानिकारक संक्रमण को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का भी ध्यान देना जरूरी होता है आगे आपको वायरल फीवर से बचाव के बारे में बताया गया है।

  • खांसते या छींकते समय रुमाल से अपने नाक और मुंह को अच्छे से ढक ले।
  • साफ-सफाई और हाथ को धोने का खास ध्यान रखे। खाना खाने से पहले और बाद में, शौच आदि के बाद अपने हाथ अच्छे से धोएं।
  • भीड़ वाली जगहों से जाने से बचे।
  • उबला हुआ पानी का ही सेवन करे और बारिश में भीगने से बचे।

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वायरल फीवर के घरेलू उपचार

वायरल फीवर से बचने के लिए आपको डॉक्टर को दिखाना तो है ही, लेकिन आप इसके अलावा अपने घर पर भी कुछ घरेलू उपचार कर सकते है जिससे कोई साइड इफ़ेक्ट नही होते है तो आइए जानते है उनके बारे में

धनिये का पानी

धनिये में भरपूर मात्रा में विटामिन और एंटीबायोटिक के गुण मौजूद होते है। इसका सेवन करने से भी वायरल बुखार से निजात पाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक गिलास पानी ले उसमे धनिये के बीज डालकर उसे उबाल ले। फिर उसे ठंडा करके पी लीजिए।

अदरक

यह शरीर और जोड़ों के दर्द के लिए लाभदायक होता है जो वायरल फीवर में होने वाले दर्द में निजात दिलाने में सहायक होता है। अदरक के पाउडर के साथ शहद मिलाकर आप इसे थोड़ी-थोड़ी देर में ले सकते है।

मेथी का पानी

यह वायरल बुखार के साथ अन्य कई बीमारियों से राहत दिलाता है। इसके लिए हमे मेथी के दाने को एक गिलास में रात भर भिगोकर रखना होगा और अगले दिन सुबह छानकर निश्चित समय के अन्तराल में इसका सेवन करना होगा।

Conclusion:

दोस्तों वायरल फीवर के लक्षण का पता पड़ते ही हम पोस्ट में दी गई सावधानियाँ अपना सकते है और साथ ही वायरल जिस समय ज्यादा सक्रिय होते है तब हम इन वायरल फीवर से बच सकते है। तो दोस्तों उम्मीद करते है हमारी यह जानकारी आप सभी के लिए उपयोगी होगी। तो अगर पोस्ट पसंद आयी हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करे ताकि यह जानकारी अन्य लोगों के भी काम में आये और वे भी वायरल फीवर से बच पाए।

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